_मेदांता अस्पताल की एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑनकोलॉजी एवं हीमैटो ऑनकोलॉजी विभाग की डॉ. अंजली सचान ने कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज पर विस्तार से जानकारी दी।_ _डॉ. अंजली सचान ने बताया कि तंबाकू-शराब का सेवन, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ वायरल इंफेक्शन कैंसर के मुख्य कारण हैं।_ _उन्होंने 7 सबसे आम कैंसर के बारे में भी बताया:_ *_1. फेफड़े का कैंसर* - मुख्य कारण धूम्रपान और प्रदूषण_ *_2. ब्रेस्ट कैंसर* - महिलाओं में सबसे आम, आनुवंशिक और हार्मोनल कारण_ *_3. कोलन कैंसर* - अस्वस्थ खानपान और मोटापे से जुड़ा_ *_4. प्रोस्टेट कैंसर* - 50 साल से ऊपर पुरुषों में आम_ *_5. मुंह का कैंसर* - तंबाकू और गुटखे के सेवन से_ *_6. सर्वाइकल कैंसर* - महिलाओं में, HPV वायरस प्रमुख कारण_ *_7. ब्लड कैंसर* - आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से_ _डॉ. सचान ने कहा कि वजन घटना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, लंबे समय तक खांसी या घाव न भरना जैसे लक्षण दिखें तो ...
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन अरबों डॉलर के सीपीईसी के तहत निर्माण कार्य तेज कर रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को बताया गया कि चीन ने सीपीईसी के तहत पीओके में 1124 मेगावाट की एक बिजली परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहाला जलविद्युत परियोजना का ब्योरा सोमवार को पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री उमर अयूब की अध्यक्षता वाली प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की 127वीं बैठक के दौरान पेश किया गया। बैठक में बताया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत 1124 मेगावाट की कोहाला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया है, जिस पर चीन की थ्री गॉर्जेज कॉरपोरेशन, पीओके के अधिकारी और पीपीआईबी ने हस्ताक्षर किए हैं। झेलम नदी पर बनने वाली इस परियोजना पर करीब 2.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा।
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर और लद्दाख के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरने वाले 3000 किलोमीटर लंबे सीपीईसी का निर्माण चीन और पाकिस्तान मिलकर कर रहे हैं। इसके तहत चीन के शिनजियांग राज्य को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क के जरिये जोड़ा जाना है। भारत लगातार इसे अपनी संप्रभुता का हनन बताते हुए इस पर आपत्ति जता रहा है।
दो महीने में दूसरी परियोजना
बता दें कि विवादित क्षेत्र में यह एक महीने के अंदर दूसरी बड़ी परियोजना है, जिसका निर्माण पाकिस्तान और चीन मिलकर करेंगे। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में 442 अरब डॉलर की लागत से एक बांध बनाने की परियोजना पर चीन की सरकारी कंपनी और पाकिस्तानी सेना की कॉमर्शियल शाखा ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने अपनी जमीन पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे की बात दोहराते हुए इस परियोजना पर आपत्ति जताई थी।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कोहाला जलविद्युत परियोजना का ब्योरा सोमवार को पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री उमर अयूब की अध्यक्षता वाली प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की 127वीं बैठक के दौरान पेश किया गया। बैठक में बताया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत 1124 मेगावाट की कोहाला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया है, जिस पर चीन की थ्री गॉर्जेज कॉरपोरेशन, पीओके के अधिकारी और पीपीआईबी ने हस्ताक्षर किए हैं। झेलम नदी पर बनने वाली इस परियोजना पर करीब 2.4 अरब डॉलर का खर्च आएगा।
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर और लद्दाख के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरने वाले 3000 किलोमीटर लंबे सीपीईसी का निर्माण चीन और पाकिस्तान मिलकर कर रहे हैं। इसके तहत चीन के शिनजियांग राज्य को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क के जरिये जोड़ा जाना है। भारत लगातार इसे अपनी संप्रभुता का हनन बताते हुए इस पर आपत्ति जता रहा है।
दो महीने में दूसरी परियोजना
बता दें कि विवादित क्षेत्र में यह एक महीने के अंदर दूसरी बड़ी परियोजना है, जिसका निर्माण पाकिस्तान और चीन मिलकर करेंगे। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में 442 अरब डॉलर की लागत से एक बांध बनाने की परियोजना पर चीन की सरकारी कंपनी और पाकिस्तानी सेना की कॉमर्शियल शाखा ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने अपनी जमीन पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे की बात दोहराते हुए इस परियोजना पर आपत्ति जताई थी।
Comments
Post a Comment