लखनऊ, देश के दिग्गज नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म भूषण स्व. रामविलास पासवान जी की आज 6वीं पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजक स्वयं उनके पुत्र और केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान थे। सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य रूप से शामिल हुए और स्व. पासवान के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर चिराग पासवान ने भावुक होते हुए सोशल मीडिया पर आभार जताया। चिराग ने एक्स पर लिखा - *"योगी जी ने अपना बहुमूल्य समय निकालकर पापा को श्रद्धांजलि दी। उनका खुद आकर श्रद्धांजलि देना मेरे और मेरे परिवार के लिए सम्मान का क्षण है। इससे साफ है कि पापा और योगी जी का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्नेह और आत्मीयता का था।"* स्व. रामविलास पासवान को दलितों-पिछड़ों की आवाज माना जाता था और उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर के सपनों को पूरा करने में लगा दिय...
पंजाब कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे और लंबे समय से राजनीतिक बयानबाजी से दूर नवजोत सिंह सिद्धू फिर अपनी उपयोगिता साबित करना चाहते हैं। सिद्धू के इस काम में फिर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अहम भूमिका निभा रही हैं और उनकी पैरोकार बनी हैं। पंजाब में वरिष्ठ नेताओं के इनकार के बाद प्रियंका ने उनके कांग्रेस में आने का रास्ता साफ किया था।
सिद्धू को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से समय दिलाने और मिलवाने में भी प्रियंका ही सूत्रधार हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से सीधे टकराव और मंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धू पंजाब कांग्रेस में खुद को साबित करना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि सिद्धू संगठन के काम में भी भूमिका निभाने को तैयार हैं।
जबकि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने को तैयार है। पहले भी कैप्टन से खींचतान के बाद सिद्धू को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में जोड़ने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। उम्मीद है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने जा रहे फेरबदल में सिद्धू अहम भूमिका में दिखाई दें।
जबकि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने को तैयार है। पहले भी कैप्टन से खींचतान के बाद सिद्धू को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में जोड़ने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। उम्मीद है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने जा रहे फेरबदल में सिद्धू अहम भूमिका में दिखाई दें।
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