होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
मध्य प्रदेश में एक डॉक्टर हैं जो आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काम करती हैं। जिसकी वजह से उन्हें मदर टेरेसा के नाम से जाना जाता है। ये महान हस्ती है डॉक्टर लीला जोशी। जिन्हें 26 जनवरी को सरकार ने पद्म श्री अवार्ड देने के लिए चुना है। स्त्री रोग विशेषज्ञ लीला जोशी ने मध्य प्रदेश की आदिवासी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए उल्लेखनीय काम किया है। तो चलिए जानें डॉ. लीला जोशी के बारे में।
डॉक्टर लीला जोशी ने अपने करियर के शुरूआती दिनों में असम में काम किया था। वहां पर लीला एक डॉक्टर के रूप में कार्यरत थीं। वहीं पर उनकी मुलाकात मदर टेरेसा से हुई और उन्होंने डॉ. लीला से आदिवासियों के लिए कुछ करने को कहा था। डॉ. जोशी को मदर टेरेसा की ये बात बहुत भली लगी और असम से रिटायर होने के बाद मध्य प्रदेश आकर आदिवासी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काम करने लगीं।
डॉक्टर लीला आदिवासी अंचलों में जाकर वहां की महिलाओं का निशुल्क इलाज करती हैं। आदिवासी महिलाओं में ज्यादातर समस्या एनीमिया की होती है। खानपान की कमी और कुपोषण के कारण आदिवासी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान खून की कमी की शिकार हो जाती हैं। डॉक्टर जोशी इन महिलाओं का इलाज करती हैं।
डॉक्टर लीला जोशी का नाम देश की महिला और बाल विकास विभाग द्वारा जारी सूची में देश की सौ सबसे प्रभावी महिलाओं में शामिल किया गया है। साल 1997 में रेलवे की मेडिकल डायरेक्टर से रिटायर लीला ने मध्य प्रदेश में आदिवासी महिलाओं को मुफ्त में इलाज देना शुरू किया। डॉ. जोशी पिछले 22 सालों से इस कार्य में लगी हुईं है और 82 साल की उम्र में भी उनके जोश में कोई कमी नहीं आई है।
डॉक्टर लीला जोशी का नाम देश की महिला और बाल विकास विभाग द्वारा जारी सूची में देश की सौ सबसे प्रभावी महिलाओं में शामिल किया गया है। साल 1997 में रेलवे की मेडिकल डायरेक्टर से रिटायर लीला ने मध्य प्रदेश में आदिवासी महिलाओं को मुफ्त में इलाज देना शुरू किया। डॉ. जोशी पिछले 22 सालों से इस कार्य में लगी हुईं है और 82 साल की उम्र में भी उनके जोश में कोई कमी नहीं आई है।
Comments
Post a Comment