लखनऊ के फैजाबाद रोड स्थित इंद्रप्रस्थ एस्टेट, 2-3 के निवासी, बगल के प्लॉट नंबर 4, फैजाबाद रोड पर एक होटल के लिए चल रहे निर्माण और गहरी खुदाई के कारण गंभीर सुरक्षा चिंताओं का सामना कर रहे हैं। निर्माण कार्य लगभग तीन साल पहले शुरू हुआ था, जिसके दौरान आसपास की जमीन को लगभग 50-60 फीट की गहराई तक खोदा गया था। निवासियों का आरोप है कि इतनी गहरी खुदाई शुरू करने से पहले बिल्डर द्वारा पर्याप्त सुरक्षा और अवरोधन उपाय नहीं किए गए थे। इंद्रप्रस्थ एस्टेट की तरफ से इसका प्रतिकूल प्रभाव बहुत जल्दी दिखना शुरू हो गया था। स्थिति उत्तरोत्तर बिगड़ती गई: सबसे पहले, समाज की सीमा दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया।फिर, रास्तों और आसपास के इलाकों में दरारें दिखाई देने लगीं और चौड़ी होने लगीं।इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं हुईं। बची हुई चारदीवारी भी अब गिरने लगी है। आस-पास की जमीन ढलान वाली है, जिससे सोसायटी के जनरेटर और बोरवेल, भूमिगत जल और सीवरेज पाइपलाइन और वर्षा जल संचयन कक्ष जैसे अन्य बुनियादी ढांचे संभावित रूप से उच्च जोखिम में हैं। पिछले तीन वर्षों में, निवासियों और अपा...
साल 2019 के अंत में झारखंड और अब 2020 के पहले ही चुनावों में दिल्ली में हार। लोकसभा चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन करने के बावजूद भाजपा के हाथों से राज्य लगातार खिसकते जा रहे हैं। इस बार उम्मीद जताई जा रही थी कि भाजपा दिल्ली में सत्ता का 20 साल का वनवास खत्म कर सकती है, लेकिन ऐसा होता फिलहाल नहीं दिख रहा है। आम आदमी पार्टी पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ रही है।
इसके साथ ही भाजपा के सियासी नक्शे में दिल्ली का नाम नहीं जुड़ पाया। देश में इस समय दिल्ली को मिलाकर 12 राज्यों में भाजपा विरोधी दलों की सरकार है। जबकि एनडीए के पास 16 राज्य हैं। विधानसभा चुनावों में हार की बात करें तो पिछले दो साल में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सात राज्यों में सत्ता गंवा चुका है और दिल्ली में हार आठवीं होगी।
महाराष्ट्र में करीब एक महीने चले सियासी ड्रामे में भी भाजपा सत्ता बचाने में नाकामयाब रही। हरियाणा में हालांकि गठबंधन कर उसने अपनी सरकार बचाई। मगर झारखंड में उन्हें हार झेलनी पड़ी। दो साल पहले 2017 की बात करें तो भाजपा व सहयोगी पार्टियों के पास 19 राज्य थे। मगर उसने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवा दी। इसके बाद आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार बनाई।
इसके साथ ही भाजपा के सियासी नक्शे में दिल्ली का नाम नहीं जुड़ पाया। देश में इस समय दिल्ली को मिलाकर 12 राज्यों में भाजपा विरोधी दलों की सरकार है। जबकि एनडीए के पास 16 राज्य हैं। विधानसभा चुनावों में हार की बात करें तो पिछले दो साल में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सात राज्यों में सत्ता गंवा चुका है और दिल्ली में हार आठवीं होगी।
महाराष्ट्र में करीब एक महीने चले सियासी ड्रामे में भी भाजपा सत्ता बचाने में नाकामयाब रही। हरियाणा में हालांकि गठबंधन कर उसने अपनी सरकार बचाई। मगर झारखंड में उन्हें हार झेलनी पड़ी। दो साल पहले 2017 की बात करें तो भाजपा व सहयोगी पार्टियों के पास 19 राज्य थे। मगर उसने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवा दी। इसके बाद आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार बनाई।
राजस्थान के बाद, एमपी-महाराष्ट्र-झारखंड भी खिसके
- पहले राजस्थान, फिर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, पुडुचेरी में भाजपा को हार मिली।
- इसके बाद ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद महाराष्ट्र में भी वह सरकार बनाने में नाकाम रहे।
- पिछले साल के अंत में झारखंड में भी भाजपा को हराकर कांग्रेस गठबंधन ने सरकार बनाई।
- अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है।
इन राज्यों में भी भाजपा विरोधी सरकार
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का राज है जबकि केरल में माकपा के नेतृत्व वाली सरकार।
- आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस और तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है।
इन मुख्यमंत्रियों ने भी बना रखी दूरी
- ओडिशा में बीजू जनता दल के नवीन पटनायक भी केंद्र से दूरी बनाए रखते हैं।
- तमिलनाडु में भले ही भाजपा ने अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा हो, लेकिन प्रदेश में उसका कोई विधायक नहीं है।
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