लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
संकटग्रस्त लेबनान में सोमवार को प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थन के बाद देश के जर्मनी में राजदूत मुस्तफा अदीब को नया प्रधानमंत्री नामित किया गया। वे लेबनान में एक नई सरकार बनाने के लिए पहल करेंगे। लेबनान के राष्ट्रपति ने मुस्तफा अदीब से 128 सदस्यीय संसद में 90 वोट हासिल करने के बाद नई सरकार बनाने के लिए कहा है। इसके लिए फ्रांस ने अहम भूमिका निभाई। अदीब ने कहा कि उनकी प्राथमिकता लेबनानी और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के भरोसे को फिर से हासिल करने और अहम सुधारों को लागू कर सक्षम सरकार बनाने की होगी। बता दें कि उनकी यह नियुक्ति बेरूत में एक विनाशकारी विस्फोट के हफ्तों बाद उस वक्त हुई है जब देश भीषण आर्थिक संकट में फंस गया है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पिछले 48 घंटों में हुई कोशिशों का नतीजा है। मैक्रों ने लेबनानी नेताओं से किसी एक उम्मीदवार पर सहमत होने का आग्रह किया था। वे इसी हफ्ते लेबनान दौरे पर जाने वाले हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सूत्र ने बताया कि मैक्रों लगातार पिछले दो दिनों से अदीब के संपर्क में थे और उन्होंने ही अदीब को बेरूत में चल रही वार्ता के बारे में जानकारी दी।
सुन्नी मुस्लिम होने के नाते सभी का समर्थन
लेबनान की राजनीतिक और संप्रदाय व्यवस्था के तहत केवल एक सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री का पद संभाल सकता है। रविवार की बैठकों में, अदीब को कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का समर्थन हासिल हुआ, जिसमें साद अल-हरीरी की पार्टी भी शामिल थी, जो कि लेबनान का सबसे बड़ा सुन्नी राजनीतिक दल है।
सुन्नी मुस्लिम होने के नाते सभी का समर्थन
लेबनान की राजनीतिक और संप्रदाय व्यवस्था के तहत केवल एक सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री का पद संभाल सकता है। रविवार की बैठकों में, अदीब को कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का समर्थन हासिल हुआ, जिसमें साद अल-हरीरी की पार्टी भी शामिल थी, जो कि लेबनान का सबसे बड़ा सुन्नी राजनीतिक दल है।
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