लखनऊ ,उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक साथ कांग्रेस की सदस्यता ले ली। लखनऊ में हुए जॉइनिंग कार्यक्रम में लोकेश कुमार श्रीवास्तव, पीयूष सोमानी और वेद प्रकाश के नेतृत्व में लोजपा (रामविलास) के दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाकर स्वागत किया। बताया जा रहा है कि चिराग पासवान ने कुछ महीने पहले ही ऐलान किया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके बाद से पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने में लगी थी। यूपी में वैसे भी लोजपा का संगठन ज्यादा मजबूत नहीं माना जाता, ऐसे में चुनाव से पहले ही कार्यकर्ताओं का पाला बदलना पार्टी की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है। *दलित वोट बैंक पर सबकी नजर* यूपी की राजनीति में दलित वोट बैंक की भूमिका बेहद अहम है। इसी वोट बैंक को साधने के...
पूर्व मंत्री चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली छात्रा के खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। समाज में बदनाम करने की धमकी देकर 5 करोड़ रुपये मांगने के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने आरोपी छात्रा के जमानतदारों को भी नोटिस भेजा है। अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।
इसके पहले कोर्ट में आरोपी संजय सिंह, डीपी सिंह, विक्रम सिंह और सचिन हाजिर हुए, जबकि अजित सिंह की हाजिरी माफी की अर्जी दी गई। आरोपी छात्रा न तो हाजिर हुई और न ही उसकी तरफ से हाजिरी माफ करने की अर्जी ही दी गई। इस पर कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट और जमानतदारों के खिलाफ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि कोर्ट ने 6 नवंबर 2019 को मामले का संज्ञान लिया था लेकिन आरोपियों के हाजिर न होने से अभी तक उन पर आरोप तय नहीं किए जा सके हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि ऐसे मामलों का निस्तारण तेजी से किया जाए।
चिन्मयानंद के मुमुक्षु आश्रम का विधिक कार्य करने वाले ओम सिंह ने 25 अगस्त 2019 को शाहजहांपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि मोबाइल पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की। साथ ही धमकी दी कि यदि रुपये नहीं देने वीडियो वायरल कर समाज में बदनाम कर देगा। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हाइकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित कर दी है।
इसके पहले कोर्ट में आरोपी संजय सिंह, डीपी सिंह, विक्रम सिंह और सचिन हाजिर हुए, जबकि अजित सिंह की हाजिरी माफी की अर्जी दी गई। आरोपी छात्रा न तो हाजिर हुई और न ही उसकी तरफ से हाजिरी माफ करने की अर्जी ही दी गई। इस पर कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट और जमानतदारों के खिलाफ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि कोर्ट ने 6 नवंबर 2019 को मामले का संज्ञान लिया था लेकिन आरोपियों के हाजिर न होने से अभी तक उन पर आरोप तय नहीं किए जा सके हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि ऐसे मामलों का निस्तारण तेजी से किया जाए।
चिन्मयानंद के मुमुक्षु आश्रम का विधिक कार्य करने वाले ओम सिंह ने 25 अगस्त 2019 को शाहजहांपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि मोबाइल पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की। साथ ही धमकी दी कि यदि रुपये नहीं देने वीडियो वायरल कर समाज में बदनाम कर देगा। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हाइकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित कर दी है।
पूर्व मंत्री चिन्मयानंद कोर्ट में पेश आरोपमुक्त करने की अर्जी देने के लिए मांगा समय
चिन्मयानंद बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में हाजिर हुए और आरोपों से मुक्त करने की अर्जी देने के लिए 15 दिन का समय देने की मांग की। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने सुनवाई की अगली तारीख तय करते हुए कहा कि आरोपी 4 मार्च को या उससे पहले अर्जी दे सकता है। इसके बाद उन्मोचन अर्जी देने का अवसर नहीं दिया जाएगा और आरोप तय किए जाएंगे।
27 अगस्त 2019 को एलएलएम छात्रा के पिता ने शाहजहांपुर कोतवाली में चिन्मयानंद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में चिन्मयानंद को जेल भेजा गया था। हाइकोर्ट ने चिन्मयानंद को 3 फरवरी को जमानत देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित कर दी थी।
27 अगस्त 2019 को एलएलएम छात्रा के पिता ने शाहजहांपुर कोतवाली में चिन्मयानंद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में चिन्मयानंद को जेल भेजा गया था। हाइकोर्ट ने चिन्मयानंद को 3 फरवरी को जमानत देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित कर दी थी।
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