लखनऊ, देश के दिग्गज नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म भूषण स्व. रामविलास पासवान जी की आज 6वीं पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजक स्वयं उनके पुत्र और केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान थे। सभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य रूप से शामिल हुए और स्व. पासवान के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर चिराग पासवान ने भावुक होते हुए सोशल मीडिया पर आभार जताया। चिराग ने एक्स पर लिखा - *"योगी जी ने अपना बहुमूल्य समय निकालकर पापा को श्रद्धांजलि दी। उनका खुद आकर श्रद्धांजलि देना मेरे और मेरे परिवार के लिए सम्मान का क्षण है। इससे साफ है कि पापा और योगी जी का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्नेह और आत्मीयता का था।"* स्व. रामविलास पासवान को दलितों-पिछड़ों की आवाज माना जाता था और उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर के सपनों को पूरा करने में लगा दिय...
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक स्विस कोड राइटिंग कंपनी के जरिये कई दशक तक भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के उन तमाम देशों की जासूसी की, जिन पर वह नजर रखना चाहती थी। इस कंपनी के उपकरणों का उपयोग पूरे विश्व में विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा अपने जासूसों, सैनिकों और गोपनीय राजनयिकों के साथ संदेशों के आदान-प्रादान के लिए बेहद विश्वसनीय माना जाता रहा, लेकिन किसी को भी इस कंपनी का मालिकाना हक संयुक्त रूप से सीआईए और उसकी सहयोगी पश्चिमी जर्मनी की खुफिया एजेंसी बीएनडी के पास होने की भनक तक नहीं लगी। यह सिलसिला 50 साल तक चलता रहा।
अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट और जर्मनी के सरकारी ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में एक सौदा किया था, जिसके तहत 1970 में इसका मालिकाना हक सीआईए को मिल गया। रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से इस बात का पर्दाफाश किया गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी जर्मनी ने सालों तक दूसरे देशों के भोलेपन का फायदा उठाया। इन्होंने उनका पैसा ले लिया और उनकी गोपनीय जानकारियां भी चुरा लीं। सीआईए और बीएनडी ने इस ऑपरेशन को पहले थेसौरस और फिर रूबीकॉन नाम दिया था।
अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट और जर्मनी के सरकारी ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में कहा गया कि स्विट्जरलैंड की क्रिप्टो एजी कंपनी के साथ सीआईए ने 1951 में एक सौदा किया था, जिसके तहत 1970 में इसका मालिकाना हक सीआईए को मिल गया। रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से इस बात का पर्दाफाश किया गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी जर्मनी ने सालों तक दूसरे देशों के भोलेपन का फायदा उठाया। इन्होंने उनका पैसा ले लिया और उनकी गोपनीय जानकारियां भी चुरा लीं। सीआईए और बीएनडी ने इस ऑपरेशन को पहले थेसौरस और फिर रूबीकॉन नाम दिया था।
सहयोगियों की भी की गई जासूसी
सूचना व संचार सुरक्षा विशेषज्ञ कही जाने वाली क्रिप्टो एजी की स्थापना 1940 में एक स्वतंत्र कंपनी के तौर पर हुई थी और 2018 में इसे बंद किया गया। क्रिप्टो मशीन को रूस से अमेरिका और फिर स्वीडन भाग गए बोरिस हेगेलिन ने बनाया था। इस कंपनी के 120 ग्राहकों में ईरान, कई लैटिन अमेरिकी देश, भारत, पाकिस्तान और यहां तक कि वेटिकन सिटी भी शामिल था। इनमें पाकिस्तान आदि तो अमेरिका के खास सहयोगियों में शामिल थे, लेकिन तब भी उनके संदेशों को रिकॉर्ड किया गया। हालांकि इस रिपोर्ट पर नई दिल्ली की तरफ से कोई अधिकृत प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि भारत का कोई खुफिया ऑपरेशन इस मशीन के जरिये सीआईए ने इंटरसेप्ट किया था या नहीं।
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