होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
भारत में अब तक कोरोना वायरस के 152 मामले सामने आए हैं, वही इस जानलेवा वायरस से अब तक तीन लोगों की मौत हुई है। लेकिन लोगों के बीच इस बात सुगबुगाहट है कि भारत जैसी इतनी आबादी में संक्रमितों की संख्या इतनी कम कैसे हैं। इस बात का जवाब इस प्रकार मिल सकता है कि अभी तक भारत में कितने लोगों की कोरोना को लेकर जांच की गई है। जहां दक्षिण कोरिया में कोरोना की जांच हर 10 लाख की आबादी में 4,831 लोगों की हुई, चीन में यह आकंड़ा हर 10 लाख पर 2,820 लोगों का है, इटली में दस लाख पर 1,420 लोगों की जांच की गई है। वहीं, भारत में जांच का यह अनुपात बहुत ही कम है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 17 जनवरी तक भारत में अब तक 7,919 लोगों की ही जांच की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस कारण भारत में अब तक 152 मामले ही सामने आए हैं, जबकि हकीकत यह है कि देश के कई हिस्सों में यह वायरस लोगों के बीच पहुंच रहा है। यह वायरस तेजी से एक-दूसरे के माध्यम से देश के नागरिकों के बीच अपने पांव पसार रहा है, इसलिए सरकार को सही आंकड़ों का पता लगाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने की जरूरत है। जितने ज्यादा लोगों की जांच की जाएगी, उतना ही इस वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। फिलहाल अगर आपको कोरोना के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आप सीधे अस्पताल जाकर इसकी जांच नहीं करवा सकते हैं। आपको सरकार द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन नंबर पर फोन करना होता है। जब आप हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करेंगे तो वे लोग आपसे कई तरह के सवाल करेंगे। जिनमें आप से पूछा जाएगा कि क्या आपने विदेश यात्रा की, विदेश यात्रा करके लौटे व्यक्ति के साथ समय बिताया या फिर आप इस बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति से मिले थे? अगर आप इस सवाल का हां में उत्तर देंगे तो आपको अस्पताल भेजा जाएगा, जहां आपकी जांच की जाएगी। वहीं, अगर आप का जवाब नहीं होता है तो आपको जांच के लिए नहीं भेजा जाएगा। दरअसल, यह सारी जांच प्रक्रिया आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप की जा रही है। आईसीएमआर गाइडलाइन में कहा गया है कि बीमारी मुख्य रूप से प्रभावित देशों की यात्रा करने वाले व्यक्तियों या पॉजीटिव मामलों के करीबी संपर्क में होती है, इसलिए सभी व्यक्तियों का परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए।स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वायरस की जांच करने की सरकार द्वारा अपनाई जा रही इस प्रणाली से चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आबादी एक अरब 30 करोड़ हैं और इतनी ज्यादा आबादी वाले देश में जांच बहुत कम किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत का यह तरीका जांच को सीमित करने वाला है। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया, हांग कांग और सिंगापुर में इसके उलट उदार तरीके का प्रयोग किया जा रहा है, जहां वायरस के लक्षण वाले हर व्यक्ति की सरकारी और निजी अस्पतालों में जांच की जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि अगर भारत दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाए तो मामलों की संख्या 5000 तक पहुंच सकती है।
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