होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
बीते कुछ महीने से देश में नागरिकता को लेकर जगह-जगह बवाल और बहस देखने को मिल रही है। संसद में नागरिकता संबंधी कानून में संशोधन भी किया गया ताकि दूसरे देशों से आने वाले किन लोगों को नागरिकता देनी है और किन्हें नहीं, यह सुनिश्चित किया जा सके।
हालांकि इस दुनिया में ऐसे भी कई देश हैं, जहां नागरिकता को लेकर किचकिच बिल्कुल नहीं है बल्कि उन्होंने तो इसे पैसा कमाने का एक अच्छा साधन बना लिया है। कुछ वर्षों पहले किसी भी देश के लिए दोहरी नागरिकता की अनुमति देना बेहद असमान्य माना जाता था। मगर यह अब लगभग सार्वभौमिक हो चुका है। इसलिए बहुत से लोग पैसे देकर दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं।
हालांकि इस दुनिया में ऐसे भी कई देश हैं, जहां नागरिकता को लेकर किचकिच बिल्कुल नहीं है बल्कि उन्होंने तो इसे पैसा कमाने का एक अच्छा साधन बना लिया है। कुछ वर्षों पहले किसी भी देश के लिए दोहरी नागरिकता की अनुमति देना बेहद असमान्य माना जाता था। मगर यह अब लगभग सार्वभौमिक हो चुका है। इसलिए बहुत से लोग पैसे देकर दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं।
दुनिया के बहुत से देशों में अब नागरिकता के माध्यम से निवेश कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्तमान समय में यह लगभग एक लाख 75 हजार करोड़ रुपये का वैश्विक उद्योग बन चुका है। इस काम को आसान बनाने के लिए बाकायदा कई कंपनियां भी गठित हो चुकी हैं।
ऐसी ही एक कंपनी है, हेनले एंड पार्टनर्स। इस कंपनी के अध्यक्ष क्रिश्चियन कॉलिन ने बताया कि उनका काम धनी व्यक्तियों और उनके परिवारों को अन्य देशों में निवास या नागरिकता प्राप्त करने में मदद करता है।
नागरिकता देकर बढ़ाई देश की जनसंख्या
कॉलिन के मुताबिक चार साल पहले प्रशांत महासागर के एक छोटे से द्विपीय देश वनातू ने नई नागरिकता योजना की शुरुआत की, जिसके बाद इस देश का पासपोर्ट लेने वालों की संख्या में तेजी देखने को मिली।
कॉलिन ने बताया वनातू के पासपोर्ट धारकों को यह फायदा मिलता है कि वह लगभग पूरे यूरोपीय देशो में वीजा फ्री आवागमन कर सकते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में लोग वनातू के पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट से होने वाली कमाई से वनातू सरकार को बड़ा फायदा मिल रहा है
देश | कितने में खरीद सकते हैं नागरिकता (रुपये लगभग में) |
| एंटीगा एंड बारबुडा | 70 लाख रुपये |
| सेंट किट्स नेविस | एक करोड़ रुपये |
| मोंटेनेग्रो | दो करोड़ रुपये |
| पुर्तगाल | दो करोड़ 50 लाख रुपये |
| स्पेन | चार करोड़ रुपये |
| बुल्गारिया | चार करोड़ रुपये |
| माल्टा | सात करोड़ रुपये |
| अमेरिका | छह करोड़ 50 लाख रुपये (निवेश के रूप में, जिससे 10 लोगों को रोजगार मिले) |
| यूनाइटेड किंगडग | 18 करोड़ रुपये |
| न्यूजीलैंड | 14 करोड़ रुपये |
| साइप्रस | 12 करोड़ 50 लाख रुपये |
| ऑस्ट्रेलिया | सात करोड़ 50 लाख रुपये |
| तुर्की | सात करोड़ रुपये |
| कनाडा | पांच करोड़ 50 लाख रुपये |
| ग्रीस | दो करोड़ रुपये |
| वनातू | एक करोड़ रुपये |
| डोमिनिका | 70 लाख रुपये |
| सेंट लूसिया | 70 लाख रुपये |
| लताविया | 52 लाख रुपये |
| थाईलैंड | 10 लाख रुपये |
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