होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस मिसाल को मध्य प्रदेश के पाताल कोट के तामियां गांव की रहने वाली भावना ने सच साबित किया। होली के दिन ऑस्ट्रेलिया की माउंट कोसिउसजोयो चोटी पर तिरंगा फहराकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया।
भावना देहारिया बताती हैं कि अपने देश की परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने होली के दिन ऑस्ट्रेलिया की चोटी पर तिरंगा फहराया। मध्य प्रदेश के एक गरीब परिवार से आने वाली भावना की जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं था। लड़की होने के चलते और एक गरीब परिवार से होने के नाते उन पर कई पाबंदियां लगाई गई थीं।
आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावना बताती हैं कि जब घर वालों से अपने इस शौक के विषय में बात की तो घर से ज्यादा समर्थन नहीं मिला। चूंकि पिताजी एक स्कूल मास्टर थे तो उनका कहना था कि जल्दी पढ़ाई पूरी करके शादी कर लो, लेकिन मैंने ठान ली थी कि मुझे अपने इस सपने को पूरा करना है।
पर्वतारोहण में बचपन से ही दिलचस्पी होने के कारण भावना ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंनेे शारीरिक शिक्षा में स्नातक किया। दिल्ली के इंडियन माउंटेनयरिंग फाउंडेशन से उन्हें काफी सहयोग मिला। इसी के सहारे उन्होंने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। भावना बताती हैं कि वह साल 2016 से दिल्ली की इस संस्था की सदस्य हैं। इसी के माध्यम से उन्हें कई पर्वतारोहियों से मिलने का मौका मिला और उन्होंने इस संस्था से काफी कुछ सीखा भी।
भावना देहारिया बताती हैं कि अपने देश की परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने होली के दिन ऑस्ट्रेलिया की चोटी पर तिरंगा फहराया। मध्य प्रदेश के एक गरीब परिवार से आने वाली भावना की जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं था। लड़की होने के चलते और एक गरीब परिवार से होने के नाते उन पर कई पाबंदियां लगाई गई थीं।
आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावना बताती हैं कि जब घर वालों से अपने इस शौक के विषय में बात की तो घर से ज्यादा समर्थन नहीं मिला। चूंकि पिताजी एक स्कूल मास्टर थे तो उनका कहना था कि जल्दी पढ़ाई पूरी करके शादी कर लो, लेकिन मैंने ठान ली थी कि मुझे अपने इस सपने को पूरा करना है।
पर्वतारोहण में बचपन से ही दिलचस्पी होने के कारण भावना ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंनेे शारीरिक शिक्षा में स्नातक किया। दिल्ली के इंडियन माउंटेनयरिंग फाउंडेशन से उन्हें काफी सहयोग मिला। इसी के सहारे उन्होंने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। भावना बताती हैं कि वह साल 2016 से दिल्ली की इस संस्था की सदस्य हैं। इसी के माध्यम से उन्हें कई पर्वतारोहियों से मिलने का मौका मिला और उन्होंने इस संस्था से काफी कुछ सीखा भी।
जब भावना ने माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा
22 अप्रैल 2019 को भावना ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। भावना माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली मध्य प्रदेश की पहली महिला हैं। अपने दल की एक टीम के साथ वह मार्च के महीने में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंची। इस टीम के साथ 22 अप्रैल को उन्होंने (8,848 मीटर) की ऊंचाई पर सागरमाथा (एवरेस्ट) पर भारत का झंडा लहराया।
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