बलरामपुर।जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। *पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद -* इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को न...
जानलेवा कोरोना वायरस से बचने के लिए भले ही भारत सरकार लाख जतन कर रही हो, लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा के हालात बेहद भयावह है। अगर इस शहर को भारत का इटली कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि जिस तरह दुनिया में कोविड-19 के मामले बढ़े ठीक उसी तेजी के साथ राजस्थान के भीलवाड़ा में भी कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान में अब तक कोरोना वायरस के 45 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 21 कोरोना पॉजिटिव अकेले भीलवाड़ा जिले से हैं। किलों और महलों के लिए मशहूर भारत की पर्यटक राजधानी माने जाने वाले इस राज्य में कोरोना से पहली मौत भीलवाड़ा में ही हुई थी। 19 मार्च को पहला केस आया था। बांगड़ अस्पताल के डॉक्टर आलोक शर्मा समेत छह लोग एक साथ पॉजिटिव मिले थे, जिसके बाद ही राजस्थान सरकार हरकत में आई थी।
एक ही दिन में दो मौत
भीलवाड़ा में कम्यूनिटी इंफेक्शन फैल चुका है। तीसरा स्टेज चल रहा है। सूबे के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मीडिया के सामने आकर बताना पड़ा कि पूरे जिले की जांच हो चुकी है। करीब 28 लाख जनसंख्या वाले भीलवाड़ा जिले को सरकार पहले ही अतिसंवेदनशील बता चुकी है। समाचार लिखे जाने तक राजस्थान में 45 कोरोना पॉजिटिव पाए गए है, जिनमें 19 तो भीलवाड़ा में ही हैं। 26 मार्च को यहां कोरोना संक्रमण और किडनी में तकलीफ समेत कई बीमारियों का इलाज करा रहे 73 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो जाती है। शाम तक उनके बेटे और पोती की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। रात में एक अन्य शख्स की मौत हो गई। लोगों में दहशत का माहौल है। जान बचाने के लिए रहवासी दूसरे जिलों में जा रहे हैं, यही कारण है कि वहां कम्यूनिटी इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है। 11 हजार लोग संदिग्ध हैं, जिनमें से 6445 को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
जानलेवा कोरोना वायरस से बचने के लिए भले ही भारत सरकार लाख जतन कर रही हो, लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा के हालात बेहद भयावह है। अगर इस शहर को भारत का इटली कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि जिस तरह दुनिया में कोविड-19 के मामले बढ़े ठीक उसी तेजी के साथ राजस्थान के भीलवाड़ा में भी कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान में अब तक कोरोना वायरस के 45 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 21 कोरोना पॉजिटिव अकेले भीलवाड़ा जिले से हैं। किलों और महलों के लिए मशहूर भारत की पर्यटक राजधानी माने जाने वाले इस राज्य में कोरोना से पहली मौत भीलवाड़ा में ही हुई थी। 19 मार्च को पहला केस आया था। बांगड़ अस्पताल के डॉक्टर आलोक शर्मा समेत छह लोग एक साथ पॉजिटिव मिले थे, जिसके बाद ही राजस्थान सरकार हरकत में आई थी।
एक ही दिन में दो मौत
भीलवाड़ा में कम्यूनिटी इंफेक्शन फैल चुका है। तीसरा स्टेज चल रहा है। सूबे के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मीडिया के सामने आकर बताना पड़ा कि पूरे जिले की जांच हो चुकी है। करीब 28 लाख जनसंख्या वाले भीलवाड़ा जिले को सरकार पहले ही अतिसंवेदनशील बता चुकी है। समाचार लिखे जाने तक राजस्थान में 45 कोरोना पॉजिटिव पाए गए है, जिनमें 19 तो भीलवाड़ा में ही हैं। 26 मार्च को यहां कोरोना संक्रमण और किडनी में तकलीफ समेत कई बीमारियों का इलाज करा रहे 73 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो जाती है। शाम तक उनके बेटे और पोती की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। रात में एक अन्य शख्स की मौत हो गई। लोगों में दहशत का माहौल है। जान बचाने के लिए रहवासी दूसरे जिलों में जा रहे हैं, यही कारण है कि वहां कम्यूनिटी इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है। 11 हजार लोग संदिग्ध हैं, जिनमें से 6445 को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
बांगड़ अस्पताल कम्यूनिटी इंफेक्शन की जड़
भीलवाड़ा के सीएमएचओ डॉक्टर मुस्ताक अहमद की माने तो यहां कोरोना पॉजिटिव मामले निजी अस्पताल बांगड़ से ही निकले हैं। बांगड़ 86 बिस्तरों का अस्पताल है। क्षमता से अधिक मरीज भर्ती होने के कारण ही कारण इंफेक्शन फैल गया। ओपीडी संक्रमित होने के बावजूद 7 हजार लोगों को डॉक्टरों के संपर्क में आए। अस्पताल के एक किलोमीटर तक का क्षेत्र सील किया जा चुका है। धारा 144 लागू कर दी गई है। 457 सैंपल में से 19 रिपोर्ट पॉजिटिव आने वाला देश का पहला एपिक सेंटर बन चुके भीलवाड़ा में विदेश से आए 133 लोग भी हाई रिस्क पर हैं। चार पॉजिटिव लोग जयपुर में भर्ती हैं। जितने भी मामले सामने आए हैं, एहतियातन सभी के परिजन का भी इलाज किया जा रहा है।
होटल, हॉस्टल, रिजॉर्ट बन रहे क्वारंटीन सेंटर
सर्वाधिक मौत के साथ कोरोना का केंद्र बिंदु बन चुके भीलवाड़ा में भयावह होते हालातों को नियंत्रित करने के लिए जिले के होटलों, हॉस्टलों और रिजॉर्ट समेत कई इमारतों को सरकार ने क्वारंटीन सेंटर में तब्दील करने का काम शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर पता कर रही है कि उनके यहां कोई विदेश से तो नहीं आया है। संदिग्धों की ट्रेवल हिस्ट्री निकाली जा रही है। सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के साथ-साथ बदनाम हो चुके बांगड़ अस्पताल में किसी का इलाज हुआ है या नहीं ये भी पूछा जा रहा है। 26 मार्च को एक ही दिन में हुई दो मौत से पहले 20 मार्च को भी इटली के एक नागरिक की मौत भी किडनी से जुड़ी बीमारी की वजह से हुई थी।
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