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उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा को नई उड़ान : UPPCPIWA ने 15 प्रतिष्ठित फार्मेसी अवार्ड्स की स्थापना की

लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...

शिवसेना-एनसीपी के बीच एल्गार परिषद की जांच को लेकर तकरार जारी, देशद्रोह पर नहीं झुकेंगे- उद्धव ठाकरे


महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार के दो बड़े घटक दल शिवसेना-एनसीपी के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। यह तकरार एल्गार परिषद और भीमा-कोरेगांव की हिंसा की जांच को लेकर है। एक ओर शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एल्गार परिषद की जांच एनआईए को सौंपने की मंजूरी देकर देशद्रोह और सामान्य हिंसा के मामले के बीच एक लकीर खींची है, तो वहीं दूसरी तरफ शरद पवार इस बात पर अडिग हैं कि इसकी जांच एसआईटी से भी समानांतर रूप से करवाई जाए।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने एल्गार परिषद की जांच एनआईए से करवाने के उद्धव के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। एनसीपी के ज्यादातर नेता पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा की जा रही एसआईटी जांच की मांग से सहमत हैं और इस बात पर नाराज हैं कि मुख्यमंत्री ने एनआईए जांच को मंजूरी क्यों दी। हालांकि शरद पवार ने एनआईए ऐक्ट की धारा 10 का हवाला देते हुए यह मांग की है कि एनआईए जांच के अलावा राज्य सरकार एल्गार परिषद केस की समानांतर जांच कराए


उद्धव ने खींची लकीर, देशद्रोह पर दिखाएंगे सख्ती
दरअसल एल्गार परिषद की जांच एनआईए को सौंपने और भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच एसआईटी से कराने के उद्धव के फैसले के पीछे एक गहरी रणनीति साफ तौर पर दिखाई देती है। उद्धव देशद्रोह और सामान्य हिंसा के बीच एक लकीर खींचने की कोशिश कर रहे हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी पार्टी देशद्रोह के मुद्दे पर नहीं झुकेगी। उद्धव ने एल्गार परिषद और भीमा-कोरेगांव को अलग-अलग मामला बताते हुए साफ किया है कि एल्गार परिषद का केस देशद्रोह की साजिशों से संबंधित है इसलिए सरकार को इसे एनआईए को सौंपने में कोई ऐतराज नहीं है।


समानांतर एसआईटी जांच पर क्यों जोर दे रहे पवार?
उद्धव ठाकरे के एनआईए जांच के फैसले के बावजूद एनसीपी चीफ शरद पवार ने एसआईटी गठन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से समन्वय की जिम्मेदारी अपने नेता गृह मंत्री अनिल देशमुख को सौंपी है। देशमुख का काम इस बारे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सलाह-मशविरा कर जल्द ही एसआईटी गठन की घोषणा करना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार के विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने के पीछे शरद पवार की मांग का एक आधार यह भी है कि पवार चाहते हैं कि जब राज्य सरकार की एसआईटी समानांतर जांच करेगी, तो केंद्र सरकार की एजेंसी एनआईए पर निष्पक्ष जांच का दबाव रहेगा।


बता दें कि पिछले हफ्ते उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने एल्गार परिषद मामले की जांच एनआईए को सौंपने को अपनी मंजूरी दे दी थी। एनसीपी ने इस कदम की आलोचना की थी। पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने मामले की जांच केन्द्रीय एजेंसी को दिए जाने के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के फैसले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

क्या है एल्गार परिषद मामला?
31 दिसंबर, 2017 को एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। पुणे पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद खुलासा किया था कि इस बैठक का आयोजन सीपीआई (माओवादी) के फंड से किया गया, जो सरकार को हटाने की साजिश का एक हिस्सा था। पुलिस ने दावा किया कि यहां दिए गए भड़काऊ बयानों ने 1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव की जातिवादी हिंसा में भूमिका निभाई। 6 जून, 2018 के बाद से पुलिस ने 9 ऐक्टिविस्ट्स- सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, पी वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वर्नन गोन्साल्वेज को सीपीआई (माओवादी) से कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया था


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