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लखनऊ प्रेस क्लब में साहित्य का संगम - पेशवा वंशज ने किया 'संक्रान्ति का संहार' और 'काल यात्रा' का लोकार्पण

  लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ।         उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे‌ हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...

फिक्की फ्लो ने किया दिव्या दत्ता की "मी एंड माँ "के हिंदी बुक लॉन्च का आयोजन

  


फ्लो लखनऊ चैप्टर भारत की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक - दिव्या दत्ता 4 मार्च को अपने सदस्यों के लिए एक विशेष बुक लॉन्च और टॉक शो लाने के लिए आमंत्रित किया।
दिग्गज अभिनेत्री, कई फिल्मफेयर और राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं। उन्हें फिल्म उद्योग में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है, वास्तव मे दिव्या को बहुमुखी प्रतिभा का धनी भी कहा जा सकता है क्योंकि वह एक अभिनेत्री, लेखक और एक कवि के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी हैं। हिंदी और पंजाबी भाषा में 100 से अधिक फीचर फिल्मों में अभिनय करने के बाद, दिव्या ने अपनी पहली कविता 'जब सब ठीक होगा ना' शीर्षक से लेखन की पंक्ति में कदम रखा, जिसे बहुत पहचान मिली।
अभिनेत्री दिव्या दत्ता के लिए, अपनी मां को खोने के कारण ही उन्होंने अपने पहले उपन्यास "मी एंड मा" में अपने विचारों को कलमबद्ध किया।



उन्होंने बताया कि यह किताब मेरी मां के साथ मेरी यात्रा है, उनके साथ यादें, बचपन से मेरे जीवन में उनकी उपस्थिति और जब तक वह मेरे साथ थीं। मेरा मतलब है कि वह हमेशा मेरे साथ है । दिव्या कहती हैं कि मैं एक ऐसी माँ को जानती हूँ जो एक आदर्श माता-पिता थी और एक सबसे अच्छी दोस्त। मैं इस किताब के माध्यम से बताना चाहती थी कि माता-पिता और बच्चे के बीच एक अच्छी साझेदारी कैसे बच्चे को वह बना सकती है जो वह है और मैं इसे दुनिया के साथ साझा करना चाहती थी।
लेखन के साथ अभिनेत्री का जुड़ाव बहुत पुराना है। वो कहती हैं कि मैं कुछ समय के लिए एक स्तंभकार रही हूं और मैंने कॉलेज में लिखना शुरू किया।



"द स्टार्स इन माई स्काई" उनकी दूसरी पुस्तक है
फ्लो लखनऊ चैप्टर की चेयरपर्सन आरुषि टंडन जो दिव्या को अपनी पुस्तक के अनावरण के लिए शहर में लाने के लिए काफी उत्साहित थीं ने कहा कि "महान कला, चाहे वह दृश्य कला, कविता, संगीत, नृत्य, अभिनय या कोई अन्य रचनात्मक कार्य हो, वे सभी हमें प्रेरित करते हैं। हमारे बीच एक बहुमुखी कलाकार का होना सम्मान की बात है जो न केवल एक उत्कृष्ट अभिनेत्री है, बल्कि एक कुशल लेखिका भी है। आज के कार्यक्रम में रेणुका टंडन, माधुरी हलवासिया, ज्योत्सना हबीबुल्ला, पूजा गर्ग, सीमू घई, स्वाति वर्मा सहित फ्लो लखनऊ के 100 से अधिक सदस्य मौजूद थे।

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