लखनऊ, । हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और म...
लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर देश विरोधी प्रदर्शन करने की इजाजत देने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को ब्रिटेन को जमकर लताड़ लगाई। भारत ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से उच्चायोग के संचालन में कठिनाइयां पैदा हो रही हैं।
उच्चायोग के बाहर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हुई थी। इस भीड़ ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए भारत की निंदा की थी और क्षेत्र में चह रही कथित ‘दमनात्मक कार्रवाई’ को खत्म करने की मांग की थी। इस प्रदर्शन का आयोजन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने किया था।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने इस मामले को ब्रिटिश सरकार के सामने उठाया है। उन्हें बताया है कि इस तरह की घटनाओं से हमारे उच्चायोग की कार्रवाई के संचालन में परेशानी पैदा होती है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है भविष्य में लंदन में ऐसे भारत विरोधी प्रदर्शन आयोजित नहीं होंगे।
बता दें कि पिछले सप्ताह ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रुचि घनश्याम ने गृह सचिव प्रीति पटेल से मुलाकात की थी। मुलाकात में उच्चायुक्त ने भारतीय मिशन के बाहर ऐसे योजनाबद्ध प्रदर्शनों से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने का मुद्दा गृह सचिव के सामने रखा था।
उच्चायोग के बाहर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हुई थी। इस भीड़ ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए भारत की निंदा की थी और क्षेत्र में चह रही कथित ‘दमनात्मक कार्रवाई’ को खत्म करने की मांग की थी। इस प्रदर्शन का आयोजन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने किया था।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने इस मामले को ब्रिटिश सरकार के सामने उठाया है। उन्हें बताया है कि इस तरह की घटनाओं से हमारे उच्चायोग की कार्रवाई के संचालन में परेशानी पैदा होती है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है भविष्य में लंदन में ऐसे भारत विरोधी प्रदर्शन आयोजित नहीं होंगे।
बता दें कि पिछले सप्ताह ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रुचि घनश्याम ने गृह सचिव प्रीति पटेल से मुलाकात की थी। मुलाकात में उच्चायुक्त ने भारतीय मिशन के बाहर ऐसे योजनाबद्ध प्रदर्शनों से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने का मुद्दा गृह सचिव के सामने रखा था।
लगातार ब्रिटेन को चेता रहा है भारत
दरअसल ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी पाकिस्तान समर्थकों ने उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शन किया था। इस दौरान हजारों लोगों की भीड़ ने उच्चायोग के बाहर हिंसा करनी शुरू कर दी थी।
उस समय भी भारत ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय को इस बारे में चेताया था। इसके अलावा भी कई मौके पर पाकिस्तानी समूहों ने ब्रिटेन में रहने वाले सिख व कश्मीरी अलगाववादियों के साथ मिलकर भारतीय उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शनों को अंजाम दिया है।
उस समय भी भारत ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय को इस बारे में चेताया था। इसके अलावा भी कई मौके पर पाकिस्तानी समूहों ने ब्रिटेन में रहने वाले सिख व कश्मीरी अलगाववादियों के साथ मिलकर भारतीय उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शनों को अंजाम दिया है।
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