Skip to main content

लखनऊ में विश्व आदिवासी दिवस पर अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ का विशाल समारोह, सरकार से मांगे पूरी करने की मांग

  लखनऊ। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से गोंड समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और अपनी संस्कृति, परंपरा के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया। समारोह के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार के नाम एक स्मारक पत्र तैयार कर उसे शासन को प्रेषित करने की घोषणा की। इस पत्र में गोंड जाति एवं उसकी उपजातियों धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का उल्लेख किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 17 जिलों में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि शेष जिलों में उन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है। इससे जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि इस विसंगति को दूर कर पूरे उत्तर प्रदेश में गोंड एवं उसकी उपजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए। साथ ही जिनके पास पहले से प्रमाण पत्र हैं उन्हें उसी आधार पर और शे...

एक ही छत के नीचे हो - अब सब धर्मों की प्रार्थना’


(1) धर्मों के बीच में बढती हुई दूरियों का कारण मानव का धर्म के प्रति अज्ञानता है!


आज धर्म के नाम पर बढ़ती हुई दूरियाँ सिर्फ अज्ञानता के कारण है। विश्व के अनेक देशों में आज अज्ञानतावश विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोगों के बीच टकराव बढ़ते ही जा रहें हैं। जबकि सभी धर्मों का उद्देश्य सम्पूर्ण मानव जाति के हृदय में प्रेम व एकता की भावना को बढ़ाकर सारी पृथ्वी पर आध्यात्मिक सभ्यता की स्थापना करना है। वास्तव में सभी धर्मो का स्रोत एक ही परमपिता परमात्मा है और हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हंै और जब हम सभी एक ही परमात्मा की संतानें हैं, तो हमारे धर्म अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? लैटिन भाषा में धर्म यानि रिलीजन के मायने जोड़ना होता है अर्थात जो जोड़े वह धर्म है तथा जो तोड़े वह अधर्म है। 


(2) तुलसीदास जी ने रामायण में लिखा है! 


रामायण में तुलसीदास जी ने लिखा है कि जब जब होई धर्म की हानि-बाढ़हि असुर, अधम अभिमानी। तब तब प्रभु धरि विविध शरीरा - हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा।। अर्थात जब-जब धर्म की हानि होती है और संसार में असुर, अधर्म एवं अन्यायी प्रवृत्तियों के लोगों की संख्या सज्जनों की तुलना में बढ़ जाने के कारण धरती का संतुलन बिगड़ जाता है, तब-तब परम पिता परमात्मा कृपा करके धरती पर अपने संदेश वाहकों (अवतारों) कृष्ण, बुद्ध, अब्राहीम, मुसा, महावीर, जरस्थु, ईसा, मोहम्मद, नानक, बहाउल्लाह आदि को मानवता का मार्गदर्शन कर समाज को सुव्यवस्थित करने के लिए युग-युग में विविध रूपों में भेजते रहे हैं।


(3) सभी संदेश वाहकों (अवतारों) को दिव्य ज्ञान एक ही परमात्मा से प्राप्त हुआ है!


युग-युग में आये इन सभी अवतारों को दिव्य ज्ञान एक ही परमपिता परमात्मा से प्राप्त हुआ है। उदाहरण के लिए परमपिता परमात्मा ने 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण की आत्मा में गीता के माध्यम से न्यायका दिव्य ज्ञान भेजा। पुनः 2500 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने भगवान बुद्ध की आत्मा में त्रिपटक के माध्यम से सम्यक ज्ञानव समता का दिव्य ज्ञान भेजा। 2000 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने कठोर मानव जीवन को करूणामय जीवन बनाने के लिए प्रभु ईसा मसीह की आत्मा में बाइबिल का ज्ञान भेजा। 1400 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने हज़रत मोहम्मद की आत्मा में कुरान के माध्यम से भाईचारेका दिव्य ज्ञान भेजा। 400 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने स्वार्थपूर्ण मानव जीवन को त्याग (सच्चा सौदा) का पाठ पढ़ाने के लिए गुरू नानक देव जी की आत्मा में गुरूग्रंथ साहिब के माध्यम से त्यागका दिव्य ज्ञान भेजा तथा लगभग 200 वर्ष पूर्व उसी परमात्मा ने मानव जीवन में बढ़ती हुई दूरियों को समाप्त कर एकता का पाठ मानव जाति को पढ़ाने के लिए बहाउल्लाह की आत्मा में किताबे अकदस का ज्ञान भेजा।


(5) परमात्मा का धर्म और प्राणी का धर्म एक ही होता है!


