होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
उत्तर प्रदेश में फाइलेरिया अभियान जिला मलेरिया अधिकारियों के जिम्मे चल रहा है। वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने फाइलेरिया संवर्ग में कई नए पदों के सृजन और जिम्मेदारी तय करने की संस्तुति की थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। अब फाइलेरिया (हाथी या फील पांव) का प्रकोप 51 जिलों से बढ़कर पूरे प्रदेश में फैल गया है। एक सर्वे में बचे हुए 24 जिलों में भी बीमारी फैलने का खुलासा हुआ है। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई है।
वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने सीनियर फाइलेरिया इंस्पेक्टर, बॉयोलॉजिस्ट और फाइलेरिया कंट्रोल ऑफिसर का पद सृजित करने और उनका कार्य दायित्व निर्धारण करने की संस्तुति की थी, लेकिन इस पूरे मामले पर शासन के अधिकारी ही कुंडली मारकर बैठ गए। तत्कालीन मुख्य सचिव ने मलेरिया इंस्पेक्टर, सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर, सहायक मलेरिया अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी की तरह फाइलेरिया संवर्ग के लिए चार अधिकारी तय किए थे। जबकि मलेरिया संवर्ग का कार्य दायित्व 2010 में जारी हो गया था। वहीं, फाइलेरिया संवर्ग में सिर्फ फाइलेरिया इंस्पेक्टर का ही पद है। अन्य कार्य मलेरिया संवर्ग के अधिकारी संभालते हैं।
17 फरवरी से 31 जिलों में चलेगा अभियान
प्रदेश में 25 नवंबर से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चल रहा है। 31 जिलों में यह कार्यक्रम 17 फरवरी से चलाया जाएगा। 19 जिलों में 10 दिसंबर 2019 तक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत दवा खिलाई जा चुकी है। इसके तहत पहले चरण में 19 जिलों को दो हिस्सों में बांटकर दवा लोगों को खिलाई गई है।
11 जिलों में ट्रिपल ड्रग और आठ जिलों में डबल ड्रग लोगों को दी गई है। फाइलेरिया ग्रस्त मरीज को डबल ड्रग के जरिये ठीक होने में पांच से छह साल लगते हैं। जबकि ट्रिपल ड्रग के जरिये दो से तीन साल में ही मरीज स्वस्थ हो जाता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 तक देश को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
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