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लखनऊ प्रेस क्लब में साहित्य का संगम - पेशवा वंशज ने किया 'संक्रान्ति का संहार' और 'काल यात्रा' का लोकार्पण

  लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ।         उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे‌ हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...

वर्ल्ड नो टोबैको डे (विश्व तंबाकू निषेध दिवस) पर डॉक्टर्स, जन स्वास्थ्य समूहों और कैंसर पीड़ितों ने भारत सरकार से अपील की कि तंबाकू की खपत और कैंसर के मामलों के प्रसार को कम करने के लिए भारत के तंबाकू नियंत्रण कानूनों को मजबूत करे

 


लखनऊ,  वर्ल्ड नो टोबैको डे (विश्व तंबाकू निषेध दिवस) के मौके पर डॉक्टर्स, जन स्वास्थ्य समूहों और कैंसर पीड़ितों ने सरकार से अपील की है कि तंबाकू नियंत्रण कानूनों को मजबूत करे ताकि तंबाकू की खपत और कैंसर के मामलों को मौजूदगी कम हो। संसदीय समिति की 139वीं रिपोर्ट की सिफारिश पर विचार करते हुए सरकार से यह मांग की गई है। 

इंडियन कौसिंल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर से पीड़ित भारतीयों की संख्या 2022 के मुकाबले 2025 में में 26.7 मिलियन से बढ़कर 29.8 मिलियन होने की संभावना है।

तंबाकू कैंसर का प्रमुख कारण है। मृत्यु के 6 से 8 प्रमुख कारणों के लिए तम्बाकू का उपयोग एक प्रमुख जोखिम कारक है और लगभग 40% गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जिनमें कैंसर, हृदय-संवहनी रोग और फेफड़े के विकार शामिल हैं, सीधे तौर पर तम्बाकू के उपयोग के लिए जिम्मेदार हैं।


स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की स्थायी समिति की 139वीं रिपोर्ट, "कैंसर देखभाल योजना और प्रबंधन: रोकथाम, निदान, अनुसंधान और कैंसर उपचार की सामर्थ्य" राज्यसभा/लोकसभा में प्रस्तुत की गई।  समिति ने पाया कि भारत में, तंबाकू का उपयोग विभिन्न रूपों में, सभी कैंसर का लगभग 50% हिस्सा है। इन्हें तम्बाकू से संबंधित कैंसर कहा जाता है, इसलिए ये कैंसर रोके जा सकते हैं।


समिति अपनी चिंता व्यक्त करती है कि जहां कैंसर के इलाज पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं इसके मूल कारण यानी तंबाकू के सेवन पर वांछित ध्यान नहीं दिया जाता है। समिति को यह समझ में आया है कि तम्बाकू का नशा करने वाले ज्यादातर व्यसनी शुरुआत किशोरावस्था में करते हैं, यह सरकार को युवाओं द्वारा तम्बाकू सेवन की जाँच के उपायों पर ध्यान देने की सिफारिश करती है क्योंकि भारत में "छोड़ने की दर" बहुत कम है। 

देश में तंबाकू के सेवन को हतोत्साहित करने की तत्काल आवश्यकता है। तद्नुसार समिति सरकार से तम्बाकू नियंत्रण पर प्रभावी नीतियां बनाने की सिफारिश करती है। समिति की सिफारिश है कि सरकार को किशोर आबादी को तंबाकू की लत का शिकार होने से रोकने के लिए रणनीति तैयार करनी चाहिए।

समिति ने रिपोर्ट में, उल्लेख किया है, कोटपा भारत में प्रमुख तंबाकू विरोधी कानून है जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध, विज्ञापन और प्रायोजन, नाबालिगों को बिक्री और पैक पर चेतावनी शामिल है। समिति ने आगे कहा कि भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने 2025 तक तंबाकू के मौजूदा उपयोग के मुकाबले 30% की सापेक्ष कमी लाना निर्धारित किया है। समिति का मानना है कि एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मंत्रालय को तंबाकू उत्पादों की बिक्री को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने चाहिए। समिति सरकार से सिफारिश करती है कि हवाई अड्डों, होटलों और रेस्त्रां में निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों को समाप्त कर दिया जाए तथा संगठनों में धूम्रपान मुक्त नीति को प्रोत्साहित किया जाए। समिति सरकार से सिगरेट की खुली या बिना पैकेट एक या ज्यादा सिगरेट  की बिक्री पर रोक लगाने तथा अपराधियों पर कठोर दंड लगाने और जुर्माने की सिफारिश भी करती है। 


