कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली वालों के लिए राहत की खबर है। अब तक दिल्ली में हर दिन कोरोना वायरस के कई गुना केस मिल रहे हैं लेकिन इन मरीजों के स्वास्थ्य की बात करें तो 91 फीसदी में संक्रमण का असर फिलहाल हल्का है।
इसके अलावा 12 फीसदी मरीज ऐसे भी हैं जिनकी आयु 50 वर्ष से अधिक होने के साथ ही वे डायबिटीज और हार्ट की बीमारी के पहले से शिकार हैं। इन मरीजों में अगले कुछ दिन में गंभीर लक्षण मिल सकते हैं।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों में 8.4 फीसदी मरीजों की हालत चिंताजनक है जिनमें से 5 फीसदी आईसीयू में भर्ती हैं। शनिवार तक दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1069 हो चुकी है जिनमें से 1023 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 54 मरीज आईसीयू, आठ वेंटिलेटर और 23 मरीज ऑक्सीजन पर हैं।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में चार संक्रमित मरीज भर्ती हैं। इन सभी की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं आरएमएल में भर्ती 22 में से 10 मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट किया जा चुका है। ठीक इसी तरह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 24 में से तीन मरीज आईसीयू में हैं और एक मरीज वेंटिलेटर पर है। हालांकि एम्स के झज्जर कैंपस में मौजूद 142 मरीजों में अब तक गंभीर लक्षण नहीं मिले हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक संक्रमण का असर उन्हीं मरीजों में देखने को मिल रहा है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण का मुकाबला नहीं कर पा रही है। सफदरजंग अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि दिल्ली में सबसे पहला मरीज जब सामने आया था तो उस वक्त कोरोना का उपचार करना बड़ी चुनौती था।
ज्यादातर डॉक्टर, नर्स या अन्य स्टाफ को ये नहीं पता था कि इनका उपचार कैसे करना है? कोरोना वायरस को लेकर तब तक मंत्रालय की गाइडलाइन भी नहीं मिली थीं लेकिन अब काफी अनुभव हो चुका है। अभी तक जितने भी केस अस्पताल में आए हैं उनमें महज 2 से 3 फीसदी ही गंभीर लक्षणों वाले मिले हैं
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