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किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद ने पीड़ित पति को न्याय दिलाने का किया वादा

बलरामपुर।जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। *पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद -* इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को न...

डा. सूर्यकान्त अंतराराष्ट्रीय ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन (जीएएफआईओ) फेलोशिप से सम्मानित



लखनऊ, 25 फरवरी । किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सूर्यकान्त को ग्लोबल एसोएशियन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इण्डियन ओरिजिन (जीएएफआईओ) फेलोशिप से सम्मानित किया गया है । इस संस्था की स्थापना वर्ष 2011 में अपोलो अस्पताल के अध्यक्ष डॉ प्रताप सी रेड्डी द्वारा की गयी थी । इस संगठन का उद्देश्य दुनिया में भारतीय मूल के 14 लाख चिकित्सकों को एक मंच पर एक साथ लाना है, जिससे यह चिकित्सक विश्व के साथ साथ भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकें। यह पुरस्कार उनके द्वारा कोरोना महामारी के दौरान समाज को जागरूक करने एवं सामाजिक सेवा कार्यों तथा विगत कई वर्षों से चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया गया । 

ज्ञात रहे कि डा. सूर्यकान्त केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में 17 वर्ष से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं एवं 10 वर्ष से विभागाध्यक्ष के पद की सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा वह चिकित्सा विज्ञान सम्बंधित विषयों पर 18 किताबें भी लिख चुके हैं तथा एलर्जी, अस्थमा, टी.बी. एवं कैंसर के क्षेत्र में उनके अब तक लगभग 400 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं । इसके साथ ही दो  अंतर्राष्ट्रीय पेटेन्ट का भी उनके नाम श्रेय जाता है । लगभग 200 एमडी/पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, 50 से अधिक शोध परियोजनाओं का निर्देशन, 19 फैलोशिप, 11 ओरेशन एवार्ड का भी श्रेय उन्हें जाता है । उन्हें अब तक अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 154 पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है । यह पुरस्कार उनके द्वारा चिकित्सा शिक्षक के रूप में विगत 25 वर्षों से उनके द्वारा किये गये अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने एवं कोरोना महामारी के दौरान समाज को जागरूक करने एवं समाजिक सेवा कार्यों के चलते प्रदान किये गये हैं। 

डा. सूर्यकान्त को पहले भी अमेरिकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन, इण्डियन चेस्ट सोसाइटी, नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन आदि संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 18 फेलोशिप सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें उप्र सरकार द्वारा विज्ञान गौरव अवार्ड (विज्ञान के क्षेत्र में उप्र का सर्वोच्च पुरस्कार) और केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा एवं उप्र हिन्दी संस्थान से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

ज्ञात रहे कि डा. सूर्यकान्त कोविड टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। इसके साथ ही चेस्ट रोगों के विशेषज्ञों की राष्ट्रीय संस्थाओं इण्डियन चेस्ट सोसाइटी, इण्डियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी एवं नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन (एनसीसीपी) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं तथा इण्डियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके है एवं डा. सूर्यकान्त आईएमए, लखनऊ के अध्यक्ष एवं उप्र आईएमए एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज के चेयरमैन रह चुके है एवं वर्तमान में आईएमए-एएमएस के राष्ट्रीय वायस चेयरमेन है। 

डॉ. सूर्यकांत पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से अपने लेखों व वार्ताओ एवं टी.वी. व रेडियो के माध्यम से लोगों  में एलर्जी, अस्थमा, टी.बी, कैंसर जैसी बीमारी से बचाव व उपचार के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं एवं इस महामारी काल में जनमानस को कोरोना जैसी घातक बीमारी के बारे में इलेक्ट्रानिक/प्रिंट/सोशल मीडिया के द्वारा जागरूक करते रहे हैं तथा डा. सूर्यकान्त ने कोरोना से पीड़ित ग्रामीणों के लिए एक सरल व सुगम चिकित्सा प्रोटोकॉल तैयार किया एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से दवाएं बंटवाकर हजारों लोगों की जान बचाई। डा. सूर्यकान्त को उप्र शासन द्वारा कोविड से प्रभावित जनपदों जैसे- आगरा, कानपुर, मेरठ व वाराणसी आदि शहरों में कोविड की समीक्षा सुक्षाव एवं सुधार के लिये भेजा जा चुका है।

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