समिति की सिफारिशों की सराहना करते हुए, डॉ पंकज चतुर्वेदी प्रोफेसर और सर्जन, हेड एंड नेक सर्जरी विभाग, टाटा मेमोरियल सेंटर ने कहा, "यह वैज्ञानिक रूप से स्थापित है कि यदि किसी व्यक्ति को 21 वर्ष और उससे अधिक आयु तक तम्बाकू से दूर रखा जाता है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि वह जीवन भर तम्बाकू से दूर रहेगा। कई देशों ने अब तंबाकू उत्पादों की बिक्री की न्यूनतम आयु 21 वर्ष बढ़ा दी है। तम्बाकू उत्पादों की बिक्री के लिए न्यूनतम कानूनी आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करना और कोटपा 2003 में संशोधन करके धूम्रपान क्षेत्र/बिक्री विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाना, युवाओं को तम्बाकू से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नियमित धूम्रपान और तम्बाकू के उपयोग की शुरुआत तथा प्रगति को कम करने की क्षमता है।’


“तंबाकू उत्पादों के सेवन से बच्चों, युवाओं और बड़े पैमाने पर जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तम्बाकू उत्पादों का अप्रतिबंधित और आकर्षक विज्ञापन उन भोले-भाले लोगों को आकर्षित करता है, जो इन व्यसनी उत्पादों के सेवन के प्रतिकूल परिणामों से अवगत नहीं हैं। प्रभावशाली दिमाग वाले बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव एक स्वागत योग्य कदम है।" - भावना बी मुखोपाध्याय, मुख्य कार्यकारी, वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया। 


आस-पास के लोगों के धूम्रपान से पीड़ित सुश्री नलिनी सत्यनाराय ने भी कैंसर पीड़ित के रूप में अपनी पीड़ा को आवाज दी है ताकि सेकेंड हैंड धुएं के कारण धूम्रपान न करने वालों की पीड़ा की ओर भी ध्यान आकर्षित किया जा सके। गले के कैंसर के इलाज से अब ठीक हो चुकी नलिनी ने अपील की,"सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने से धूम्रपान नहीं करने वाले हजारों लोगों का जीवन जोखिम में होता है। होटल, रेस्तरां, बार, हवाईअड्डों में निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र से सिगरेट के धुएं गैर-धूम्रपान वाले क्षेत्र में पहुंच जाते हैं और इससे कैंसर तथा फेफड़ों और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोटपा अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है ताकि किसी भी परिसर में धूम्रपान की अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में इसे पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त बनाना है।" 8 साल पहले इसकी बीमारी ठीक हुई। नलिनी का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कारणों की पड़ताल करते हुए बताया कि उसके पति के धूम्रपान के कारण वह सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आई होगी और इस कारण ऐसा हो सकता है। 

भारत में तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी, 27 करोड़ है (ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार) और इनमें से 13 लाख से अधिक हर साल तंबाकू से संबंधित बीमारियों से मर जाते हैं। तम्बाकू के उपयोग से होने वाली बीमारियों की कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत 182,000 करोड़ रुपये थी, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.8% है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार, भारत में 13-15 वर्ष की आयु का लगभग पांचवां छात्र तंबाकू उत्पादों का उपयोग करता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी किए गए इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से पता चला है कि 38 प्रतिशत सिगरेट, 47 प्रतिशत बीड़ी और 52 प्रतिशत धूम्रपान रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं ने अपने 10वें जन्मदिन से पहले ही इसे आदत बना ली थी।

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