होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
चीन के वुहान से फैले कोरोनावायरस के कहर से बचने के लिए पुणे की एक कंपनी ने प्रिवेंशन वैक्सीन बनाई है, जो आने वाले समय में कोरोनावायरस का तोड़ हो सकती है। पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने अपने साझीदार कंपनी अमेरिकन बायोटेक्नोलॉजी फर्म कोडाजेनिक्स की मदद से इसे बनाया है। फिलहाल, यह वैक्सीन क्लीनिकल टेस्ट के लिए तैयार है। करीब छह महीने बाद इसका ह्यूमन ट्रायल किया जाएगा।
एसआईआई के मालिक व सीईओ अदल पूनावाला के अनुसार इस वैक्सीन-वायरस का स्ट्रेन मूल कोरोना वायरस के ही समान है। यह एक मजबूत इम्यून रिस्पांस जनरेट करता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के इलाज के लिए विकसित की गई यह वैक्सीन वायरस को रोकने के लिए सुरक्षा कवच बनाने में अपेक्षाकृत कम समय लेती है। पूनावाला ने कहा है कि यह वैक्सीन अगले छह महीने में ह्यूमन ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी।
एसआईआई के मालिक व सीईओ अदल पूनावाला के अनुसार इस वैक्सीन-वायरस का स्ट्रेन मूल कोरोना वायरस के ही समान है। यह एक मजबूत इम्यून रिस्पांस जनरेट करता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के इलाज के लिए विकसित की गई यह वैक्सीन वायरस को रोकने के लिए सुरक्षा कवच बनाने में अपेक्षाकृत कम समय लेती है। पूनावाला ने कहा है कि यह वैक्सीन अगले छह महीने में ह्यूमन ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी।
2022 तक हो सकेगा वैक्सीन का इस्तेमाल
पूनावाला के अनुसार ह्यूमन ट्रायल और वैक्सीन की स्टडी में अभी एक साल लगेगा। इसके बाद इसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद वैक्सीन का इस्तेमाल कोरोना वायरस के तोड़ के तौर पर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन का विकास समकालीन दुनिया में महामारी का जवाब देने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।
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