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लखनऊ में स्व. रामविलास पासवान को सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि, चिराग पासवान बोले - पापा को दिया सम्मान हमारे लिए गर्व का क्षण

  लखनऊ, देश के दिग्गज नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म भूषण स्व. रामविलास पासवान जी की आज 6वीं पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजक स्वयं उनके पुत्र और केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान थे। सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य रूप से शामिल हुए और स्व. पासवान के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर चिराग पासवान ने भावुक होते हुए सोशल मीडिया पर आभार जताया। चिराग ने एक्स पर लिखा - *"योगी जी ने अपना बहुमूल्य समय निकालकर पापा को श्रद्धांजलि दी। उनका खुद आकर श्रद्धांजलि देना मेरे और मेरे परिवार के लिए सम्मान का क्षण है। इससे साफ है कि पापा और योगी जी का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्नेह और आत्मीयता का था।"* स्व. रामविलास पासवान को दलितों-पिछड़ों की आवाज माना जाता था और उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर के सपनों को पूरा करने में लगा दिय...

बैंक FD से ज्यादा रिटर्न,फिक्स्ड इनकम MF दिलाते हैं


भारत हमेशा से फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट वाला देश रहा है। पीढ़ियों से लोग निवेश के लिए स्वाभाविक रूप से पीपीएफ, बैंक डिपॉजिट, पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट वगैरह पर निर्भर रहे हैं। ऐसे निवेश से बेस्ट रिटर्न नहीं मिलता, यह सच है लेकिन दिक्कत यह है कि हम फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट में भी बेस्ट ऑप्शन नहीं चुन पाते हैं।
दो दशक में 50% का फर्क
फिस्क्ड इनकम ऑप्शन में सबसे अच्छे और बुरे विकल्प में 1.5-2.0% का फर्क होता है। लोग इन बातों पर ध्यान नहीं देते लेकिन 2% सालाना का फर्क दो दशक में बढ़ता हुआ निवेश में 50% तक का फर्क पैदा कर सकता है। आप कहेंगे कि कोई भी 20 साल के लिए निवेश नहीं करता लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कोई भी निवेश दो या तीन साल से ज्यादा नहीं चलता लेकिन ज्यादातर लोग साल दर साल, दशक दर दशक फिक्स्ड इनकम ऑप्शन में मोटी रकम लगाते रहते हैं। इसलिए, सेविंग्स के तौर पर हेवी रिटर्न से हाथ धोने का खतरा हर शख्स के साथ बना रहता है।

कम अवधि के डेट फंड सुरक्षित
ज्यादा से ज्यादा रियल पोस्ट टैक्स फिक्स्ड इनकम गेंस हासिल करने का बेस्ट तरीका बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट से फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड में शिफ्टिंग हो सकता है। कुछ खास तरह के डेट फंड्स में मची उथल-पुथल के बावजूद सबसे कम अवधि के डेट फंड सबसे सुरक्षित बने हुए हैं और फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले बहुत ज्यादा बेनिफिट दिलाते हैं। निवेश के तीनों पहलुओं- रिटर्न, लिक्विडिटी और टैक्सेशन के हिसाब से ये बेहतर होते हैं।

कभी भी कर सकते हैं रिडीम
बैंकों के एफडी से उलट ओपन एंडेड इनकम फंड में किया जानेवाला निवेश, रिटर्न के साथ समझौता किए बिना एक दिन के नोटिस पर कभी भी रिडीम किया जा सकता है। इसके अलावा, इनमें निवेशकों को यह तय नहीं करना पड़ता है कि उन्हें कितने समय के लिए निवेश करना है। आमतौर पर इनसे मिलने वाला रिटर्न समय के साथ बढ़ता हुआ फिक्स्ड डिपॉजिट से एक पर्सेंट ज्यादा हो जाता है। टैक्सेशन में फर्क को दरकिनार कर दें तो भी छोटे-छोटे फायदे इन्हें आकर्षक बना देते हैं।

टैक्सेशन में फर्क का गहरा असर
लेकिन टैक्सेशन में फर्क का गहरा असर होता है। यह दो तरह का है- पहला कम टैक्स रेट और दूसरा TDS। दोनों को मिलाकर देखें तो इनका असर बहुत ज्यादा होता है। म्यूचुअल फंड से हासिल होनेवाला रिटर्न टैक्स लॉ के तहत कैपिटल गेंस माना जाता है। इसके उलट, डिपॉजिट पर हासिल होने वाला इंट्रेस्ट इनकम माना जाता है और टैक्सपेयर के टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाता है। इंट्रेस्ट इनकम के मामले में टैक्सपेयर को उस पर हर साल की आमदनी की तरह टैक्स देना पड़ता है, चाहे आपने उसे भुनाया हो या फिर वह डिपॉजिट में लगता रहता हो।

एलटीसीजी का है झंझट
बैंक इस इनकम पर TDS काटता है। अगर बैंक से हासिल होनेवाली आपकी इंट्रेस्ट इनकम 10,000 रुपये सालाना से ज्यादा होती है तो बैंक उस पर 10% का TDS काट लेता है। इसका मतलब यह हुआ कि रिटर्न के पार्ट पर आपको चक्रवृद्धि दर से बढ़ोतरी का फायदा नहीं मिल पाएगा, क्योंकि यह टैक्स के तौर पर हर साल कट जाता है। इससे इन्वेस्टमेंट पीरियड के बाद हासिल होनेवाले रिटर्न पर गहरा असर होता है। बात यहीं खत्म नहीं होती। अगर आप तीन साल से ज्यादा समय तक निवेश में बने रहते हैं तो उसका गेन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। उस पर टैक्स इन्फ्लेशन इंडेक्सेशन के बाद ही देना होगा, जो FD में नहीं होता, क्योंकि उससे हासिल होनेवाला ब्याज सामान्य आय माना जाता है।

इन सभी फर्क को ध्यान में रखते हुए शॉर्ट टर्म डेट फंड में लगाए जाने वाले तीन साल के निवेश का एक्चुअल पोस्ट-टैक्स रिटर्न दूसरे ऑप्शन के मुकाबले लगभग दोगुना बैठेगा। ज्यादातर बचतकर्ताओं के लिए यह ट्रैजेडी है, जो फिक्स्ड इनकम ऑप्शंस में मोटी रकम निवेश करने के बावजूद उससे बेस्ट रिटर्न हासिल नहीं कर पाते हैं।


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