होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
कानपुर: लोगों के कपड़े प्रेस करके जीवन यापन करने वाले देहली सुजानपुर निवासी हरिश्चंद्र कनौजिया के बेटे सुशील कुमार ने साबित कर दिखाया कि उड़ान पंखों से नहीं बल्कि हौसलों से होती है। अभावों में पले बढ़े सुशील ने नेवल सीनियर सेकेंडरी रिक्रूटमेंट-2019 की परीक्षा में सेलर (ग्रुप सी) पद पर सफलता हासिल की है। 17 अगस्त से कर्नाटक स्थित कारवार नेवल स्टेशन में उनकी शिप ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी।
सुशील के पिता कानपुर के किदवई नगर हनुमान मंदिर के पास सालों से कपड़े प्रेस करते आ रहे हैं। सुशील ने बताया कि उसने केंद्रीय विद्यालय चकेरी से इंटरमीडिएट किया है। पापा और मम्मी का सपना था कि घर का कोई सदस्य नेवी या पुलिस में जाए।
तभी से उसने इसे अपना धेय बना लिया था आखिर सफलता मिल गई। नेवी की परीक्षा के साथ यूपी पुलिस 2019 की परीक्षा में भी उसे सफलता मिली है लेकिन वह नेवी में ही नौकरी करेगा। हरिश्चंद्र ने बताया कि पढ़ाई का महत्व वे अच्छे से जानते हैं।
खुद भी स्नातक पास हैं लेकिन कोई नौकरी न मिलने की वजह से पिता के इस काम में हाथ बटाने लगा। बाबा भी यही काम करते थे। हरिश्चंद्र का बड़ा बेटा सूरज हैलट अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है। छोटे बेटे सुशील का नेवी में चयन हुआ है। दो बेटियां हैं, वे भी पढ़ाई कर रही हैं।
खुद भी स्नातक पास हैं लेकिन कोई नौकरी न मिलने की वजह से पिता के इस काम में हाथ बटाने लगा। बाबा भी यही काम करते थे। हरिश्चंद्र का बड़ा बेटा सूरज हैलट अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है। छोटे बेटे सुशील का नेवी में चयन हुआ है। दो बेटियां हैं, वे भी पढ़ाई कर रही हैं।
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