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उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा को नई उड़ान : UPPCPIWA ने 15 प्रतिष्ठित फार्मेसी अवार्ड्स की स्थापना की

लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...

ट्रंप ने दौरे से पहले भारत को दिया ये बड़ा झटका, निर्यात में सहूलियत की उम्मीद खत्म


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी के अपने भारत दौरे से पहले ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन सच तो यह है कि हाल में ही US प्रशासन ने भारत को ऐसा झटका दिया है जिससे हमारे निर्यात पर काफी गंभीर असर पड़ सकता है. असल में अमेरिका ने भारत को कारोबार के लिहाज से 'विकासशील देशों' की सूची से बाहर कर दिया है. आइए जानते हैं कि क्या है यह मसला और इसका भारत-अमेरिका कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है.


अमेरिका के व्यापार प्रतिनिध‍ि (USTR)ने  इस हफ्ते सोमवार को विकासशील देशों की सूची से भारत को बाहर कर दिया है. इसका मतलब यह है कि भारत अब उन खास देशों में नहीं रहेगा, जिनके निर्यात को इस जांच से छूट मिलती है क‍ि वे अनुचित सब्स‍िडी वाले निर्यात से अमेरिकी उद्योग को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे. इसे काउंटरवलिंग ड्यूटी (CVD) जांच से राहत कहा जाता है. इस सूची से ब्राजील, इंडोनेश‍िया, हांगकांग, दक्ष‍िण अफ्रीका और अर्जेंटीना को भी इस सूची से बाहर कर दिया है.


अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह लिस्ट 1998 में बन गई थी और अब अप्रासंगिक हो चुकी है.


कौन-सी उम्मीद टूटी


भारत को विकासशील देशों की सूची से बाहर करने देने से सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अमेरिका के तरजीही फायदों वाले जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) में फिर से शामिल होने की भारत की उम्मीदों पर तुषारापात हो गया है. कई तरह के फायदों वाले इस सूची में सिर्फ विकासशील देशों को रखा जाता है. यानी अमेरिका ने बड़ी चालाकी से भारत के इसमें शामिल होने के रास्ते ही बंद कर दिए हैं.


पिछले साल जब अमेरिका ने इस सूची से भारत को बाहर किया था तो भारत ने यह मजबूत तर्क दिया था कि जीएसपी के फायदे सभी विकासशील देशों को बिना किसी लेनदेन की शर्त के साथ मिलने चाहिए और इनका इस्तेमाल अमेरिका अपने व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं कर सकता.


क्या हैं अमेरिका के तर्क


अमेरिका का कहना है कि भारत अब G-20 का सदस्य बन चुका है और दुनिया के व्यापार में इसका हिस्सा 0.5 फीसदी से ज्यादा हो चुका है. यह हाल तब है कि जब भारत अमेरिका से ट्रेड डील करने और उसके तरजीही फायदों वाले जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) में फिर से शामिल होने की कोश‍िश कर रहा है.


लेकिन अब जीएसपी में शामिल होने की भारत की राह काफी कठिन हो गई है. यूएसटीआर ने कहा, 'जिन देशों का विश्व व्यापार में 0.5 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा होता है, उसे हम सीवीडी कानून के हिसाब से विकसित देश की श्रेणी में रखते हैं.'  


गौरतलब है कि साल 2018 में वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 1.67 फीसदी था. इसी तरह वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 2.57 फीसदी था.


क्या होगा असर


इससे अब अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों के निर्यात को तरह-तरह की अड़चनों से गुजरना पड़ सकता है. अगर किसी अमेरिकी इंडस्ट्री लॉबी ने यह आरोप लगा दिया कि किसी उत्पाद में भारत सरकार के सब्स‍िडी की वजह से अमेरिकी हितों को चोट पहुंच रही है, तो इसकी जांच शुरू होजाएगी और उस वस्तु का अमेरिका को भारतीय निर्यात ठप हो जाएगा.


इस निर्यात पर रोक भी लगाई जा सकती है. यह खासकर कृष‍ि उत्पादों  के लिए नुकसानदेह हो सकता है जिसमें कि उर्वरक, बिजली जैसी कई चीजों पर भारत सरकार सब्सिडी देती है.


पिछले साल किया था जीएसपी से बाहर


गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल जून में ही भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) से बाहर कर दिया था. यह अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे पुराना व्यापार तरजीह कार्यक्रम है. इसका लक्ष्य यह है कि कई देशों के हजारों उत्पादों को करमुक्त प्रवेश देकर उन देशों में आर्थ‍िक विकास को बढ़ावा दिया जाए.


अमेरिका का कहना था कि इसके बदले उसे भारत अपने बाजार में समान और वाजिब पहुंच नहीं दे रहा है. अमेरिका चाहता था कि भारत अमेरिकी कंपनियों को अपने यहां बराबरी का मौका दे.


भारत साल 2017 में GSP प्रोग्राम का सबसे बड़ा लाभार्थी था और तब अमेरिका में 5.7 अरब डॉलर के भारतीय आयात को करमुक्त रखा गया था. अब देखना यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप के 24 फरवरी को भारत दौरे पर इस बारे में कोई समझौता होता है या नहीं.


साल 2018 में अमेरिका ने जीएसपी मार्केट क्राइटेरिया के मामले में भारत के अनुपालन की समीक्षा शुरू की थी. अमेरिका ने अरोप लगाया कि भारत ने अपने यहां कई तरह के ट्रेड बैरियर लगा रखे हैं. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश से नवंबर 2018 में ही भारत के लिए 50 वस्तुओं के करमुक्त आयात की सुविधा को खत्म कर दिया गया.


क्या हुआ नुकसान


साल 2018-19 में भारत के 6.35 अरब डॉलर के निर्यात वस्तुओं को जीएसपी के तहत रखा गया था, हालांकि अमेरिका में कुल भारतीय निर्यात 51.4 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था. लेकिन जीएसपी खत्म होने से खासकर भारत के ज्वैलरी, लेदर, फार्मा, केमिकल और एग्रीकल्चर उत्पादों को बहुत मुश्किल आ रही है, क्योंकि उनकी निर्यात लागत बढ़ गई है और उन्हें कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है.


भारत का कहना है कि जीएसपी के फायदे सभी विकासशील देशों को बिना किसी लेनदेन की शर्त के साथ और इनका इस्तेमाल अमेरिका अपने व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं कर सकता.




 





 



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