दुनिया में शहरीकरण तेजी से होता जा रहा है। दुनिया भर में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी अब शहरों में रह रही हैं। भविष्य में यह अनुपात बढ़कर 70 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
भारत के शहरी क्षेत्रों में वर्तमान में 31 प्रतिशत से अधिक आबादी निवास कर रही हैं और वर्ष 2030 तक इसकी संख्या 40 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में पलायन करने वाले लोगों की आकांक्षाएं हैं कि वे अपने जीवन स्तर की गुणवत्ता में सुधार कर सकें। इसमें जीवन और आजीविका के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ भौतिक, सामाजिक, संस्थागत और आर्थिक बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
शहरों के लिए ‘‘ईज ऑफ लिविंग’’ सूचकांक पर पहला फ्रेमवर्क जून 2017 में लॉन्च किया गया था। आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2018 में ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स विकसित किया गया जिसे से व्यापक मूल्यांकन फ्रेमवर्क 2019 लॉन्च करके अगले स्तर पर ले जाया गया है।
सूचकांक का उद्देश्य शहरों में रहने वाले नागरिको के जीवन संबंधी तीन स्तंभों अर्थात जीवन स्तर, आर्थिक स्थिति व स्थिरता के आधार पर आंकलन करना है। सूचकांक के अंतर्गत सर्वेक्षण में 14 श्रेणियां और 50 इंडिकेटर हैं। यह श्रेणियां है, 1. शिक्षा 2. स्वास्थ्य 3. आवास और आश्रय 4. वॉश और साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट 5. मोबिलिटी 6. सुरक्षा और संरक्षा 7. मनोरंजन 8. आर्थिक विकास, 9. आर्थिक अवसर 10. ळपदप (गिनी) गुणांक 11. पर्यावरण 12. रिक्त स्थान और भवन 13. ऊर्जा की खपत 14. शहर का लचीलापन।
उक्त सूचकांक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अपने प्रयासों के आधार पर शहरों के प्रदर्शन का आकलन करेगा। जिससे बुनियादी ढांचे का निर्माण में सहायता मिलेगी और नागरिकों के लिए जीवन स्तर में सुधार मे सहायक होगा। लिविंग इंडेक्स 2019 में उपरोक्त उद्देश्यों के मूल्यांकन के अपने स्तंभों को संरेखित करके और उन्हें भारतीय शहरों के समग्र विकास के लक्ष्य के लिए व्यापक बनाया गया है। इन परिणामों के मूल्यांकन स्तंभो से ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2019 बनता है। यह शहर के प्रशासन को वर्तमान इनपुट आधारित दृष्टिकोण से परिणाम-आधारित नियोजन की ओर बढ़ने में मदद करेगा।
यह रूपरेखा उन साधनों पर भी चर्चा करती है, जिनके माध्यम से डेटा को एकत्रित किया जाएगा, वैध किया जाएगा और रिफाइन किया जाएगा और विभिन्न संकेतकों के लिए स्कोरिंग की विधि में लाया जाएगा।
यह आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की एक परिवर्तनकारी पहल है जो शहरों को उनके जीवन-यापन के राष्ट्रीय और वैश्विक मानदंड में आसानी का आकलन करने में मदद करता है और दृढ़ता से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक शहर अब अपनी ताकत, कमजोरियों, अवसरों और खतरो का 360 डिग्री का आकलन करने में सक्षम होगा।
ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में सिटीजन पार्टीसिपेशन का वेटेज 30ः है। लखनऊ स्मार्ट सिटी नागरिकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए एक सर्वेक्षण भी किया जा रहा हैः-
नागरिकों द्वारा प्रतिक्रिया साझा करने में शामिल कदम इस प्रकार हैंः-
1. क्यूआर कोड को स्कैन करें जो सीधे सिटीजन पार्टीसिपेशन सर्वे लिंक पर जाएगा।
2. वैकल्पिक रूप से, प्रतिक्रिया को यू.आर.एल. टाइप करके साझा किया जा सकता है। Eol2019.org/citizenfeedback
3. फीडबैक भरें और सबमिट करें।
यूपी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में निजी आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष 6 प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 15 मई, शुक्रवार सुबह 10 बजे प्रदेश भर के प्रशिक्षक, प्रबंधक और छात्र निदेशालय पर एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि कौशल विकास में निजी ITI की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन मौजूदा नीतियों से संस्थानों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
*प्रमुख मांगें:*
1. *फीस वृद्धि तत्काल लागू हो:* हरियाणा मॉडल के अनुरूप इसी सत्र से फीस बढ़ाई जाए। बढ़ती संचालन लागत, वेतन और रखरखाव के कारण पुरानी फीस पर संचालन कठिन है।
2. *निम्स पोर्टल पर नोडल वेरिफिकेशन खत्म हो:* पैन, आधार, OTP आधारित e-KYC के बाद अतिरिक्त नोडल वेरिफिकेशन अनावश्यक और शोषणकारी है।
3. *थर्ड शिफ्ट बहाल हो:* दिन में नौकरी करने वाले हजारों छात्रों को शाम की शिफ्ट न होने से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा।
4. *PMKVY 5.0 में भागीदारी मिले:* निजी संस्थानों के पास संसाधन और अनुभवी स्टाफ होने के बावजूद योजनाओं में भागी...
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