लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
लेखक देवेन्द्र प्रताप सिंह
लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ
लखनऊ विश्वविद्यालय के नव-नियुक्त अत्यंत लोकप्रिय यशस्वी कुलपति, *प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी सर* के साथ हमारी कल और परसों की आत्मीय मुलाकात और उनके प्रेरणादायी विजन को साझा करने की अपने मन की उत्सुकता को रोक नहीं पा रहा हूं, जिसे मैं शोसल मिडिया पर और तमाम मीडिया डिबेट और प्रिंट मीडिया के माध्यम से साझा करना चाह रहा हूं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के लोकप्रिय यशस्वी कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी महोदय आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षित होने के साथ-साथ उनके पास उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 38 वर्षों से अधिक का एक बेहद शानदार अकादमिक और प्रशासनिक अनुभव है। लखनऊ विश्वविद्यालय का कार्यभार संभालने से पहले वे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) गोरखपुर, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (NSUT) नई दिल्ली के कुलपति और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के भी वीसी का अतिरिक्त प्रभार संभाल चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके 225 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं और वे IETE के फेलो सदस्य हैं।
कुलपति महोदय की प्राथमिकताओं जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम, डिजिटल शिक्षा और छात्रों के भविष्य निर्माण तथा उनके सरल व विजनरी व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूं। सर के व्यक्तित्व में सादगी, श्रेष्ठता और विजन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
माननीय कुलपति महोदय से मुलाकात में उनका सौम्य, अत्यंत सरल और सहज व्यक्तित्व दिल को छू गया।
*उच्च शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ बतौर कई उच्च संस्थाओं कुलपति* के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाने के बाद, अब वे हमारे गौरवशाली लखनऊ विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
*छात्रों के भविष्य और प्रोफेशनल कोर्सेज पर विशेष ध्यान:*
मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के विकास और विशेष रूप से छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य को लेकर उनका विजन स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वे न केवल पारंपरिक शिक्षा बल्कि आज के दौर की मांग के अनुसार *व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Professional Courses)* को सुदृढ़ करने, डिजिटल शिक्षा का विस्तार करने और 'नेशनल एजुकेशन पॉलिसी' (NEP) को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बेहद गंभीर हैं। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय के हर छात्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और सही मार्गदर्शन देना है।
उनके विचारों की स्पष्टता, काम के प्रति निष्ठा और छात्रों के भविष्य निर्माण के प्रति उनकी संवेदनशीलता से मैं व्यक्तिगत रूप से अत्यंत प्रभावित हूँ। ऐसे विजनरी और कर्मठ मार्गदर्शक के नेतृत्व में विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा बनकर काम करने को लेकर मन में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
निश्चित रूप से, प्रोफेसर सैनी जी के मार्गदर्शन में लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी गरिमा का एक नया अध्याय लिखेगा। आदरणीय कुलपति जी को उनके इस शानदार और विजनरी कार्यकाल के लिए हृदय से अनंत शुभकामनाएं!
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