होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर आज मुहर लगेगी। जानकारी के मुताबिक यह समझौता कतर के दोहा में होगा। इस कार्यक्रम का साक्षी बनने के लिए दुनियाभर के 30 देशों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है, इनमें भारत भी शामिल है।
शृंगला ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री हारून चाखनसुरी से मुलाकात की और उन्हें शांति समझौते को लेकर भारत के रुख के साथ ही उसके चहुंमुखी विकास को लेकर प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि शृंगला और हारून ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। विदेश सचिव ने स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास की अफगानिस्तान के लोगों की कोशिशों में भारत का पूर्ण समर्थन जताया।
उन्होंने लिखा कि भारत अफगानिस्तान की राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखंडता, लोकतंत्र और समृद्धि में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
अफगानिस्तान में शांति और सुलह प्रक्रिया का भारत एक अहम पक्षकार है। शृंगला ने हारून के अलावा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से भी मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र सौंपा।
इसके अलावा वह अफगान चीफ एक्जीक्यूटिव अब्दुल्ला अब्दुल्ला, उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सलेह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब से भी मिले।
कतर के दोहा में शनिवार को अमेरिका और तालिबान के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं जिससे इस देश में तैनाती के करीब 18 साल बाद अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ होगा।
कतर में भारत के राजदूत पी कुमारन इस समारोह में हिस्सा लेंगे। यह पहला मौका होगा जब भारत तालिबान से जुड़े किसी मामले में आधिकारिक तौर पर शामिल होगा।
एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत ने मास्को में नवंबर 2018 में हुई अफगान शांति प्रक्रिया में गैर आधिकारिक क्षमता में दो पूर्व राजनयिकों को भेजा था।
इस सम्मेलन का आयोजन रूस ने किया था जिसमें तालिबान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, अफगानिस्तान, अमेरिका, पाकिस्तान और चीन समेत कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।
शांति समझौते से पहले भारत ने अमेरिका को यह बता दिया है कि वह पाकिस्तान पर उसकी जमीन से चल रहे आतंकी गुटों को बंद करने के लिए दबाव डालता रहे यद्यपि अफगानिस्तान में शांति के लिए उसका सहयोग महत्वपूर्ण है।
अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर से एक दिन पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला शुक्रवार को काबुल पहुंचे। उन्होंने स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास के लिए अफगानिस्तान के प्रति भारत का समर्थन जताया।
शृंगला ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री हारून चाखनसुरी से मुलाकात की और उन्हें शांति समझौते को लेकर भारत के रुख के साथ ही उसके चहुंमुखी विकास को लेकर प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि शृंगला और हारून ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। विदेश सचिव ने स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास की अफगानिस्तान के लोगों की कोशिशों में भारत का पूर्ण समर्थन जताया।
उन्होंने लिखा कि भारत अफगानिस्तान की राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखंडता, लोकतंत्र और समृद्धि में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
अफगानिस्तान में शांति और सुलह प्रक्रिया का भारत एक अहम पक्षकार है। शृंगला ने हारून के अलावा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से भी मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र सौंपा।
इसके अलावा वह अफगान चीफ एक्जीक्यूटिव अब्दुल्ला अब्दुल्ला, उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सलेह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब से भी मिले।
कतर के दोहा में शनिवार को अमेरिका और तालिबान के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं जिससे इस देश में तैनाती के करीब 18 साल बाद अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ होगा।
कतर में भारत के राजदूत पी कुमारन इस समारोह में हिस्सा लेंगे। यह पहला मौका होगा जब भारत तालिबान से जुड़े किसी मामले में आधिकारिक तौर पर शामिल होगा।
एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत ने मास्को में नवंबर 2018 में हुई अफगान शांति प्रक्रिया में गैर आधिकारिक क्षमता में दो पूर्व राजनयिकों को भेजा था।
इस सम्मेलन का आयोजन रूस ने किया था जिसमें तालिबान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, अफगानिस्तान, अमेरिका, पाकिस्तान और चीन समेत कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।
शांति समझौते से पहले भारत ने अमेरिका को यह बता दिया है कि वह पाकिस्तान पर उसकी जमीन से चल रहे आतंकी गुटों को बंद करने के लिए दबाव डालता रहे यद्यपि अफगानिस्तान में शांति के लिए उसका सहयोग महत्वपूर्ण है।
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