लखनऊ के फैजाबाद रोड स्थित इंद्रप्रस्थ एस्टेट, 2-3 के निवासी, बगल के प्लॉट नंबर 4, फैजाबाद रोड पर एक होटल के लिए चल रहे निर्माण और गहरी खुदाई के कारण गंभीर सुरक्षा चिंताओं का सामना कर रहे हैं। निर्माण कार्य लगभग तीन साल पहले शुरू हुआ था, जिसके दौरान आसपास की जमीन को लगभग 50-60 फीट की गहराई तक खोदा गया था। निवासियों का आरोप है कि इतनी गहरी खुदाई शुरू करने से पहले बिल्डर द्वारा पर्याप्त सुरक्षा और अवरोधन उपाय नहीं किए गए थे। इंद्रप्रस्थ एस्टेट की तरफ से इसका प्रतिकूल प्रभाव बहुत जल्दी दिखना शुरू हो गया था। स्थिति उत्तरोत्तर बिगड़ती गई: सबसे पहले, समाज की सीमा दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया।फिर, रास्तों और आसपास के इलाकों में दरारें दिखाई देने लगीं और चौड़ी होने लगीं।इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं हुईं। बची हुई चारदीवारी भी अब गिरने लगी है। आस-पास की जमीन ढलान वाली है, जिससे सोसायटी के जनरेटर और बोरवेल, भूमिगत जल और सीवरेज पाइपलाइन और वर्षा जल संचयन कक्ष जैसे अन्य बुनियादी ढांचे संभावित रूप से उच्च जोखिम में हैं। पिछले तीन वर्षों में, निवासियों और अपा...
पिछले महीने दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक के बहिष्कार का सोशल मीडिया पर अभियान चलाने वाला गुट अब तापसी पन्नू की नई फिल्म थप्पड़ के खिलाफ सक्रिय हो गया है। तापसी की इस फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा पर बढ़ चढ़कर सरकार की कई मुद्दों पर मुखालिफत करते रहे हैं। लेकिन, तापसी ने दीपिका की तरह शांत रहने के बजाय सोशल मीडिया पर भी अपना मोर्चा खोल लिया है।
शुक्रवार ही को तापसी की फिल्म 'थप्पड़' सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म को लेकर ट्रोलर्स ने सोशल मीडिया पर तापसी पन्नू को घेरने की कोशिश की, लेकिन तापसी ने ट्रोलर्स को शानदार जवाब देकर उनकी बोलती बंद कर दी। ट्रोलर्स के लिए तापसी ने लिखा, 'हम बहुत खुश हैं कि हमने सोशल मीडिया पर बैठे बेरोजगारों को काम पर लगा दिया। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगी, क्योंकि मैं ऐसे नाकारों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहती।'
तापसी ने मुंबई में सीएए और एनआरसी के विरोध में चल रही एक बैठक में भाग लिया था, जिसके बाद इन दोनों बिलों के समर्थकों ने उस समय तापसी को राष्ट्र विरोधी कहना शुरू कर दिया था। ऐसी ही घटना दीपिका पादुकोण के साथ भी हुई थी, जब उन्होंने अपनी फिल्म 'छपाक' के रिलीज होने से पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था। दीपिका के इस कदम का सीधा असर उनकी फिल्म के प्रदर्शन पर हुआ था।
तापसी की इस फिल्म का मकसद घरेलू हिंसा के बारे में लोगों को सचेत कराना है। इस पर तापसी कहती हैं, 'थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब प्यार से लगता है' वाले कल्चर को अब बदलने की जरूरत है। आशा है कि 'थप्पड़' इसको बदलने में कामयाब रहेगी।'
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