_मेदांता अस्पताल की एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑनकोलॉजी एवं हीमैटो ऑनकोलॉजी विभाग की डॉ. अंजली सचान ने कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज पर विस्तार से जानकारी दी।_ _डॉ. अंजली सचान ने बताया कि तंबाकू-शराब का सेवन, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ वायरल इंफेक्शन कैंसर के मुख्य कारण हैं।_ _उन्होंने 7 सबसे आम कैंसर के बारे में भी बताया:_ *_1. फेफड़े का कैंसर* - मुख्य कारण धूम्रपान और प्रदूषण_ *_2. ब्रेस्ट कैंसर* - महिलाओं में सबसे आम, आनुवंशिक और हार्मोनल कारण_ *_3. कोलन कैंसर* - अस्वस्थ खानपान और मोटापे से जुड़ा_ *_4. प्रोस्टेट कैंसर* - 50 साल से ऊपर पुरुषों में आम_ *_5. मुंह का कैंसर* - तंबाकू और गुटखे के सेवन से_ *_6. सर्वाइकल कैंसर* - महिलाओं में, HPV वायरस प्रमुख कारण_ *_7. ब्लड कैंसर* - आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से_ _डॉ. सचान ने कहा कि वजन घटना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, लंबे समय तक खांसी या घाव न भरना जैसे लक्षण दिखें तो ...
लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर देश विरोधी प्रदर्शन करने की इजाजत देने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को ब्रिटेन को जमकर लताड़ लगाई। भारत ने कहा है कि इस तरह की घटनाओं से उच्चायोग के संचालन में कठिनाइयां पैदा हो रही हैं।
उच्चायोग के बाहर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हुई थी। इस भीड़ ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए भारत की निंदा की थी और क्षेत्र में चह रही कथित ‘दमनात्मक कार्रवाई’ को खत्म करने की मांग की थी। इस प्रदर्शन का आयोजन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने किया था।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने इस मामले को ब्रिटिश सरकार के सामने उठाया है। उन्हें बताया है कि इस तरह की घटनाओं से हमारे उच्चायोग की कार्रवाई के संचालन में परेशानी पैदा होती है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है भविष्य में लंदन में ऐसे भारत विरोधी प्रदर्शन आयोजित नहीं होंगे।
बता दें कि पिछले सप्ताह ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रुचि घनश्याम ने गृह सचिव प्रीति पटेल से मुलाकात की थी। मुलाकात में उच्चायुक्त ने भारतीय मिशन के बाहर ऐसे योजनाबद्ध प्रदर्शनों से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने का मुद्दा गृह सचिव के सामने रखा था।
उच्चायोग के बाहर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर किए गए इस प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हुई थी। इस भीड़ ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए भारत की निंदा की थी और क्षेत्र में चह रही कथित ‘दमनात्मक कार्रवाई’ को खत्म करने की मांग की थी। इस प्रदर्शन का आयोजन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने किया था।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने इस मामले को ब्रिटिश सरकार के सामने उठाया है। उन्हें बताया है कि इस तरह की घटनाओं से हमारे उच्चायोग की कार्रवाई के संचालन में परेशानी पैदा होती है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है भविष्य में लंदन में ऐसे भारत विरोधी प्रदर्शन आयोजित नहीं होंगे।
बता दें कि पिछले सप्ताह ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त रुचि घनश्याम ने गृह सचिव प्रीति पटेल से मुलाकात की थी। मुलाकात में उच्चायुक्त ने भारतीय मिशन के बाहर ऐसे योजनाबद्ध प्रदर्शनों से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने का मुद्दा गृह सचिव के सामने रखा था।
लगातार ब्रिटेन को चेता रहा है भारत
दरअसल ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी पाकिस्तान समर्थकों ने उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शन किया था। इस दौरान हजारों लोगों की भीड़ ने उच्चायोग के बाहर हिंसा करनी शुरू कर दी थी।
उस समय भी भारत ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय को इस बारे में चेताया था। इसके अलावा भी कई मौके पर पाकिस्तानी समूहों ने ब्रिटेन में रहने वाले सिख व कश्मीरी अलगाववादियों के साथ मिलकर भारतीय उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शनों को अंजाम दिया है।
उस समय भी भारत ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय को इस बारे में चेताया था। इसके अलावा भी कई मौके पर पाकिस्तानी समूहों ने ब्रिटेन में रहने वाले सिख व कश्मीरी अलगाववादियों के साथ मिलकर भारतीय उच्चायोग के बाहर हिंसक प्रदर्शनों को अंजाम दिया है।
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