गीता में जब भगवान श्रीकृष्ण से उनके शिष्य अर्जुन ने पूछा कि भगवान! आपका धर्म क्या है? भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिष्य अर्जुन को बताया कि मैं सारी सृष्टि का सृजनहार हूँ। इसलिए मैं सारी सृष्टि के प्राणियों से बिना किसी भेदभाव के प्रेम करता हूँ। इस प्रकार मेरा धर्म अर्थात कर्तव्य सारी सृष्टि के प्राणी मात्र से प्रेम करना है। इसके बाद अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि भगवन् मेरा धर्म क्या है? भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम मेरी आत्मा के पुत्र हो। इसलिए जो मेरा धर्म अर्थात कर्तव्य है वही तुम्हारा भी धर्म अर्थात कर्तव्य है। अतः सारी मानव जाति की भलाई करना ही तुम्हारा भी धर्म अर्थात् कर्तव्य है। भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इस प्रकार तेरा और मेरा दोनों का धर्म एक ही है। 



(6) धर्म शाश्वत एवं अपरिवर्तनीय है!


परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये किसी भी महान अवतार ने कोई अलग धर्म नहीं दिया है। जिस प्रकार से परमपिता परमात्मा शाश्वत और अपरिवतर्नीय है उसी प्रकार से उसका धर्म भी शाश्वत और अपरिवतर्नीय है। परमपिता परमात्मा का जो धर्म है, वही धर्म उसकी सभी संतानों का भी है। मनुष्य का सदैव से एक ही धर्म (कर्तव्य) रहा है - प्रभु इच्छाओं को जानना तथा उन पर चलना। पवित्र पुस्तकों गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान, गुरू ग्रन्थ साहिब, किताबे अकदस आदि में एक ही परमपिता परमात्मा के द्वारा भेजी गई न्याय, समता, करूणा, भाईचारा, त्याग एवं हृदयों की एकता की शिक्षाओं को जानना तथा उसके अनुसार संसार में रहकर पवित्र भावना से प्रभु की इच्छाओं और आज्ञाओं के अनुसार कार्य करना ही हर प्राणी का धर्म है। इस प्रकार प्रभु की इच्छाओं को जानकर तथा उनके अनुसार कार्य करने के अलावा किसी भी प्राणी का और कोई भी दूसरा धर्म नहीं है।


(6) प्रार्थना कहीं भी करें सुनने वाला ईश्वर एक ही है!


आत्म पुत्र होने के कारण हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं। उस परमपिता परमात्मा की प्रार्थना हम मंदिर में करें, मस्जिद में करें, गिरजाघर में करें या गुरूद्वारे में करें, और चाहे किसी भी भाषा में करें, हमारी प्रार्थनाओं को सुनने वाला ईश्वर एक ही है। अलग-अलग स्थानों, भाषाओं, वेश-भूषाओं में परमपिता परमात्मा को याद करने से धरती पर यह अज्ञान फैल गया है कि धर्म एक नहीं अनेक हैं। परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करने के लिए किसी विशेष प्रकार की वेश-भूषा, भाषा, जाति-धर्म, स्थान आदि से कोई लेना-देना नहीं है।  


(7) ‘एक ही छत के नीचे हो-अब सब धर्मों की प्रार्थनाः-


अज्ञानता के कारण आज एक ही परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये संदेश वाहकों (अवतारों) को अलग-अलग मानने के कारण ही धर्म के नाम पर चारों ओर जमकर दूरियां बढ़ रही है, जबकि सभी अवतार एक ही परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये हैं। इस प्रकार हम सब एक ही परमात्मा की संतानें हैं। इसलिए स्कूलों में बच्चों एवं टीचर्स के द्वारा की जाने वाली सामूहिक प्रार्थना की तरह ही अब समय आ गया है जबकि समाज में सभी धर्मों, जातियों एवं सम्प्रदायों के लोग एक ही जगह पर इकट्ठे होकर सामूहिक रूप से एक ही परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करें और यही प्रभु-प्रार्थना करने का सबसे सही तरीका भी है। 


Comments

POPULAR POSTS

निजी ITI संस्थानों ने उठाई 6 सूत्रीय मांग, 15 मई को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी

यूपी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में निजी आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष 6 प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 15 मई, शुक्रवार सुबह 10 बजे प्रदेश भर के प्रशिक्षक, प्रबंधक और छात्र निदेशालय पर एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे। प्रतिनिधियों ने कहा कि कौशल विकास में निजी ITI की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन मौजूदा नीतियों से संस्थानों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति प्रभावित हो रही है। *प्रमुख मांगें:* 1. *फीस वृद्धि तत्काल लागू हो:* हरियाणा मॉडल के अनुरूप इसी सत्र से फीस बढ़ाई जाए। बढ़ती संचालन लागत, वेतन और रखरखाव के कारण पुरानी फीस पर संचालन कठिन है। 2. *निम्स पोर्टल पर नोडल वेरिफिकेशन खत्म हो:* पैन, आधार, OTP आधारित e-KYC के बाद अतिरिक्त नोडल वेरिफिकेशन अनावश्यक और शोषणकारी है। 3. *थर्ड शिफ्ट बहाल हो:* दिन में नौकरी करने वाले हजारों छात्रों को शाम की शिफ्ट न होने से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा। 4. *PMKVY 5.0 में भागीदारी मिले:* निजी संस्थानों के पास संसाधन और अनुभवी स्टाफ होने के बावजूद योजनाओं में भागी...

एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने प्रदेश स्तरीय बैठक कर बनाई रणनीति

लखनऊ, उ०प्र० राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (रजि०) की समस्याओं के सम्बन्ध में प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अतिथि के रूप में भारतीय मजदूर संघ से विभाग प्रमुख (पूर्ण कालिक संगठन मंत्री) अश्वनी शुक्ला जी, उ०प्र० राज्य कर्मचारी एशोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष व भारतीय मजदूर संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष लखनऊ हरिशरण मिश्रा जी एवं उनके प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार दीक्षित जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एनएचएम संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठा० मयंक प्रताप सिंह ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया, इस बैठक में प्रदेश के समस्त जनपदों एवं मण्डलों से आये पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। प्रदेश अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत कार्यस्त संविदा कर्मचारियों की गम्भीर समस्याओं का प्रकाश डालते हुये आगामी समय में कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नियमितीकरण/समान कार्य समान वेतन, वेतन बढ़ोत्तरी, जॉब सुरक्षा एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा अथवा स्वास्थ्य बीमा शामिल हैं एवं इसके साथ ही कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में आ रही समस्याओं क...

लखनऊ में विश्व आदिवासी दिवस पर अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ का विशाल समारोह, सरकार से मांगे पूरी करने की मांग

  लखनऊ। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से गोंड समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और अपनी संस्कृति, परंपरा के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया। समारोह के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार के नाम एक स्मारक पत्र तैयार कर उसे शासन को प्रेषित करने की घोषणा की। इस पत्र में गोंड जाति एवं उसकी उपजातियों धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राजगोंड से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का उल्लेख किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 17 जिलों में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि शेष जिलों में उन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है। इससे जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने मांग की कि इस विसंगति को दूर कर पूरे उत्तर प्रदेश में गोंड एवं उसकी उपजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए। साथ ही जिनके पास पहले से प्रमाण पत्र हैं उन्हें उसी आधार पर और शे...

अस्पतालों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करो, डॉ. अलगावेंकटेशन पर हमले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो

  हम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राजस्थान स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. वी.एन. मदुरै के अलगावेंकटेशन पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हम राजस्थान स्टेट गवर्नमेंट से रिक्वेस्ट करते हैं कि डॉक्टरों पर ऐसे हमलों को रोकने के लिए एंटी-सोशल एलिमेंट्स के खिलाफ सही एक्शन लिया जाए। ऐसे में सभी डॉक्टरों को एक साथ खड़ा होना चाहिए और अपने हक और लीगल प्रोटेक्शन के लिए मिलकर लड़ना चाहिए।तमिलनाडु की तरह राजस्थान में भी डॉक्टर्स एंड हॉस्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट (TN HPA 48/2008) बनाया जाना चाहिए। साथ ही, इस हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान की जानी चाहिए और कानून के मुताबिक उनके खिलाफ सही कार्रवाई की जानी चाहिए। सभी अस्पतालों में सुरक्षा पक्की की जानी चाहिए। साथ ही, अस्पतालों को सुरक्षित इलाका घोषित किया जाना चाहिए। सभी अस्पतालों में CCTV कैमरे लगाए जाने चाहिए और उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। सीनियर पुलिस अधिकारियों को यह पक्का करना चाहिए कि पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ियां अस्पताल के इलाकों में अक्सर पेट्रोलिंग करें।

स्वर्ण व्यवसायी को गोली मारकर लूट, सर्राफा व्यापारियों में दहशत; पुलिस पर असंवेदनशीलता का आरोप

गोंडा: जनपद के बभनान बाजार, थाना छपिया क्षेत्र में 19 अप्रैल 2026 को स्वर्ण व्यवसायी समर कसौधन को गोली मारकर आभूषण लूट की घटना से सर्राफा कारोबारियों में भय का माहौल है। घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर व्यापारियों में भारी असंतोष है। व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन, लगाए ये आरोप सर्राफा एवं स्वर्ण व्यवसायियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि पीड़ित समर कसौधन ने खुद बयान दिया है, जिसका वीडियो भी मौजूद है। इसके बावजूद पुलिस ने उनके भाई की तहरीर पर केस दर्ज किया, जो दबाव में लिखी लगती है। व्यापारियों ने मांग की कि मामले को छिनैती के बजाय लूट व हत्या के प्रयास की धाराओं में दर्ज किया जाए। ये हैं प्रमुख मांगें 1. पीड़ित के बयान के आधार पर लूट व हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज हो। 2. समय सीमा में खुलासा कर अपराधियों की गिरफ्तारी और 100% बरामदगी हो। 3. स्वर्ण व्यवसायी क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाए। 4. आत्मरक्षा के लिए स्वर्ण व्यापारियों को प्राथमिकता पर शस्त्र लाइसेंस दिए जाएं। व्यापारियों का कहना है कि घटना के बाद से माल के आवागमन में असुरक्षा महसूस हो रही है और व्य...