बलरामपुर।जिले के तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के पति *पवन कुमार मिश्रा* ने अस्पताल के *डॉ. आलोक सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी 6 माह की गर्भवती थी, तबीयत खराब होने पर उसे तुलसीपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है और ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकालना पड़ेगा। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए प्रसूता की *बड़ी आंत काट दी* और मृत बच्चे को गर्भ में ही छोड़ दिया, जिससे प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। जब पवन कुमार मिश्रा अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में ही मृत बच्चे की डिलीवरी हो गई। बाद में पत्नी को गोंडा और फिर लखनऊ रेफर किया गया। वह अभी जीवित है लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। पवन मिश्रा ने डॉक्टर पर धमकी देने और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाते हुए FIR की मांग की है। *पीड़ित के साथ खड़े हुए हनुमान प्रसाद -* इस मामले में अब *किसान मजदूर संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान प्रसाद* पीड़ित पति पवन कुमार मिश्रा को न...
दक्षिण कोरियाई फिल्म पैरासाइट ने 2020 के ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीत कर इतिहास रच दिया है। ऑस्कर के 92 साल पुरने इतिहास में ये पहली बार है जब विदेशी भाषा की एक फिल्म (एशियाई फिल्म) को बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है।
निर्माता क्वाक सिन आए और निर्देशक बोंग जून-हो की इस फिल्म को कुल छह पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया था। इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म के साथ-साथ, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और ओरिजिनल स्क्रीनप्ले का ऑस्कर भी मिला है।
इस फिल्म का प्रीमियर 2019 के कान फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था। ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के लिए ये फिल्म बाफ्टा में भी पुरस्कार जीत चुकी है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई इन ने जून-हो और फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि "मुश्किल परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों के संघर्ष की कहानी दिखने के लिए आपका शुक्रिया।"
बताया जा रहा है कि पैरासाइट एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें बोंग जून-हो ने सामाजिक असमानता, पूंजीवाद और मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों के बीच के संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है।
निर्माता क्वाक सिन आए और निर्देशक बोंग जून-हो की इस फिल्म को कुल छह पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया था। इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म के साथ-साथ, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और ओरिजिनल स्क्रीनप्ले का ऑस्कर भी मिला है।
इस फिल्म का प्रीमियर 2019 के कान फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था। ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के लिए ये फिल्म बाफ्टा में भी पुरस्कार जीत चुकी है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई इन ने जून-हो और फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि "मुश्किल परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों के संघर्ष की कहानी दिखने के लिए आपका शुक्रिया।"
बताया जा रहा है कि पैरासाइट एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें बोंग जून-हो ने सामाजिक असमानता, पूंजीवाद और मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों के बीच के संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है।
पैरासाइट फिल्म की कहानी
