होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
सोशल मीडिया और सर्च इंजन कंपनियों पर तो कई देशों में कुछ कारणों से प्रतिबंध लगते रहते हैं, लेकिन पाकिस्तान में फेसबुक, गूगल, ट्विटर जैसी कंपनियों पर सेंसरशिप पाकिस्तान को अब भारी पड़ने वाला है, क्योंकि पाकिस्तान के डिजिटल सेंसरशिप कानून को लेकर इन कंपनियों ने पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी दी है।
फेसबुक, ट्विटर और गूगल समेत कई कंपनियों के ग्रुप एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि पाकिस्तान अपने डिजिटल सेंसरशिप कानून में बदलाव नहीं करता है तो इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपनी सेवाएं मजबूरन बंद करनी होगी। सोशल मीडिया कंपनियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाते समय किसी एक्सपर्ट की राय नहीं ली।
फेसबुक, ट्विटर और गूगल समेत कई कंपनियों के ग्रुप एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि पाकिस्तान अपने डिजिटल सेंसरशिप कानून में बदलाव नहीं करता है तो इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपनी सेवाएं मजबूरन बंद करनी होगी। सोशल मीडिया कंपनियों का आरोप है कि पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाते समय किसी एक्सपर्ट की राय नहीं ली।
पाकिस्तान के डिजिटल सेंसरशिप कानून में क्या है?
दरअसल पाकिस्तान में जो डिजिटल सेंसरशिप कानून बनाया गया है उसमें आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर कोई पैमाना तय नहीं किया गया है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी कंटेंट को आपत्तिजन मान सकता है और उसे हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों से अपील कर सकता है। अपील के 24 घंटों के अंदर इन कंपनियों को कंटेंट को हटाना होगा, वहीं इमरजेंसी में यह सीमा 6 घंटे की होगी। इस सेंसरशिप के तहत सब्सक्राइबर, ट्रैफिक, कंटेंट और अकाउंट से जुड़ी जानकारी खुफिया एजेंसियों के साथ साझा करने का भी प्रावधान है।
50 करोड़ रुपये जुर्माना का है प्रावधान
नए कानून के मुताबिक इन कंपनियों को पाकिस्तान में अपना स्थायी ऑफिस खोलना होगा। इसके अलावा लोकस सर्वर भी बनाना होगा। साथ ही पाकिस्तान से बाहर रह रहे पाकिस्तानी लोगों के अकाउंट पर नजर रखनी होगी। कानून को तोड़ने पर 50 करोड़ रुपये के जुर्माना का प्रावधान है। कंपनियों ने अपने पत्र में लिखा है कि पाकिस्तान का डिजिटल सेंसरशिप कानून 7 करोड़ इंटरनेट यूजर्स की निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का का उल्लंघन है। यदि इस कानून में बदलाव नहीं हुए तो पाकिस्तान छोड़ना पड़ेगा।
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