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यूपी चुनाव 2027 से पहले चिराग पासवान को बड़ा झटका, LJP(R) के दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल

लखनऊ ,उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक साथ कांग्रेस की सदस्यता ले ली। लखनऊ में हुए जॉइनिंग कार्यक्रम में लोकेश कुमार श्रीवास्तव, पीयूष सोमानी और वेद प्रकाश के नेतृत्व में लोजपा (रामविलास) के दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाकर स्वागत किया। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान ने कुछ महीने पहले ही ऐलान किया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके बाद से पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगी थी। यूपी में वैसे भी लोजपा का संगठन ज्यादा मजबूत नहीं माना जाता, ऐसे में चुनाव से पहले ही कार्यकर्ताओं का पाला बदलना पार्टी की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है। *दलित वोट बैंक पर सबकी नजर* यूपी की राजनीति में दलित वोट बैंक की भूमिका बेहद अहम है। इसी वोट बैंक को साधने के...

नगर निकाय निदेशालय लखनऊ में 3500 कर्मियों का काम कर रहे सिर्फ 20 कर्मचारी, संख्या बल बढ़ाने की मांग, मृतक आश्रित कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप

 

नगर निकाय निदेशालय, उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण शासकीय कार्यों पर असर पड़ रहा है। निदेशालय में उ०प्र०पालिका केन्द्रीयित सेवा के लगभग 3500 अधिकारी/कर्मचारियों के अधिष्ठान, पेंशन, हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट केस, सूचना आयोग, विभिन्न योजनाओं सहित अन्य सभी कार्य मात्र 20 कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं।


संघ के अनुसार निदेशालय में वर्तमान में 01 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, 07 प्रशासनिक अधिकारी, 12 प्रधान सहायक और 04 कनिष्ठ सहायक तैनात हैं। इनमें 03 वैयक्तिक सहायक/आशुलिपिक भी शामिल हैं जो केवल अधिकारियों द्वारा निर्देशित कार्य ही करते हैं। इसके बावजूद प्रत्येक पटल सहायक के पास कई-कई पटलों का अतिरिक्त कार्यभार है।


"बार-बार अनुरोध के बावजूद नहीं हो रहा पुनर्गठन"

संघ का कहना है कि संख्या बल अत्यधिक कम होने के बावजूद पटल सहायक पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं। संख्या बल बढ़ाने और पुनर्गठन के लिए संघ द्वारा कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अधिकारियों द्वारा इस प्रकरण को बार-बार टाल दिया जा रहा है। आरोप है कि प्रत्येक अवकाश में भी निदेशालय खुलवाया जाता है, जबकि अधिकारीगण अपने आवास पर रहते हुए वहीं फाइलें मंगाते हैं। इससे कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


मृतक आश्रित कर्मचारियों को किया जा रहा टारगेट: संघ

संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निदेशालय में तैनात 20 कर्मचारियों में से 13 कर्मचारी मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त हैं। इन्हें बार-बार "मृतक आश्रित" कहकर अपमानित किया जा रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं। इन 13 में से 08 कर्मचारी वर्ष 2014 से पहले से कार्यरत हैं और शेष की नियुक्ति 2014 के बाद हुई है। लगभग सभी को एक से अधिक पदोन्नति मिल चुकी है और 03 को छोड़कर सभी का स्थाईकरण भी हो चुका है।


संघ के अनुसार श्री बाबूलाल गौतम, वैयक्तिक सहायक द्वारा निदेशक महोदय को भ्रमित कर यह माहौल बनाया जा रहा है। उनकी मंशा निदेशालय में कार्यरत मृतक आश्रितों को हटाकर उनके स्थान पर निकायों के केन्द्रीयत/अकेन्द्रीयत कर्मचारियों को तैनात करने की है।


"काम का दबाव और उत्पीड़न से प्रभावित हो रहा स्वास्थ्य"

पत्र में कहा गया है कि कार्य के अत्यधिक दबाव और लगातार उत्पीड़न के कारण सभी कर्मचारी तनाव में हैं। इसका असर उनके मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। साथ ही शासकीय कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसका समस्त उत्तरदायित्व प्रशासन का होगा।


संघ ने समस्याओं के निवारण के लिए वार्ता हेतु समय प्रदान करने का अनुरोध किया है।

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