_मेदांता अस्पताल की एसोसिएट कंसल्टेंट, मेडिकल ऑनकोलॉजी एवं हीमैटो ऑनकोलॉजी विभाग की डॉ. अंजली सचान ने कैंसर के कारण, लक्षण और इलाज पर विस्तार से जानकारी दी।_ _डॉ. अंजली सचान ने बताया कि तंबाकू-शराब का सेवन, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, प्रदूषण, आनुवंशिक कारण, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ वायरल इंफेक्शन कैंसर के मुख्य कारण हैं।_ _उन्होंने 7 सबसे आम कैंसर के बारे में भी बताया:_ *_1. फेफड़े का कैंसर* - मुख्य कारण धूम्रपान और प्रदूषण_ *_2. ब्रेस्ट कैंसर* - महिलाओं में सबसे आम, आनुवंशिक और हार्मोनल कारण_ *_3. कोलन कैंसर* - अस्वस्थ खानपान और मोटापे से जुड़ा_ *_4. प्रोस्टेट कैंसर* - 50 साल से ऊपर पुरुषों में आम_ *_5. मुंह का कैंसर* - तंबाकू और गुटखे के सेवन से_ *_6. सर्वाइकल कैंसर* - महिलाओं में, HPV वायरस प्रमुख कारण_ *_7. ब्लड कैंसर* - आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से_ _डॉ. सचान ने कहा कि वजन घटना, लगातार थकान, शरीर में गांठ, लंबे समय तक खांसी या घाव न भरना जैसे लक्षण दिखें तो ...
कानपुर: लोगों के कपड़े प्रेस करके जीवन यापन करने वाले देहली सुजानपुर निवासी हरिश्चंद्र कनौजिया के बेटे सुशील कुमार ने साबित कर दिखाया कि उड़ान पंखों से नहीं बल्कि हौसलों से होती है। अभावों में पले बढ़े सुशील ने नेवल सीनियर सेकेंडरी रिक्रूटमेंट-2019 की परीक्षा में सेलर (ग्रुप सी) पद पर सफलता हासिल की है। 17 अगस्त से कर्नाटक स्थित कारवार नेवल स्टेशन में उनकी शिप ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी।
सुशील के पिता कानपुर के किदवई नगर हनुमान मंदिर के पास सालों से कपड़े प्रेस करते आ रहे हैं। सुशील ने बताया कि उसने केंद्रीय विद्यालय चकेरी से इंटरमीडिएट किया है। पापा और मम्मी का सपना था कि घर का कोई सदस्य नेवी या पुलिस में जाए।
तभी से उसने इसे अपना धेय बना लिया था आखिर सफलता मिल गई। नेवी की परीक्षा के साथ यूपी पुलिस 2019 की परीक्षा में भी उसे सफलता मिली है लेकिन वह नेवी में ही नौकरी करेगा। हरिश्चंद्र ने बताया कि पढ़ाई का महत्व वे अच्छे से जानते हैं।
खुद भी स्नातक पास हैं लेकिन कोई नौकरी न मिलने की वजह से पिता के इस काम में हाथ बटाने लगा। बाबा भी यही काम करते थे। हरिश्चंद्र का बड़ा बेटा सूरज हैलट अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है। छोटे बेटे सुशील का नेवी में चयन हुआ है। दो बेटियां हैं, वे भी पढ़ाई कर रही हैं।
खुद भी स्नातक पास हैं लेकिन कोई नौकरी न मिलने की वजह से पिता के इस काम में हाथ बटाने लगा। बाबा भी यही काम करते थे। हरिश्चंद्र का बड़ा बेटा सूरज हैलट अस्पताल में लैब टेक्नीशियन है। छोटे बेटे सुशील का नेवी में चयन हुआ है। दो बेटियां हैं, वे भी पढ़ाई कर रही हैं।
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