लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
कार्यक्रम में 100 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया , साथ हीं होली के गानो पर सुंदर डान्स किया कार्यक्रम में काव्य सम्मेलन का आयोजन भी हुआ ।कार्यक्रम में शिल्पा ने अरे जा रे हट नटखट , पंखुरी ने मोहे रंग दो लाल , दीप्ति आहूजा ने बलम पिचकारी ,साध्वी ने तोरी लचके जब कमरिया , ऋचा ने राज़ी बोल जा , सिमरनजीत ने बलम पिचकारी पर सुंदर नृत्य किया , वही विभा त्रिपाठी ने कभी ख़ुद को भी आज़माया करो ,अनिता शर्मा ने हर बार छलि गई नारी ,अल्पना ने हम तो है
नारियाँ , ज्योति सिंह ने तुम बहुत याद आती हो , आकांक्षा ने रखते है हम दिल में जिसको, इशमीता ने हाँ मैं नारी हुँ ,जैसी सुंदर काव्य रचनाओं का प्रस्तुतिकरन किया ।
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