_मेदांता अस्पताल की एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑनकोलॉजी एवं हीमैटो ऑनकोलॉजी विभाग की डॉ. अंजली सचान ने कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज पर विस्तार से जानकारी दी।_ _डॉ. अंजली सचान ने बताया कि तंबाकू-शराब का सेवन, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ वायरल इंफेक्शन कैंसर के मुख्य कारण हैं।_ _उन्होंने 7 सबसे आम कैंसर के बारे में भी बताया:_ *_1. फेफड़े का कैंसर* - मुख्य कारण धूम्रपान और प्रदूषण_ *_2. ब्रेस्ट कैंसर* - महिलाओं में सबसे आम, आनुवंशिक और हार्मोनल कारण_ *_3. कोलन कैंसर* - अस्वस्थ खानपान और मोटापे से जुड़ा_ *_4. प्रोस्टेट कैंसर* - 50 साल से ऊपर पुरुषों में आम_ *_5. मुंह का कैंसर* - तंबाकू और गुटखे के सेवन से_ *_6. सर्वाइकल कैंसर* - महिलाओं में, HPV वायरस प्रमुख कारण_ *_7. ब्लड कैंसर* - आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से_ _डॉ. सचान ने कहा कि वजन घटना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, लंबे समय तक खांसी या घाव न भरना जैसे लक्षण दिखें तो ...
खास बातें
- सहयोगी को मनाने के लिए केंद्र में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद देने का प्रस्ताव
- शिवसेना की हां के बाद जदयू के लिए भी यही फार्मूला अपनाएगी भाजपा
- शीतकालीन सत्र से ठीक पहले हो सकता है मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार
महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच जारी सियासी रस्साकशी में मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार की संभावना भी छिपी हुई है। दरअसल महाराष्ट्र की सत्ता का विवाद का हल निकालने के लिए भाजपा के फार्मूले में केंद्र में सहयोगी शिवसेना के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का प्रस्ताव भी है। अगर शिवसेना राजी हुई तो भाजपा दूसरी सहयोगी जदयू के लिए भी एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद देने का प्रस्ताव रखेगी। ऐसे में शीतकालीन सत्र से ठीक पहले या तत्काल बाद मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।
दरअसल महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना मुख्यमंत्री पद और ढाई साल के कार्यकाल पर अड़ी हुई है, मगर अंदरखाने दोनों ही ओर से विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हो रही हैं। शिवसेना की ओर से उद्घव ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने से भी इस आशय का संकेत मिलता है। जाहिर तौर पर ठाकरे की जगह शिंदे को आगे कर शिवसेना ने प्रतीकात्मक रूप से सीएम पद का दावा छोड़ दिया है। इससे पहले शिवसेना की ओर से ठाकरे को भावी सीएम के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे।
गौरतलब है कि जदयू ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के मामले में बुधवार को यू टर्न ले लिया था। पार्टी ने भाजपा के समक्ष मंत्रिमंडल में आनुपातिक हिस्सेदारी की मांग की है। अगर शिवसेना ने एक और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर हामी भरी तो यही फार्मूला जदयू पर भी लागू होगा। क्योंकि दोनों ही दल के सांसदों की संख्या करीब करीब एक समान है।
दरअसल महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना मुख्यमंत्री पद और ढाई साल के कार्यकाल पर अड़ी हुई है, मगर अंदरखाने दोनों ही ओर से विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हो रही हैं। शिवसेना की ओर से उद्घव ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने से भी इस आशय का संकेत मिलता है। जाहिर तौर पर ठाकरे की जगह शिंदे को आगे कर शिवसेना ने प्रतीकात्मक रूप से सीएम पद का दावा छोड़ दिया है। इससे पहले शिवसेना की ओर से ठाकरे को भावी सीएम के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे।
गौरतलब है कि जदयू ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के मामले में बुधवार को यू टर्न ले लिया था। पार्टी ने भाजपा के समक्ष मंत्रिमंडल में आनुपातिक हिस्सेदारी की मांग की है। अगर शिवसेना ने एक और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर हामी भरी तो यही फार्मूला जदयू पर भी लागू होगा। क्योंकि दोनों ही दल के सांसदों की संख्या करीब करीब एक समान है।
सबकुछ शिवसेना पर निर्भर
निकट भविष्य में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा या नहीं, इस संदर्भ में सारा दारोमदार शिवसेना के भावी रुख पर है। शिवसेना की हां के बाद पार्टी नई सहयोगी अन्नाद्रमुक, अपना दल सहित कुछ और दलों को सरकार में भागीदारी दे सकती है।
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