लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी सुनील सिंह ने 8 माल एवेन्यू केंद्रीय कार्यालय में वार्ता के दौरान कहा कि किसान आंदोलन में एक ही पार्टी ने संघर्ष किया वह है किसानों की पार्टी लोकदल । श्री सिंह ने आगे कहा है कि किसान आंदोलन की लड़ाई में सपा हो बसपा हो या भाजपा हो किसी ने भी किसानों का साथ नहीं दिया। 700 किसान शहीद हुए 700 किसानों के शहीद होने की लड़ाई भी लोकदल किसानों के महाआंदोलन में कंधे से कंधा मिलाते हुए लड़ता रहा है। जिसको सरकार ने नजर अंदाज किया यह उनके द्वारा दिखाएंगे सत्ता के घमंड को दिखाता है पूरे आंदोलन में सरकारों ने किसान आंदोलन पर एक बार भी प्रतिक्रिया नहीं दी। किसानों को नफरत की भावना से देखने का काम करते रहे सपा और भाजपा दोनों मिले हुए हैं। ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और मिलकर काम कर करते हैं। सपा और भाजपा मिलकर योजनाएं बनाते हैं और एक दूसरे के प्रति जानबूझकर भड़काऊ भाषण देते हैं, ताकि उन्माद फैले. भाजपा की सरकार से महिलाएं, युवा, बेरोजगार सभी लोग दुखी हैं। भाजपा के द्वारा आयोजित डिजिटल कार्यक्रमों पर भी सवालिया निशान खड़ा किया और कहा कि इनके पास पैसा है और ताकत है इसलिए यह लगातार रोजाना कार्यक्रम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, वर्चुअल रैली डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं और वह लोगों को बुलाकर दूसरी पार्टियों को गालियां बक रहे हैं और वोट मांग रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा है कि लोकदल जनता के दिलों में है। उत्तर प्रदेश के कई राजनैतिक दल अपने वोट बैंक सहेज कर रखने के लिए अंग्रेजों से भी बढ़ कर निकल रहे है। इन दलों ने अब तक न सिर्फ समाज में नफरत का बीज बोया बल्कि मुसलमान से हिंदू और हिंदू से मुसालमान को लड़वा कर अब तक सूबे मे सत्ताधीश बने बैठे है। 20ः वोट के ठेकेदार बने बैठे हैं। उन्होने कहा कि लोकदल का मानना है कि क्या सभी धर्म के लोग एक होकर सिर्फ भारतीय बन कर नहीं रह सकते। जरा सोचिए अगर सभी के बीच मोहब्बत होगी तो वह हिंदुस्तान कितना खूबसूरत होगा। हम तरक्की की सीढ़ीयां चढ़ने लग जाएंगें, नजाने हमारे कितने विवाद खुद बखुद खत्म हो जाएंगें। एकता सब चाहते हैं मगर कोशिशें कुछ लोग ही करते हैं। इस नफरत भरे तूफानी माहौल में मोहब्बत का चिराग जलाने के लिए लोकदल समान विचारधारा में तीसरा विकल्प देकर 2022 विधानसभा में सामाजिक समरसता और सम्भाव स्थापित करने का काम करेगा।
यूपी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में निजी आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष 6 प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 15 मई, शुक्रवार सुबह 10 बजे प्रदेश भर के प्रशिक्षक, प्रबंधक और छात्र निदेशालय पर एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि कौशल विकास में निजी ITI की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन मौजूदा नीतियों से संस्थानों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
*प्रमुख मांगें:*
1. *फीस वृद्धि तत्काल लागू हो:* हरियाणा मॉडल के अनुरूप इसी सत्र से फीस बढ़ाई जाए। बढ़ती संचालन लागत, वेतन और रखरखाव के कारण पुरानी फीस पर संचालन कठिन है।
2. *निम्स पोर्टल पर नोडल वेरिफिकेशन खत्म हो:* पैन, आधार, OTP आधारित e-KYC के बाद अतिरिक्त नोडल वेरिफिकेशन अनावश्यक और शोषणकारी है।
3. *थर्ड शिफ्ट बहाल हो:* दिन में नौकरी करने वाले हजारों छात्रों को शाम की शिफ्ट न होने से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा।
4. *PMKVY 5.0 में भागीदारी मिले:* निजी संस्थानों के पास संसाधन और अनुभवी स्टाफ होने के बावजूद योजनाओं में भागी...
Comments
Post a Comment