होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आठ भारतीय नाविक पिछले नौ महीने से बिना वेतन के एक जहाज में फंसे हुए हैं। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इन में से तीन नाविक काफी बीमार भी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमवी हूट नामक जहाज में फंसे नाविक जून 2019 से खोर फक्कान तट पर हैं। वे अनजाने में यहां एक कानूनी विवाद में फंस गए थे। इन में से दो बुखार से पीड़ित हैं जबकि एक त्वचा संक्रमण से जूझ रहा है।
इन लोगों के पास स्वास्थ्य सेवा या दवाओं की पहुंच नहीं है। ऐसे में चालक दल के अन्य सदस्यों को डर है कि वे भी बीमार पड़ सकते हैं। जहाज के मुख्य अधिकारी सुरेश कुमार ने अखबार को फोन पर बताया, हमारी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। हम मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से थक चुके हैं। मुझे नहीं पता कि हम इस तरह से कब तक यहां रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिपिंग कंपनी ने नौ महीने से उन्हें वेतन भी नहीं दिया है।
इन लोगों के पास स्वास्थ्य सेवा या दवाओं की पहुंच नहीं है। ऐसे में चालक दल के अन्य सदस्यों को डर है कि वे भी बीमार पड़ सकते हैं। जहाज के मुख्य अधिकारी सुरेश कुमार ने अखबार को फोन पर बताया, हमारी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। हम मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से थक चुके हैं। मुझे नहीं पता कि हम इस तरह से कब तक यहां रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिपिंग कंपनी ने नौ महीने से उन्हें वेतन भी नहीं दिया है।
पीने के लिए पानी की कमी
इंजन का रखरखाव करने वाले 32 साल के जसपाल सिंह ने कहा कि वे उधार लेकर काम चला रहे हैं। हम में से दो बुखार से पीड़ित है जबकि हमारा रसोइये के पूरे शरीर पर संक्रमण हो चुका है। हमारे पास पीने के पानी की भी भारी कमी है। हम में से कई लोग कुछ महीनों से नहाए भी नहीं है। हमें नहाने के लिए मजबूरी में समुद्री पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। हमने कई अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात की लेकिन कुछ समाधान नहीं निकल पा रहा है।
गलती से कानूनी पचड़े में फंसे
सुरेश के मुताबिक, जहाज एक जून को शारजाह के हमारियाह पोर्ट से निकला था। लेकिन हमें मध्य समुद्र में तेल भरना पड़ा। तट रक्षकों ने बिना अनुमति के तेल भरने को लेकर हमारे जहाज को पकड़ा और खोर फक्कान ले गए। सुरेश के मुताबिक, इसमें हमारी गलती नहीं बल्कि जहाज मालिक ने तेल भरने के लिए एक बोट वहां भेजी थी। तब से हम यहीं पर एंकर डालकर रहने को मजबूर हैं। मामला फुजाइराह कोर्ट में चल रहा है। जब तक हमारे पक्ष में फैसला नहीं आ जाता हम जहाज को नहीं छोड़ सकते।
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