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लखनऊ प्रेस क्लब में साहित्य का संगम - पेशवा वंशज ने किया 'संक्रान्ति का संहार' और 'काल यात्रा' का लोकार्पण

  लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ।         उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे‌ हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...

वो मुझे भी मार देंगे... ठेके के बाहर चिल्ला रहा था शराबी, थाने ले गई पुलिस तो उड़े होश! खुला गया कंकाल का राज






 नई दिल्ली: बात लगभग 8 महीने पुरानी है। तारीख थी 21 नवंबर 2023, वक्त सुबह करीब 8 बजे और जगह मुंबई के नायगांव इलाके का हाईवे। बाइक पर जा रहे दो लोग सड़क किनारे टॉयलेट करने के लिए रुकते हैं। दोनों झाड़ियों के पास पहुंचे ही थे कि उनकी नजर वहां एक सड़ी गली लाश पर पड़ती है। दोनों घबरा जाते हैं और तुरंत पुलिस को फोन करते हैं। तब तक आसपास के कुछ और लोग भी जमा हो जाते हैं। लाश कुछ दिन पुरानी थी और लगभग कंकाल बन चुकी थी। कुछ देर में पुलिस की गाड़ी भी मौके पर पहुंचती है और पंचनामा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा देती है।

शुरुआत में पुलिस को लगता है कि ये कोई सड़क हादसा है और एक्सीडेंट की धाराओं में केस दर्ज हो जाता है। लेकिन अगल दिन, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आती है तो पता चलता है कि ये एक्सीडेंट नहीं, बल्कि कत्ल का मामला है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वाले की उम्र 25 से 30 साल के बीच थी और उसके सिर पर हमला कर उसे मारा गया था। अब पुलिस अधिकारियों के होश उड़ जाते हैं। सबूत की तलाश में मौका-ए-वारदात को फिर से खंगाला जाता है, लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगता। मरने वाले शख्स की पहचान के लिए लाश के कपड़े और चप्पलों की फोटो आसपास के थानों में भेजी जाती है।

केस में ना कोई सुराग, ना सबूत

तस्वीरों के जरिए पता चलता है कि जिसकी मौत हुई, उसका नाम लवेश माली थी। लवेश ऑटो रिक्शा चलाता था और उसके परिवार के लोगों ने कुछ दिन पहले ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब पुलिस लवेश के कातिल की तलाश में जुट जाती है। हालांकि, पुलिस के पास ना कोई सुराग था और ना ही सबूत। ये मामला मुंबई क्राइम ब्रांच के लिए ब्लाइंड मर्डर केस का बनता जा रहा था। पूछताछ शुरू होती है, तो पता चलता है कि लवेश अक्सर शाम में शराब पीने के लिए कुछ खास जगहों पर जाता था। पुलिस उस इलाके के अपने मुखबिरों को एक्टिव कर देती है।

मुखबिर से मिलता है शराबी का सुराग

एक दिन पुलिस का एक खबरी थाने पहुंचता है और बताता है कि उसे लवेश माली के बारे में एक सुराग मिला है। खबरी के मुताबिक, जिन ठेकों पर लवेश का आना-जाना था, वहीं पर एक और आदमी हर रोज शराब पीने जाता है। वो पहले शराब पीता है और फिर बाहर निकलकर चिल्लाता है कि वे मुझे भी मार देंगे। इसके बाद शराब के नशे में वहीं बेहोश होकर गिर जाता है। पुलिस उस आदमी के बारे में तहकीकात करती है तो पता चलता है वो लवेश माली को जानता था। तुरंत एक टीम भेजी जाती है और पुलिस उस आदमी को पूछताछ के लिए थाने ले आती है।

मुखबिर से मिलता है शराबी का सुराग

एक दिन पुलिस का एक खबरी थाने पहुंचता है और बताता है कि उसे लवेश माली के बारे में एक सुराग मिला है। खबरी के मुताबिक, जिन ठेकों पर लवेश का आना-जाना था, वहीं पर एक और आदमी हर रोज शराब पीने जाता है। वो पहले शराब पीता है और फिर बाहर निकलकर चिल्लाता है कि वे मुझे भी मार देंगे। इसके बाद शराब के नशे में वहीं बेहोश होकर गिर जाता है। पुलिस उस आदमी के बारे में तहकीकात करती है तो पता चलता है वो लवेश माली को जानता था। तुरंत एक टीम भेजी जाती है और पुलिस उस आदमी को पूछताछ के लिए थाने ले आती है।

इस वजह से हुई थी लवेश की हत्या

पूछताछ में दोनों बताते हैं कि इस हत्याकांड में एक नाबालिग लड़का और शामिल था। दरअसल, लवेश इनमें से एक आरोपी का ऑटो रिक्शा किराए पर चलाता था। एक दिन उसकी टक्कर एक डंपर से हो गई और ऑटो को काफी नुकसान पहुंचा। इसपर ऑटो मालिक ने लवेश से ही ऑटो को ठीक कराने का खर्चा मांगा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। शाम को शराब पीने के बाद दोनों के बीच फिर से बहस हुई और ऑटो मालिक ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर उसके सिर पर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद इन लोगों ने उसकी लाश को सड़क किनारे ही फेंक दिया। हालांकि, इन्हें अंदाजा नहीं था कि वहां एक शख्स और मौजूद था, जो छिपकर सबकुछ देख रहा था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और इनके ऊपर हत्या का केस चल रहा है।

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