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मुथूट फाइनेंस के सी. एस. आर. सहयोग से दिव्यांग खिलाड़ियों को मिली व्हीलचेयर एवं क्रिकेट किट, समावेशी खेलों को बढ़ावा देने की पहल

  लखनऊ में दिव्यांग खिलाड़ियों के सशक्तीकरण और खेलों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लेट्स गिव होप फाउंडेशन (Let’s Give Hope Foundation) द्वारा मुथूट फाइनेंस के सी एस आर सहयोग से व्हीलचेयर एवं क्रिकेट किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। योलो हार्मनी पार्क स्पोर्ट्स एरीना एंड टर्फ में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग देना है। साथ ही इनर व्हील क्लब बारादरी लखनऊ का भी सहयोग मिला। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के इन खिलाड़ियों सोमजीत सिंह (लखनऊ), अरविंद विश्वकर्मा (मिर्जापुर), हरीश कुशवाहा (झाँसी), आफताब अंसारी (हरिद्वार), राजा बाबू (गाजियाबाद), गौरव यादव (मेरठ), जीशान अंसारी (मेरठ), अनामिक गुर्जर (मेरठ), अनिल सिंघानिया (ललितपुर), अनमोल वशिष्ठ (मेरठ) और इरफान हैदर (अंबेडकर नगर) को व्हीलचेयर और क्रिकेट किट प्रदान की गई। कार्यक्रम के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश...

सरकार से रहम उम्मीद नही तो बंद हो जाएगी वोडाफोन-आइडिया, टेलीकॉम उद्योग को लगेगा बड़ा झटका


सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया की वो याचिका खारिज कर दी है जिसमें 2500 करोड़ रुपये सोमवार को और शुक्रवार तक 1000 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी। कंपनी ने अपनी याचिका में ये मांग भी की थी कि उसके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए। जस्टिस अरुण मिश्र की अगुवाई वाली बेंच ने वोडाफोन आइडिया की तरफ़ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मुकुल रोहतगी की दलीलें सोमवार को खारिज कर दीं।


इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया को किसी किस्म की राहत देने से इनकार कर दिया था ये रकम भले ही सरकारी राजस्व में अतिरिक्त कमाई के तौर पर दर्ज होगी पर ये माना जा रहा है कि पूरे टेलीकॉम उद्योग को इससे बड़ा झटका लगने वाला है। भारत भले ही दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजारों में शुमार होता है लेकिन इसके प्रमुख खिलाड़ी हाल के समय में बुरे दौर से गुजर रहे हैं।


टेलीकॉम कंपनियों को 13 अरब डॉलर की रकम सरकार को चुकानी है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च तक की मियाद तय की है। कोर्ट ने कंपनियों से ये भी पूछा है कि वक्त पर पैसा न चुकाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों पर क्यों न अवमानना की कार्रवाई की जाए? देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसले ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं।




देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक वोडाफोन आइडिया के लिए ये फैसला उनके मुश्किल वक्त में आया है। वोडाफोन आइडिया का घाटा पिछले हफ्ते ही कंपनी ने 6,453 करोड़ रुपये के तिमाही घाटा दर्ज किया था। पिछले साल इसी अवधि में ये घाटा 4998 करोड़ रुपये का था। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने आधिकारिक रूप से ये कहा कि अगर सरकार या कोर्ट से मदद नहीं मिली तो कंपनी को अपना कारोबार बंद करना होगा।



वोडाफोन आइडिया और उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी एयरटेल ये पैसा चुकाने के लिए ऐसे वक्त में और मोहलत मांग रहे हैं जब वे गिरे हुए कॉल और डाटा रेट और बढ़ते कर्ज़ के भार से दबे हुए हैं। 17 मार्च की मियाद और सरकार की तरफ़ किसी पहल के न होने की सूरत में ये सवाल उठने लगा है कि क्या ये वोडाफोन के भारत में कारोबार खत्म होने की शुरुआत है?




