_मेदांता अस्पताल की एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑनकोलॉजी एवं हीमैटो ऑनकोलॉजी विभाग की डॉ. अंजली सचान ने कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज पर विस्तार से जानकारी दी।_ _डॉ. अंजली सचान ने बताया कि तंबाकू-शराब का सेवन, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ वायरल इंफेक्शन कैंसर के मुख्य कारण हैं।_ _उन्होंने 7 सबसे आम कैंसर के बारे में भी बताया:_ *_1. फेफड़े का कैंसर* - मुख्य कारण धूम्रपान और प्रदूषण_ *_2. ब्रेस्ट कैंसर* - महिलाओं में सबसे आम, आनुवंशिक और हार्मोनल कारण_ *_3. कोलन कैंसर* - अस्वस्थ खानपान और मोटापे से जुड़ा_ *_4. प्रोस्टेट कैंसर* - 50 साल से ऊपर पुरुषों में आम_ *_5. मुंह का कैंसर* - तंबाकू और गुटखे के सेवन से_ *_6. सर्वाइकल कैंसर* - महिलाओं में, HPV वायरस प्रमुख कारण_ *_7. ब्लड कैंसर* - आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से_ _डॉ. सचान ने कहा कि वजन घटना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, लंबे समय तक खांसी या घाव न भरना जैसे लक्षण दिखें तो ...
संकटग्रस्त लेबनान में सोमवार को प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थन के बाद देश के जर्मनी में राजदूत मुस्तफा अदीब को नया प्रधानमंत्री नामित किया गया। वे लेबनान में एक नई सरकार बनाने के लिए पहल करेंगे। लेबनान के राष्ट्रपति ने मुस्तफा अदीब से 128 सदस्यीय संसद में 90 वोट हासिल करने के बाद नई सरकार बनाने के लिए कहा है। इसके लिए फ्रांस ने अहम भूमिका निभाई। अदीब ने कहा कि उनकी प्राथमिकता लेबनानी और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के भरोसे को फिर से हासिल करने और अहम सुधारों को लागू कर सक्षम सरकार बनाने की होगी। बता दें कि उनकी यह नियुक्ति बेरूत में एक विनाशकारी विस्फोट के हफ्तों बाद उस वक्त हुई है जब देश भीषण आर्थिक संकट में फंस गया है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पिछले 48 घंटों में हुई कोशिशों का नतीजा है। मैक्रों ने लेबनानी नेताओं से किसी एक उम्मीदवार पर सहमत होने का आग्रह किया था। वे इसी हफ्ते लेबनान दौरे पर जाने वाले हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सूत्र ने बताया कि मैक्रों लगातार पिछले दो दिनों से अदीब के संपर्क में थे और उन्होंने ही अदीब को बेरूत में चल रही वार्ता के बारे में जानकारी दी।
सुन्नी मुस्लिम होने के नाते सभी का समर्थन
लेबनान की राजनीतिक और संप्रदाय व्यवस्था के तहत केवल एक सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री का पद संभाल सकता है। रविवार की बैठकों में, अदीब को कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का समर्थन हासिल हुआ, जिसमें साद अल-हरीरी की पार्टी भी शामिल थी, जो कि लेबनान का सबसे बड़ा सुन्नी राजनीतिक दल है।
सुन्नी मुस्लिम होने के नाते सभी का समर्थन
लेबनान की राजनीतिक और संप्रदाय व्यवस्था के तहत केवल एक सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री का पद संभाल सकता है। रविवार की बैठकों में, अदीब को कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का समर्थन हासिल हुआ, जिसमें साद अल-हरीरी की पार्टी भी शामिल थी, जो कि लेबनान का सबसे बड़ा सुन्नी राजनीतिक दल है।
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