होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
अपने देश में देवी-देवताओं के तो मंदिर बहुत हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने देश में एक भारतीय सैनिक का मंदिर भी है, जहां दूर-दूर से लोग शीश नवाने पहुंचते हैं। कहा जाता है कि इस भारतीय सैनिक ने मृत्यु के बाद भी सेना की नौकरी नहीं छोड़ी।सुनने में थोड़ा अजीब सा जरूर लग रहा होगा, लेकिन ये हकीकत है। सिक्किम की राजधानी गंगटोक में जेलेप दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बने इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। केवल भारतीय सेना ही नहीं, चीनी सेना भी उनके सम्मान में शीश नवाती है। हम बता रहे हैं सिपाही से बाबा बनें हरभजन सिंह की कहानी, जिसे पढ़कर आपका मन भी एक बार वहां जाने का जरूर करेगा: 30 अगस्त 1946 को पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के सदराना गांव में जन्में हरभजन 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती हुए। इसके बाद 1968 में 23वें पंजाब रेजिमेंट के साथ पूर्वी सिक्किम में तैनात थे। चार अक्टूबर 1968 को खच्चरों का काफिला ले जाते समय नाथुला पास के समीप उनका पैर फिसल गया और घाटी में गिरने से उनकी मौत हो गई। पानी का तेज बह...