बलरामपुर।जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। *पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद -* इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को न...
स्पेशल फोर्सेज ने कैसे दिया मिशन को अंजाम
अमेरिका ने इस मिशन के लिए स्पेशल फोर्स के एक बड़े समूह को शामिल किया था। इसमें आठ हेलीकॉप्टर, नौसेना के कई युद्धक पोत और लड़ाकू विमान शामिल थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले से ही जानती थीं कि बगदादी यहां रह रहा है और उसके साथ बड़ी संख्या में आईएस लड़ाके भी सुरक्षा में तैनात हैं।
अमेरिकी हेलीकॉप्टरों ने तुर्की के ऊपर से उड़ान भरते हुए सीरिया के इदबिल प्रांत में प्रवेश किया। इस जगह से थोड़ी दूर पर सीरिया और रूस की सेना भी तैनात हैं लेकिन उन्हें इस ऑपरेशन की भनक तक नहीं लगी।
ट्रंप के अनुसार हेलीकॉप्टर ने बहुत ही खतरनाक इलाकों से उड़ान भरी। इस बात का डर था कि हेलीकॉप्टर कहीं आग की चपेट में न आ जाएं। उसकी रफ्तार कभी बहुत धीमी करनी पड़ती थी तो कभी बहुत ही तेज। जैसे ही हेलीकॉप्टर बगदादी के ठिकाने के पास पहुंचे कि गोलीबारी शुरू हो गई
जमीन पर उतरने से पहले हेलीकॉप्टर से 30 मिनट तक गोलीबारी हुई। हेलीकॉप्टर से दो घरों पर मिसाइलें भी दागी गईं। इसमें एक घर पूरी तरह से तबाह हो गया।
एक हेलीकॉप्टर को उतारा गया। इसके बाद अमेरिका के स्पेशल फोर्स के जवानों ने परिसर की दीवारों को विस्फोटकों के जरिए उड़ा दिया। जवानों ने मुख्य दरवाजे का प्रयोग इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनमें विस्फोटक न लगे हों।
अमेरिकी सैनिकों के साथ थे प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट
अमेरिकी कमांडो टीम के साथ प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट भी था। यह रोबोट किसी भी तरह के आत्मघाती हमले का सामना करने में सक्षम था। कमांडो टीम अत्याधुनिक हथियारों से लैस थी।
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