लखनऊ, उत्तर प्रदेश फार्मेसी कॉलेजेज एण्ड फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (UPPCPIWA) की कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज दिनांक 24 अगस्त, 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय अतिथि गृह, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन प्रो. अमरिका सिंह ने की तथा संचालन महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और फार्मासिस्टों के कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए 15 प्रतिष्ठित वार्षिक अवार्ड्स स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह अवार्ड्स फार्मेसी के जनक प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित विभिन्न श्रेणियों में दिए जाएंगे। एसोसिएशन के महामंत्री प्रो. दुर्गेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 2700 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 1900 से अधिक फार्मा इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में फार्मेसी प्रोफेशनल्स के मनोबल और उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए इन अवार्ड्स की स्थापना की गई है। सभी अवार्ड्स को अनुमोदन हेतु फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नई दिल्ली को भेजा...
सोशल मीडिया और सर्च इंजन कंपनियों पर तो कई देशों में कुछ कारणों से प्रतिबंध लगते रहते हैं, लेकिन पाकिस्तान में फेसबुक, गूगल, ट्विटर जैसी कंपनियों पर सेंसरशिप पाकिस्तान को अब भारी पड़ने वाला है, क्योंकि पाकिस्तान के डिजिटल सेंसरशिप कानून को लेकर इन कंपनियों ने पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी दी है।
फेसबुक, ट्विटर और गूगल समेत कई कंपनियों के ग्रुप एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि पाकिस्तान अपने डिजिटल सेंसरशिप कानून में बदलाव नहीं करता है तो इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपनी सेवाएं मजबूरन बंद करनी होगी। सोशल मीडिया कंपनियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाते समय किसी एक्सपर्ट की राय नहीं ली।
फेसबुक, ट्विटर और गूगल समेत कई कंपनियों के ग्रुप एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि पाकिस्तान अपने डिजिटल सेंसरशिप कानून में बदलाव नहीं करता है तो इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपनी सेवाएं मजबूरन बंद करनी होगी। सोशल मीडिया कंपनियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाते समय किसी एक्सपर्ट की राय नहीं ली।
पाकिस्तान के डिजिटल सेंसरशिप कानून में क्या है?
दरअसल पाकिस्तान में जो डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाया गया है उसमें आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कोई पैमाना तय नहीं किया गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी कंटेंट को आपत्तिजन मान सकता है और उसे हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों से अपील कर सकता है। अपील के 24 घंटों के अंदर इन कंपनियों को कंटेंट को हटाना होगा, वहीं इमरजेंसी में यह सीमा 6 घंटे की होगी। इस सेंसरशिप के तहत सब्सक्राइबर, ट्रैफिक, कंटेंट और अकाउंट से जुड़ी जानकारी खुफिया एजेंसियों के साथ साझा करने का भी प्रावधान है।
50 करोड़ रुपये जुर्माना का है प्रावधान
नए कानून के मुताबिक इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपना स्थायी ऑफिस खोलना होगा। इसके अलावा लोकस सर्वर भी बनाना होगा। साथ ही पाकिस्तान से बाहर रह रहे पाकिस्तानी लोगों के अकाउंट पर नजर रखनी होगी। कानून को तोड़ने पर 50 करोड़ रुपये के जुर्माना का प्रावधान है। कंपनियों ने अपने पत्र में लिखा है कि पाकिस्तान का डिजिटल सेंसरशिप कानून 7 करोड़ इंटरनेट यूजर्स की निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का का उल्लंघन है। यदि इस कानून में बदलाव नहीं हुए तो पाकिस्तान छोड़ना पड़ेगा।
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