होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
स्पेशल फोर्सेज ने कैसे दिया मिशन को अंजाम
अमेरिका ने इस मिशन के लिए स्पेशल फोर्स के एक बड़े समूह को शामिल किया था। इसमें आठ हेलीकॉप्टर, नौसेना के कई युद्धक पोत और लड़ाकू विमान शामिल थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले से ही जानती थीं कि बगदादी यहां रह रहा है और उसके साथ बड़ी संख्या में आईएस लड़ाके भी सुरक्षा में तैनात हैं।
अमेरिकी हेलीकॉप्टरों ने तुर्की के ऊपर से उड़ान भरते हुए सीरिया के इदबिल प्रांत में प्रवेश किया। इस जगह से थोड़ी दूर पर सीरिया और रूस की सेना भी तैनात हैं लेकिन उन्हें इस ऑपरेशन की भनक तक नहीं लगी।
ट्रंप के अनुसार हेलीकॉप्टर ने बहुत ही खतरनाक इलाकों से उड़ान भरी। इस बात का डर था कि हेलीकॉप्टर कहीं आग की चपेट में न आ जाएं। उसकी रफ्तार कभी बहुत धीमी करनी पड़ती थी तो कभी बहुत ही तेज। जैसे ही हेलीकॉप्टर बगदादी के ठिकाने के पास पहुंचे कि गोलीबारी शुरू हो गई
जमीन पर उतरने से पहले हेलीकॉप्टर से 30 मिनट तक गोलीबारी हुई। हेलीकॉप्टर से दो घरों पर मिसाइलें भी दागी गईं। इसमें एक घर पूरी तरह से तबाह हो गया।
एक हेलीकॉप्टर को उतारा गया। इसके बाद अमेरिका के स्पेशल फोर्स के जवानों ने परिसर की दीवारों को विस्फोटकों के जरिए उड़ा दिया। जवानों ने मुख्य दरवाजे का प्रयोग इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनमें विस्फोटक न लगे हों।
अमेरिकी सैनिकों के साथ थे प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट
अमेरिकी कमांडो टीम के साथ प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट भी था। यह रोबोट किसी भी तरह के आत्मघाती हमले का सामना करने में सक्षम था। कमांडो टीम अत्याधुनिक हथियारों से लैस थी।
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