होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
आज से अमेरिका एक नया नियम लागू करने जा रहा है। इस नियम से उन कानूनी आव्रजकों को ग्रीन कार्ड या कानूनी रूप से स्थायी निवास की अनुमति नहीं दी जाएगी जिन्होंने फूड स्टैम्प्स जैसी जन योजनाओं का फायदा उठाया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक पहले अमेरिका सोमवार से आव्रजन को लेकर नया नियम लागू करने जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में भारतीय एच-1बी वीजा धारकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, जो अमेरिका में स्थायी कानूनी निवास का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
नए नियम के तहत उन कानूनी आव्रजकों को ग्रीन कार्ड या कानूनी रूप से स्थायी निवास की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन्होंने फूड स्टाम्स जैसी वित्तीय फायदे वाली योजनाओं का फायदा उठाया है। इस कदम से भारतीय नागरिकों की एक बड़ी संख्या प्रभावित हो सकती है, जिनके पास एच-1बी वीजा हैं और जो काफी समय से स्थायी कानूनी निवास की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रीशम ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होमलैंड सुरक्षा विभाग सोमवार को अपना कानून लागू कर पाएगा। इस फैसले से अमेरिकी करदाताओं को सुरक्षा मिलेगी। वास्तव में जरूरतमंद अमेरिकी लोगों के लिए कल्याण योजनाएं सुरक्षित होंगी, संघीय घाटा कम होगा। यह मौलिक कानूनी सिद्धांत दोबारा स्थापित होगा कि हमारे समाज में आने वाले नए लोग वित्तीय रूप से आत्म निर्भर हों और अमेरिका के करदाताओं पर बोझ न बनें।’
नए नियम के तहत उन कानूनी आव्रजकों को ग्रीन कार्ड या कानूनी रूप से स्थायी निवास की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिन्होंने फूड स्टाम्स जैसी वित्तीय फायदे वाली योजनाओं का फायदा उठाया है। इस कदम से भारतीय नागरिकों की एक बड़ी संख्या प्रभावित हो सकती है, जिनके पास एच-1बी वीजा हैं और जो काफी समय से स्थायी कानूनी निवास की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रीशम ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होमलैंड सुरक्षा विभाग सोमवार को अपना कानून लागू कर पाएगा। इस फैसले से अमेरिकी करदाताओं को सुरक्षा मिलेगी। वास्तव में जरूरतमंद अमेरिकी लोगों के लिए कल्याण योजनाएं सुरक्षित होंगी, संघीय घाटा कम होगा। यह मौलिक कानूनी सिद्धांत दोबारा स्थापित होगा कि हमारे समाज में आने वाले नए लोग वित्तीय रूप से आत्म निर्भर हों और अमेरिका के करदाताओं पर बोझ न बनें।’
11 प्रतिशत भारतीयों ने उठाया है लाभ
अमेरिकी नागरिकता व आव्रजन सेवा के अनुसार, नए कानून में स्थायी निवास की अनुमति मांग रहे व्यक्ति को यह दिखाना होगा कि उसने गैर प्रवासी दर्जा हासिल करने के बाद से वित्तीय फायदे वाली योजनाओं का लाभ नहीं उठाया। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट रिपोर्ट, 2018 के अनुसार 61 प्रतिशत गैर नागरिक बांग्लादेशी परिवारों, 48 प्रतिशत गैर-नागरिक पाकिस्तानी और 11 प्रतिशत गैर नागरिक भारतीय परिवारों ने जन लाभ हासिल किए, जिनकी नए कानून के अनुसार जांच की जाएगी
होमलैंड सुरक्षा विभाग करेगा पहचान
14 अगस्त, 2019 को प्रकाशित अंतिम नियम को 15 अक्तूबर 2019 से लागू करना था, लेकिन अदालतों के विभिन्न फैसलों की वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका था। नए कानून के तहत होमलैंड सुरक्षा विभाग यह पहचान करेगा कि कौन विदेशी नागरिक देश में रहने योग्य नहीं है और क्यों उसे अमेरिका में स्थायी निवास की अनुमति नहीं दी जा सकती। क्योंकि वह भविष्य में कभी भी ‘पब्लिक चार्ज’ बन सकता है।
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