होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
चीन में फैले कोरोना वायरस ने सूबे के फार्मा उद्योग को अपनी चपेट में ले लिया है। वायरस के प्रकोप के बाद से चीन से दवाओं के कच्चे माल की सप्लाई बंद हो गई है। अब देश की 45 फीसदी दवाओं का निर्माण करने वाले फार्मा हब बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) में 20 फीसदी कच्चे माल का स्टॉक खत्म हो गया है। दवा निर्माता आशंका जता रहे हैं कि अगर एक सप्ताह बाद भी चीन से कच्चा माल नहीं आया तो उत्पादन पर संकट आ सकता है। कई उद्योगों में उत्पादन ठप पड़ जाएगा।
इन दिनों उद्योग अपने पास स्टॉक कच्चे माल से ही काम चला रहे हैं। आने वाले समय में बीपी, शुगर, हार्ट, कैंसर समेत जीवनरक्षक दवाओं की बाजार में किल्लत हो सकती है। सूबे में करीब 750 फार्मा उद्योग हैं। यहां सालाना 30 हजार करोड़ का कारोबार होता है, जिसमें 15 हजार करोड़ की दवाओं का निर्यात किया जाता है। देश में दवा कंपनियों सहित बल्क ड्रग डीलरों के पास एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेटिएंट (एपीआई) का नाममात्र स्टॉक बचा हुआ है। मौजूदा समय में चीन से 67 तरह के एपीआई की आपूर्ति होती है।
इन दिनों उद्योग अपने पास स्टॉक कच्चे माल से ही काम चला रहे हैं। आने वाले समय में बीपी, शुगर, हार्ट, कैंसर समेत जीवनरक्षक दवाओं की बाजार में किल्लत हो सकती है। सूबे में करीब 750 फार्मा उद्योग हैं। यहां सालाना 30 हजार करोड़ का कारोबार होता है, जिसमें 15 हजार करोड़ की दवाओं का निर्यात किया जाता है। देश में दवा कंपनियों सहित बल्क ड्रग डीलरों के पास एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेटिएंट (एपीआई) का नाममात्र स्टॉक बचा हुआ है। मौजूदा समय में चीन से 67 तरह के एपीआई की आपूर्ति होती है।
अब यूरोप विकल्प, महंगे कच्चे माल से बढ़ सकते हैं दाम
चीन के हालात में सुधार नहीं हुआ तो मजबूरन उद्योगों को यूरोप से कच्चा माल मंगवाना पड़ेगा। यूरोप से आना वाला कच्चा माल मंहगा होता है, जिससे यहां निर्मित होने वाली दवाओं के दामों में भी बढ़ोतरी होगी। सीआईआई हिमाचल चैप्टर के चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने कहा कि फार्मा उद्योगों पर असर पड़ना शुरू हो गया है।
चीन से आपूर्ति न होने से फार्मा उद्योगों को संकट से जूझना पड़ेगा। यूरोप से कच्चा माल आयात किया तो दवाओं के दामों में भी वृद्धि होगी। 20 फीसदी स्टॉक कम हो गया है जो प्रतिदिन बढ़ता ही जाएगा। हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष डा. राजेश गुप्ता ने केंद्र के समक्ष बल्क ड्रग एपीआई की आपूर्ति के ज्वलंत मुद्दे को उठाया है।
चीन से आपूर्ति न होने से फार्मा उद्योगों को संकट से जूझना पड़ेगा। यूरोप से कच्चा माल आयात किया तो दवाओं के दामों में भी वृद्धि होगी। 20 फीसदी स्टॉक कम हो गया है जो प्रतिदिन बढ़ता ही जाएगा। हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष डा. राजेश गुप्ता ने केंद्र के समक्ष बल्क ड्रग एपीआई की आपूर्ति के ज्वलंत मुद्दे को उठाया है।
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