लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
NEET UG 2026 को 12 मई को रद्द कर दिया गया और यह खबर 22.79 लाख मेडिकल एस्पिरेंट्स के लिए किसी झटके से कम नहीं थी। राजस्थान में पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने खुद माना कि परीक्षा की सत्यता से समझौता हुआ है, इसलिए CBI जांच के साथ दोबारा एग्जाम कराने का फैसला लिया गया। इस फैसले के बाद डॉ. अलगावेंकटेशन जैसे कई लोगों का सवाल उठना लाज़मी है कि जब गड़बड़ी कुछ ही जगहों पर हुई तो सज़ा पूरे देश के बच्चों को क्यों मिल रही है। जिन छात्रों ने ईमानदारी से तैयारी की, उन पर मानसिक दबाव, आर्थिक बोझ और एक साल बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है। इसलिए अब ज़रूरी है कि CBI जांच का रोज़ का स्टेटस पब्लिक डोमेन में खुलकर साझा किया जाए ताकि अफवाहों की जगह सच्चाई ले। साथ ही NEET UG 2025 में इंदौर में बिजली कटौती और बायोमेट्रिक फेल्योर जैसी घटनाओं की जांच रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई है, उसे भी तुरंत पब्लिक करना चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि NTA की कमान अब प्रोग्रेसिव सोच वाले, तकनीकी समझ रखने वाले और बेदाग छवि के अधिकारियों को सौंपी जाए, क्योंकि पुराने ढर्रे से भरोसा नहीं लौटेगा। और अंत में, इस पूरे कांड में शामिल हर गुनहगार, चाहे वह कोचिंग माफिया हो या सिस्टम का अंदरूनी आदमी, उसे ऐसी कड़ी सज़ा मिले जो आगे के लिए मिसाल बने। सिर्फ री-एग्जाम की तारीख घोषित कर देने से छात्रों का टूटा भरोसा वापस नहीं आएगा।
Comments
Post a Comment