होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत प्रमुख दूरसंचार कंपनियों ने समायोजित सकल आय (एजीआर) मामले में सुप्रीम कोर्ट से खुली सुनवाई की मांग की है।
इन कंपनियों को जल्द ही सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया जमा करना है। 24 अक्तूबर को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों का समय इन कंपनियों को बकाया जमा करने के लिए दिया था।
बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा की अदालत में इन कंपनियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कंपनियों की तरफ से यह मांग रखी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वो मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे से बात करके फैसला लेंगे।
कीमतों को लेकर कंपनियों में चल रही प्रतिस्पर्धा से इस उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। लगातार घाटे ने कई कंपनियों को इस क्षेत्र से बाहर कर दिया है। एक समय इस उद्योग में सात-आठ कंपनियां थीं, जो घटकर अब तीन हो गई हैं। चौथी सरकारी कंपनी है।
सुप्रीम कोर्ट के नॉन-कोर राजस्व को भी कंपनियों के कुल समेकित राजस्व (एजीआर) में शामिल करने के आदेश से मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो एवं पुरानी दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और बढ़ गई है। हालांकि, टैरिफ बढ़ाने और नियामक के फ्लोर या न्यूनतम टैरिफ तय करने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेप का दोनों पक्षों से समर्थन मिलने के संकेत दिख रहे हैं।
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए फ्लोर प्राइज की वकालत करते हुए कहा कि हमने वॉइस कॉल से वीडियो कॉल की सुविधा में बिना ज्यादा खर्च बढ़ाए विस्तार किया। मौजूदा दबाव से निपटने के लिए ट्राई मार्च, 2020 से पहले जल्द-से-जल्द डाटा के लिए फ्लोर प्राइज लाए।
बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा की अदालत में इन कंपनियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कंपनियों की तरफ से यह मांग रखी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वो मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे से बात करके फैसला लेंगे।
कीमतों को लेकर कंपनियों में चल रही प्रतिस्पर्धा से इस उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। लगातार घाटे ने कई कंपनियों को इस क्षेत्र से बाहर कर दिया है। एक समय इस उद्योग में सात-आठ कंपनियां थीं, जो घटकर अब तीन हो गई हैं। चौथी सरकारी कंपनी है।
सुप्रीम कोर्ट के नॉन-कोर राजस्व को भी कंपनियों के कुल समेकित राजस्व (एजीआर) में शामिल करने के आदेश से मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो एवं पुरानी दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और बढ़ गई है। हालांकि, टैरिफ बढ़ाने और नियामक के फ्लोर या न्यूनतम टैरिफ तय करने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेप का दोनों पक्षों से समर्थन मिलने के संकेत दिख रहे हैं।
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए फ्लोर प्राइज की वकालत करते हुए कहा कि हमने वॉइस कॉल से वीडियो कॉल की सुविधा में बिना ज्यादा खर्च बढ़ाए विस्तार किया। मौजूदा दबाव से निपटने के लिए ट्राई मार्च, 2020 से पहले जल्द-से-जल्द डाटा के लिए फ्लोर प्राइज लाए।
भारत में मोबाइल डाटा सबसे सस्ता
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाला दूरसंचार बाजार है। इसके अलावा, यह सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बनकर उभरा है। 2019 में अमेरिका में एक जीबी मोबाइल डाटा की कीमत 12.37 डॉलर (करीब 880.73 रुपये) है। ब्रिटेन में इसके लिए 6.66 डॉलर (करीब 474.18 रुपये) खर्च करना पड़ता है। वहीं, भारत में यह कीमत महज 0.26 डॉलर (18.51 रुपये) है।
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