लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
नए साल में रेलवे ने आम से लेकर के खास यात्रियों को महंगाई का झटका दे दिया है। इस फैसले से एक जनवरी से रेलवे का किराया प्रति किलोमीटर एक पैसे से चार पैसे बढ़ जाएगा। हालांकि रेलवे ने उपनगरीय रेलवे में किसी तरह के किराये में बढ़ोतरी नहीं की है।
एक पैसे किराये की वृद्धि साधारण श्रेणी, गैर वातानुकूलित श्रेणी और गैर उपनगरीय श्रेणी में की गई है। वहीं मेल/एक्सप्रेस गैर वातानुकूलित ट्रेनों के भाड़े में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि, वातानुकूलित श्रेणी के किराए में चार पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि, भाड़े में वृद्धि शताब्दी, राजधानी ट्रेनों पर भी लागू होगी।
1000 किमी के सफर पर इतना बढ़ेगा किराया
अगर आप 1000 किमी का सफर कर रहे हैं, तो साधारण श्रेणी में 10 रुपये, मेल/एक्सप्रेस की गैर वातानुकूलित श्रेणी में 20 रुपये और सभी ट्रेनों की वातानुकूलित श्रेणी में 40 रुपये अतिरिक्त किराया चुकाना होगा। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट को बुक करा रखा है, उनसे सफर के दौरान बढ़ा हुआ किराया वसूला जाएगा। यह किराया ट्रेन में चल रहे टीटीई वसूलेंगे।
रेलवे सूत्रों ने कहा कि संसदीय समितियों की सिफारिशों और परिचालन अनुपात पर बढ़ते दबाव के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय से इसके लिए हरी झंडी भी मिल गई है।
रेलवे द्वारा किराया बढ़ाए जाने के बाद उसकी आय में प्रति वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से लेकर पांच हजार करोड़ रुपये तक का इजाफा होगा। इतना ही नहीं, इससे रेलवे का परिचालन अनुपात भी सुधरेगा।
पिछले कुछ सालों से भारतीय रेलवे ने सीधे तौर पर यात्री किराया में बढ़ोतरी नहीं की है। रेलवे घाटे में है और आर्थिक स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। रिफंड नियमों में बदलाव का भी खास फायदा नहीं हुआ है। इसलिए परिचालन अनुपात को संतुलित रखने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी है। बता दें कि डीजल व बिजली जैसे जरूरी खर्च बढ़ने से रेलवे का परिचालन अनुपात 98.4 फीसदी से ज्यादा हो गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
रेलवे सूत्रों ने कहा कि संसदीय समितियों की सिफारिशों और परिचालन अनुपात पर बढ़ते दबाव के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय से इसके लिए हरी झंडी भी मिल गई है।
इतनी बढ़ेगी रेलवे की आय
रेलवे द्वारा किराया बढ़ाए जाने के बाद उसकी आय में प्रति वर्ष चार हजार करोड़ रुपये से लेकर पांच हजार करोड़ रुपये तक का इजाफा होगा। इतना ही नहीं, इससे रेलवे का परिचालन अनुपात भी सुधरेगा।
इसलिए बढ़ाया जा रहा है किराया
पिछले कुछ सालों से भारतीय रेलवे ने सीधे तौर पर यात्री किराया में बढ़ोतरी नहीं की है। रेलवे घाटे में है और आर्थिक स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। रिफंड नियमों में बदलाव का भी खास फायदा नहीं हुआ है। इसलिए परिचालन अनुपात को संतुलित रखने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी है। बता दें कि डीजल व बिजली जैसे जरूरी खर्च बढ़ने से रेलवे का परिचालन अनुपात 98.4 फीसदी से ज्यादा हो गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
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