लखनऊ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी यानी लॉग्स और इनफर्टिलिटी रिसर्च फाउंडेशन यानी आईआरएफ के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन *"इस्पात-मिडटर्म"* का शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य विषय रखा गया है - *"फ्रॉम इनफर्टिलिटी टू फैंटम केयर: रीडिफाइनिंग मॉडर्न मदरहुड"*। यानी बांझपन से लेकर आधुनिक मातृत्व तक की यात्रा को नई दिशा देना। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन *डॉ. श्रीमती राजुल त्यागी* के नेतृत्व में किया गया है। डॉ. राजुल त्यागी जावित्री हॉस्पिटल की डायरेक्टर हैं और इनफर्टिलिटी एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख भी हैं। इसके साथ सम्मेलन में इसके साथ सम्मेलन में डॉक्टर मिलिंद शाह प्रेसिडेंट इस्पात, डॉ प्रताप कुमार स्पीकर , डॉ माधुरी पटेल फॉक्सी प्रेसिडेंट, डॉ मंजीत मेहता वाइस प्रेसिडेंट इस्पात देशभर से 750 से अधिक प्रख्यात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ और इनफर्टिलिटी के महाविशेषज्ञ शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया। दो द...
हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा सुधार में बढ़ी छलांग लगाई है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जारी हुए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2018-19 में हिमाचल ने 1000 में से 799 अंक लेकर देश भर में छठा रैंक प्राप्त किया है। 2017-18 की रेंटिंग में हिमाचल का 14वां रैंक था। इस दौरान प्रदेश को 1000 में से 736 अंक मिले थे। शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाएं, समान शिक्षा और गवर्नेंस प्रोसेस के मामले में हिमाचल ने देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
केंद्रीय मंत्रालय ने 70 बिंदुओं के पैमाने पर आधारित परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रिपोर्ट को 2018 से तैयार करने की शुरुआत की है। मंत्रालय ने इन बिंदुओं के आधार पर सभी राज्यों से ऑनलाइन जानकारी मांगी थी। इस सूचना के आधार पर 2018-19 की रिपोर्ट तैयार हुई है। राज्यों की शिक्षा व्यवस्था के प्रदर्शन को सात ग्रेड में विभाजित किया था, जो कि शून्य से 1000 वेटेज पर आधारित था। लेवल वन और टू में कोई राज्य शामिल नहीं हो सका है।
केंद्रीय मंत्रालय ने 70 बिंदुओं के पैमाने पर आधारित परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रिपोर्ट को 2018 से तैयार करने की शुरुआत की है। मंत्रालय ने इन बिंदुओं के आधार पर सभी राज्यों से ऑनलाइन जानकारी मांगी थी। इस सूचना के आधार पर 2018-19 की रिपोर्ट तैयार हुई है। राज्यों की शिक्षा व्यवस्था के प्रदर्शन को सात ग्रेड में विभाजित किया था, जो कि शून्य से 1000 वेटेज पर आधारित था। लेवल वन और टू में कोई राज्य शामिल नहीं हो सका है।
किसी भी राज्य की परफॉर्मेंस 901-1000 नंबरों के मानकों को पूरी नहीं कर सकी। चंडीगढ़, गुजरात और केरल को लेवल थ्री 851-900 का वेटेज और ग्रेड एक प्लस की श्रेणी मिली है। महाराष्ट्र और दिल्ली को लेवल फोर 801-850 का वेटेज और ग्रेड एक की श्रेणी मिली है। हिमाचल, हरियाणा व पंजाब को 751-800 वेटेज के साथ ग्रेड दो मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षकों, प्राचार्यों और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी, नियमित पर्यवेक्षण और निरीक्षण की कमी, शिक्षकों के अपर्याप्त प्रशिक्षण, वित्त की समय पर उपलब्धता के मुद्दे शिक्षा प्रणाली को विफल करने वाले कारक हैं।
पैरामीटर कुल अंक हिमाचल
लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी 180 140
शिक्षा की पहुंच (एक्सेस) 80 74
बुनियादी सुविधा 150 126
समान शिक्षा (इक्विटी) 230 204
गवर्नेंस प्रोसेस 360 255
रिजल्ट 1000 799
पैरामीटर कुल अंक हिमाचल
लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी 180 140
शिक्षा की पहुंच (एक्सेस) 80 74
बुनियादी सुविधा 150 126
समान शिक्षा (इक्विटी) 230 204
गवर्नेंस प्रोसेस 360 255
रिजल्ट 1000 799
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