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उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा को नई उड़ान : UPPCPIWA ने 15 प्रतिष्ठित फार्मेसी अवार्ड्स की स्थापना की

लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...

CAA पर PM मोदी के अडिग रहने के ऐलान के बीच विरोध में खड़ा हुआ छठा राज्य


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को यूपी के चन्दौली से ऐलान किया कि नागरिकता संशोधन कानून पर उनकी सरकार कायम रहेगी तो दूसरी तरफ तेलंगाना सरकार ने इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करने का निर्णय ले लिया. इस तरह सीएए के खिलाफ देश का छठा राज्य उतर आया.


यानी एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार सीएए (CAA) को नागरिकता लेने नहीं, देने वाला कानून बताकर इस पर अडिग रहने के दावे कर रही है तो दूसरी तरफ एक के बाद राज्य सरकारें विधिवत् रूप से इस कानून की मुखालफत में उतर रहे हैं.


रविवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया. इसके अलावा बैठक के माध्यम से तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार से इस कानून को खत्म करने की अपील की.


ये राज्य पास कर चुके हैं प्रस्ताव


तेलंगाना से पहले मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब और राजस्थान सरकार भी सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास कर चुकी हैं. इस कड़ी में अब छठा नाम तेलंगाना का जुड़ गया है.


सीएए को धार्मिक आधार पर बंटवारा करने वाला कानून बताकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं. बीजेपी के तमाम विरोधी भी इस कानून को बांटने वाला और संविधान की आत्मा के खिलाफ बता रहे हैं.




तेलंगाना कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार से धर्म के आधार पर भेदभाव न करने की अपील की गई. सरकार ने कहा कि सभी धर्म के लोगों के साथ कानून के आधार पर समान व्यवहार करना चाहिए, जबकि मौजूदा कानून में ऐसा नहीं है.


सरकार ने नागरिकता कानून में जो संशोधन किया है उसके तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी. मियाद घटाकर नागरिकता के कानून को भी सरल किया गया है. विरोध इस बात का हो रहा है कि इस कानून में मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया. जबकि सरकार का तर्क है कि जिन देशों के लोगों को नागरिकता इस कानून के तहत दी जानी है, वहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं और पीड़ित नहीं हैं. जबकि यह कानून धार्मिक रूप से पीड़ितों के लिए है.


 


पूरा विवाद इसी बात पर है. दिल्ली के शाहीन बाग में दो महीने से महिलाएं धरने पर हैं और देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. जनता के साथ सरकार भी सीएए के खिलाफ हैं और तेलंगाना के रूप में छठा राज्य आधिकारिक तौर पर इसके विरोध में उतर आया है.




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