लखनऊ में विश्व आदिवासी दिवस पर अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ का विशाल समारोह, सरकार से मांगे पूरी करने की मांग
लखनऊ। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से गोंड समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और अपनी संस्कृति, परंपरा के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
समारोह के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार के नाम एक स्मारक पत्र तैयार कर उसे शासन को प्रेषित करने की घोषणा की। इस पत्र में गोंड जाति एवं उसकी उपजातियों धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का उल्लेख किया गया है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 17 जिलों में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि शेष जिलों में उन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है। इससे जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि इस विसंगति को दूर कर पूरे उत्तर प्रदेश में गोंड एवं उसकी उपजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए। साथ ही जिनके पास पहले से प्रमाण पत्र हैं उन्हें उसी आधार पर और शेष लोगों को निर्धारित साक्ष्य पर तुरंत जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
समाज के प्रतिनिधियों ने राजस्व परिषद की वेबसाइट में गोंड की उपजातियों को अलग-अलग दर्शाए जाने पर भी आपत्ति जताई और इसे "गोंड (धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राजगोंड)" के रूप में दर्ज करने की मांग की। इसके अलावा जाति सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाकर केवल राज्य स्तर पर कराए जाने, सोनभद्र में आदिवासी भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने, नियुक्तियों में रोस्टर में अनुसूचित जनजाति को उचित स्थान देने और प्रदेश में अलग अनुसूचित जनजाति आयोग एवं वित्त विकास निगम गठित करने की मांग भी रखी गई।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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