भारत में मास्क का इस्तेमाल और शारीरिक दूरी के मानकों का पालन करना इस साल एक दिसंबर तक दो लाख लोगों की मौतों को रोकने में मददगार साबित हो सकता है। एक अध्ययन में यह सामने आया है। इसमें यह भी सामने आया है कि यह बीमारी देश में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बनी रहेगी अमेरिका स्थित वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स ऐंड इवैल्यूएशन (आइएचएमई) की एक स्टडी में बताया गया कि भारत में कोरोना संबंधी मौतों की संख्या में आगे कमी लाने का एक अवसर है। इसके मुताबिक, लोगों को लगातार मास्क का उपयोग करने के साथ ही शारीरिक दूरी के नियमों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी कोरोना रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है। वहीं, भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के बिना लक्षण वाले मरीजों वायरस की मात्रा अधिक पाई गई है। तेलंगाना में कोरोना के 200 से अधिक मरीजों पर हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई जो नीति निर्माताओं को कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बारे में बेहतर जानकारी दे सकती है।
यूपी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में निजी आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष 6 प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 15 मई, शुक्रवार सुबह 10 बजे प्रदेश भर के प्रशिक्षक, प्रबंधक और छात्र निदेशालय पर एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि कौशल विकास में निजी ITI की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन मौजूदा नीतियों से संस्थानों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
*प्रमुख मांगें:*
1. *फीस वृद्धि तत्काल लागू हो:* हरियाणा मॉडल के अनुरूप इसी सत्र से फीस बढ़ाई जाए। बढ़ती संचालन लागत, वेतन और रखरखाव के कारण पुरानी फीस पर संचालन कठिन है।
2. *निम्स पोर्टल पर नोडल वेरिफिकेशन खत्म हो:* पैन, आधार, OTP आधारित e-KYC के बाद अतिरिक्त नोडल वेरिफिकेशन अनावश्यक और शोषणकारी है।
3. *थर्ड शिफ्ट बहाल हो:* दिन में नौकरी करने वाले हजारों छात्रों को शाम की शिफ्ट न होने से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा।
4. *PMKVY 5.0 में भागीदारी मिले:* निजी संस्थानों के पास संसाधन और अनुभवी स्टाफ होने के बावजूद योजनाओं में भागी...
Comments
Post a Comment