लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...

भगवान बुद्ध, जिन्हें हम गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं, उनकी मृत्यु ईस्वी पूर्व 483 में हुई थी। इस बात को हजारों साल बीत चुके हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीलंका में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां आज भी भगवान बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है। कहते हैं कि यह दांत आज भी बढ़ रहा है। यह मंदिर श्रीलंका के कैंडी शहर में है।
इस मंदिर को 'दांत मंदिर' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर उस कैंडी शहर में है, जो कभी श्रीलंका की राजधानी हुआ करता था। श्रीलंका के राजा यहां रहते थे। जब राजशाही का अंत हुआ, तब कैंडी में औपनिवेशिक आवाजाही बढ़ी। कैंडी का धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि यहां अनेक महत्वपूर्ण बौद्ध मंदिर हैं।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के देह त्यागने के बाद उनका अंतिम संस्कार उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में हुआ था, लेकिन उनके एक अनुयायी ने उनकी चिता पर से उनके दांत निकाल लिए और राजा ब्रह्मदत्त को दे दिया। कई वर्षों तक भगवान बुद्ध का वो दांत राजा ब्रह्मदत्त के पास रहा।
कहते हैं कि भगवान बुद्ध के दांत के लिए कई लड़ाईयां लड़ी गईं। वो दांत कई राजाओं के पास गया और आया। आखिर में भगवान बुद्ध के ही एक अनुयायी ने चोरी-छुपे उस दांत को श्रीलंका पहुंचा दिया। प्राचीन समय में कैंडी के एक राजा ने अपने महल के पास ही भगवान बुद्ध के दांत के लिए एक विशाल भव्य मंदिर बनवाया और तब से वह दांत उसी भव्य मंदिर में रखा हुआ है।
हालांकि वर्ष 1603 में जब पुर्तगालियों ने श्रीलंका पर हमला किया, तो भगवान बुद्ध के उस दांत को रक्षा के लिए दुम्बारा ले जाया गया, लेकिन बाद में फिर उसे कैंडी लाया गया। यह दांत एक छोटी सी डिबिया में रखा हुआ है। मंदिर में जाने वाले लोग उस दांत के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि डिबिया खोलकर किसी को भी वो दांत नहीं दिखाया जाता है।
हर बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र दांत को सुगंधित फूल मानुमुरा मंगलया से बने सुगंधित पानी से प्रतीकात्मक तौर पर स्नान कराया जाता है। इसके बाद इस पवित्र जल को श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस जल को चंगाई की शक्तियों से युक्त माना जाता है।
साल 2017 में जब प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका गए थे, तो उन्होंने भी इस दंत अवशेष मंदिर और भगवान बुद्ध के पवित्र दांत के दर्शन किए थे। इस दौरान उनके साथ श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पुष्पांजलि भी अर्पित की थी।
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