पैरासाइट की कहानी दो परिवारों के बीच के रिश्तों की कहानी है जहां एक संपन्न परिवार दूसरे परिवार की सेवाओं पर निर्भर है। तो दूसरा परिवार अपना पेट भरने के लिए पहले परिवार की संपत्ति पर निर्भर है।
किम परिवार एक मकान के बेसमेंट में रहता है और इस परिवार को लगता है कि वो पार्क परिवार के लिए काम कर आराम की जिंदगी बसर कर सकते हैं। किम परिवार के मुखिया हैं की-ताएक और उनका परिवार छोटे मोटे काम कर गुजर बसर करता है। परिवार के बेटे की-वू का मित्र एक दिन उसे बताता है कि वो एक धनी परिवार (पार्क परिवार) की बेटी को ट्यूशन देता था लेकिन उसे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना है।
वो कहता है कि वो चाहता है की-वू उसे ट्यूशन देना शुरु करे। मुश्किल से जीवन गुजारने वाला की-वू कॉलेज तक पास नहीं कर सका, लेकिन वो इसके लिए तैयार हो जाता है और फर्जी डिग्री तक बनवा लेता है।
पार्क परिवार से मुलाकात के बाद की-वू को पता चल जाता है कि उसे अच्छी जिंदगी के लिए इस परिवार से जुड़े रहना होगा। जब पार्क परिवार को अपने बेटे के लिए एक आर्ट टीचर की जरूरत होती है, तो वो इसके लिए अपनी बहन का नाम सुझाता है। अपनी बहन के लिए भी वो फर्जी डिग्री बनवाता है।
आराम की जिंदगी बसर करने के लिए ये दोनों मिल कर किसी न किसी तरह पार्क परिवार के सभी नौकरों की छुट्टी करवाते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को वहां काम दिलवाते हैं।
पार्क परिवार के लिए सालों से काम कर रही मून क्वांग नौकरी से निकाले जाने के बाद एक दिन अचानक अपना सामान लेने लौटती है। उसने अपने पति कोमकान को बेसमेंट में सालों से छिपा कर रखा था। ये बात किम परिवार के सदस्यों को पता चलती है।
लेकिन इस दौरान मून क्वांग को पता चलता है कि पार्क परिवार में अलग-अलग नाम से काम करने आए सभी लोग किम परिवार के सदस्य हैं। वो उन्हें ब्लैकमेल करती है और कहती है कि वो उन्हें वहीं बेसमेंट में रहने दें।
आगे की कहानी खुद को जिंदा रखने की कोशिश में अपने झूठ को बनाए रखने और परिवार के सदस्यों की जान बचाने की है, जिसमें पूरा किम परिवार बिखर जाता है।
किम परिवार एक मकान के बेसमेंट में रहता है और इस परिवार को लगता है कि वो पार्क परिवार के लिए काम कर आराम की जिंदगी बसर कर सकते हैं। किम परिवार के मुखिया हैं की-ताएक और उनका परिवार छोटे मोटे काम कर गुजर बसर करता है। परिवार के बेटे की-वू का मित्र एक दिन उसे बताता है कि वो एक धनी परिवार (पार्क परिवार) की बेटी को ट्यूशन देता था लेकिन उसे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना है।
वो कहता है कि वो चाहता है की-वू उसे ट्यूशन देना शुरु करे। मुश्किल से जीवन गुजारने वाला की-वू कॉलेज तक पास नहीं कर सका, लेकिन वो इसके लिए तैयार हो जाता है और फर्जी डिग्री तक बनवा लेता है।
पार्क परिवार से मुलाकात के बाद की-वू को पता चल जाता है कि उसे अच्छी जिंदगी के लिए इस परिवार से जुड़े रहना होगा। जब पार्क परिवार को अपने बेटे के लिए एक आर्ट टीचर की जरूरत होती है, तो वो इसके लिए अपनी बहन का नाम सुझाता है। अपनी बहन के लिए भी वो फर्जी डिग्री बनवाता है।
आराम की जिंदगी बसर करने के लिए ये दोनों मिल कर किसी न किसी तरह पार्क परिवार के सभी नौकरों की छुट्टी करवाते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को वहां काम दिलवाते हैं।
पार्क परिवार के लिए सालों से काम कर रही मून क्वांग नौकरी से निकाले जाने के बाद एक दिन अचानक अपना सामान लेने लौटती है। उसने अपने पति कोमकान को बेसमेंट में सालों से छिपा कर रखा था। ये बात किम परिवार के सदस्यों को पता चलती है।
लेकिन इस दौरान मून क्वांग को पता चलता है कि पार्क परिवार में अलग-अलग नाम से काम करने आए सभी लोग किम परिवार के सदस्य हैं। वो उन्हें ब्लैकमेल करती है और कहती है कि वो उन्हें वहीं बेसमेंट में रहने दें।
आगे की कहानी खुद को जिंदा रखने की कोशिश में अपने झूठ को बनाए रखने और परिवार के सदस्यों की जान बचाने की है, जिसमें पूरा किम परिवार बिखर जाता है।
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