होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक स्विस कोड राइटिंग कंपनी के जरिये कई दशक तक भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के उन तमाम देशों की जासूसी की, जिन पर वह नजर रखना चाहती थी। इस कंपनी के उपकरणों का उपयोग पूरे विश्व में विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा अपने जासूसों, सैनिकों और गोपनीय राजनयिकों के साथ संदेशों के आदान-प्रादान के लिए बेहद विश्वसनीय माना जाता रहा, लेकिन किसी को भी इस कंपनी का मालिकाना हक संयुक्त रूप से सीआईए और उसकी सहयोगी पश्चिमी जर्मनी की खुफिया एजेंसी बीएनडी के पास होने की भनक तक नहीं लगी। यह सिलसिला 50 साल तक चलता रहा।
अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट और जर्मनी के सरकारी ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में एक सौदा किया था, जिसके तहत 1970 में इसका मालिकाना हक सीआईए को मिल गया। रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से इस बात का पर्दाफाश किया गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी जर्मनी ने सालों तक दूसरे देशों के भोलेपन का फायदा उठाया। इन्होंने उनका पैसा ले लिया और उनकी गोपनीय जानकारियां भी चुरा लीं। सीआईए और बीएनडी ने इस ऑपरेशन को पहले थेसौरस और फिर रूबीकॉन नाम दिया था।
अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट और जर्मनी के सरकारी ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में एक सौदा किया था, जिसके तहत 1970 में इसका मालिकाना हक सीआईए को मिल गया। रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से इस बात का पर्दाफाश किया गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी जर्मनी ने सालों तक दूसरे देशों के भोलेपन का फायदा उठाया। इन्होंने उनका पैसा ले लिया और उनकी गोपनीय जानकारियां भी चुरा लीं। सीआईए और बीएनडी ने इस ऑपरेशन को पहले थेसौरस और फिर रूबीकॉन नाम दिया था।
सहयोगियों की भी की गई जासूसी
सूचना व संचार सुरक्षा विशेषज्ञ कही जाने वाली क्रिप्टो एजी की स्थापना 1940 में एक स्वतंत्र कंपनी के तौर पर हुई थी और 2018 में इसे बंद किया गया। क्रिप्टो मशीन को रूस से अमेरिका और फिर स्वीडन भाग गए बोरिस हेगेलिन ने बनाया था। इस कंपनी के 120 ग्राहकों में ईरान, कई लैटिन अमेरिकी देश, भारत, पाकिस्तान और यहां तक कि वेटिकन सिटी भी शामिल था। इनमें पाकिस्तान आदि तो अमेरिका के खास सहयोगियों में शामिल थे, लेकिन तब भी उनके संदेशों को रिकॉर्ड किया गया। हालांकि इस रिपोर्ट पर नई दिल्ली की तरफ से कोई अधिकृत प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि भारत का कोई खुफिया ऑपरेशन इस मशीन के जरिये सीआईए ने इंटरसेप्ट किया था या नहीं।
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