ब्रितानी कंपनी वोडाफोन भारत के टेलीकॉम बाजार की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। अगर कंपनी भारत में अपना कारोबार समेटती है तो इसका असर गैरमामूली होगा। आखिरकार कंपनी के पास 30 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं और वो हजारों लोगों को रोजगार देती है। साथ ही कंपनी पर ताला लगने का नकारात्मक असर पूरे टेलीकॉम बाजार पर होने की संभावना है।




अगर वोडाफोन आइडिया भारतीय बाजार में कोराबार समेटने का फैसला करते हैं तो इसका नतीजा ये होगा कि टेलीकॉम सेक्टर में केवल दो ही कंपनियां रह जाएंगी और वो होंगी रिलायंस जियो और एयरटेल। और भारती एयरटेल की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है। पिछली तिमाही में कंपनी ने 3 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया था और उसे सरकार को तकरीबन 5 अरब डॉलर की रकम चुकानी है।




टेलीकॉम बाजार की सबसे नई खिलाड़ी रिलायंस जियो के लिए ये फीलगुड वाली स्थिति है। बहुत से लोग टेलीकॉम बाज़ार की इस बदली हुई स्थिति के लिए रिलायंस जियो को ही जिम्मेदार मानते हैं। तीन साल पहले जियो ने टेलीकॉम बाजार में कदम रखते ही मोबाइल इंटरनेट की दरें इस कदर कम कर दी थीं कि कॉल मार्केट डेटा मार्केट में बदल गया। इसके साथ ही भारत दुनिया में सबसे सस्ती दरों पर मोबाइल इंटरनेट सर्विस देने वाला देश बन गया। लेकिन वोडाफोन आइडिया और एयरटेल का बिजनेस मॉडल बिखर कर रह गया।




इसके बाद से दोनों ही कंपनियों ने लाखों उपभोक्ता गंवाएं हैं। दोनों कंपनियों का संयुक्त घाटा 10 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है और अब उन्हें अगले महीने तक सरकार को एक बड़ी रकम चुकानी है। साल 2019 तक रिलायंस जियो के पास 35 करोड़ उपभोक्ता थे। माना जा रहा है कि वोडाफ़ोन आइडिया की तालाबंदी से जियो को ही सबसे ज़्यादा फ़ायदा होने वाला है।




टेलीकॉम मार्केट के जानकारों का अनुमान है कि साल 2022 तक जियो अपना मुनाफ़ा दोगुणा कर लेगी और तब तक कंपनी के उपभोक्ताओं की संख्या भी 50 करोड़ पार कर जाएगी। लेकिन पैसों को लेकर संवेदनशील माने जाने वाले भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है? संभवतः ये बहुत अच्छी खबर नहीं है। वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को हुए बड़े घाटे की वजह से तीनों ही कंपनियों ने अपनी दरें बढ़ा दी हैं।




अर्थशास्त्री विवेक कॉल कहते हैं, "कीमतों का बढ़ना अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है। हकीकत में ये अच्छी चीज होने वाली है क्योंकि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने का यही एकमात्र तरीका है। भारत में टेलीकॉम मार्केट के बचने और फलने-फूलने के लिए ऐसा होना जरूरी है।" लेकिन अगर ऐसा हुआ तो क्या भारत के बड़े टेलीकॉम बाजार के विकास में इससे सुस्ती आ सकती है? इस सवाल के जवाब के लिए अभी इंतजार करना होगा।




कंपनियां चाहती हैं कि केवल टेलीकॉम बिजनेस से होने वाली कमाई को ही इस उद्देश्य के लिए गिना जाए लेकिन सरकार इसे बड़े दायरे में देखती है। सरकार का कहना है कि गैर टेलीकॉम बिजनेस जैसे परिसंपत्तियों की बिक्री या डिपाजिट्स पर मिलने वाले ब्याज़ को भी इसमें गिना जाए। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और इसका मतलब ये हुआ कि टेलीकॉम कंपनियों को अब सरकार को 12।5 अरब डॉलर देने होंगे।


























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