होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
कार्तिक एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, वह उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के रहने वाले हैं
राष्ट्रीय टीम में कार्तिक त्यागी के चयन तक का सफर काफी मुश्किल भरा रहा है, कार्तिक बोले- कई दिक्कतों का सामना किया
पहले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 17 के स्कोर तक पहुंचते-पहुंचते ऑस्ट्रेलिया के चार बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे
हापुड़
आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका में खेला जा रहा है और टीम इंडिया ने धमाल मचाते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। टूर्नमेंट के पहले क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में भारत ने 3 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 74 रनों से करारी शिकस्त दी। उसकी जीत के हीरो रहे तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी। उत्तर प्रदेश के इस होनहार ने 8 ओवर में महज 24 रन देते हुए 4 विकेट झटके और 233 रनों आसान लक्ष्य का पीछा करने उतरी कंगारू टीम को 159 रनों पर समेटने में अहम भूमिका निभाई। मैन ऑफ द मैच रहे त्यागी के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे कि वह कभी अपने पिता के साथ खेतों में काम करते थे।
पिता के साथ खेतों में काम करते थे त्यागी
कार्तिक का बोरे ढोने वाले मजदूर से जूनियर इंटरनैशनल टीम में सिलेक्शन तक का सफर आसान नहीं रहा। कार्तिक एक गरीब किसान परिवार से आते हैं। कार्तिक को क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाने के लिए उनके पिता योगेंद्र ने ढेरों दिक्कतों का सामना करना किया है। एक वह वक्त भी था जब त्यागी अपने पिता के खेतों में उनकी मदद करते थे। इन सभी स्ट्रगल के बीच एक बात तय थी कि वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। कहते हैं न जहां चाह है वहीं राह है... यह सच भी साबित हुआ।
कूच बेहार के बाद रणजी का सफर, यह रहा टर्निंग पॉइंट
17 वर्ष की उम्र में त्यागी ने कूच बेहार ट्रोफी में शानदार प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश की रणजी ट्रोफी टीम में जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम की जीत के लिए पूर्व में चैंपियन रहे विदर्भ के खिलाफ भी बेहतरीन गेंदबाजी की। इसके साथ ही कार्तिक की जिंदगी बदल गई। कार्तिक ने पहली बार पिछले वर्ष जून-जुलाई में अंडर-19 टीम में चयन के बाद उन्होंने बताया था, 'मुझे बीसीसीआई मैनेजर अमित सिद्धेश्वर सर का फोन आया था और उन्होंने मुझे बताया कि मेरा सिलेक्शन अंडर-19 टीम में हो गया है। मैंने और मेरे पिता ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए ढेरों समस्याओं का सामना किया है। बचपन से मुझे क्रिकेट पसंद था, यह सबकुछ मेरे पिता ने देखआ और मेरा साथ दिया।'
ऐसा रहा मैच का रोमांच
क्वॉर्टर फाइनल के पहले मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान के साथ 233 रनों का स्कोर बनाया। इस स्कोर का पीछा करने उतरी कंगारू टीम ने त्यागी के पहले ही ओवर में तीन विकेट खो दिए। जेक फ्रेजर मैकगर्क पहली ही गेंद पर रनआउट हुए, जिसके बाद कैप्टन मैकेंजरी हार्वे 4 रनों के साथ कार्तिक त्यागी की गेंदबाजी का शिकार हो गए। इसी ओवर में लचलम हीर्वे को भी त्यागी ने पविलियन का रास्ता दिखा दिया। 17 के स्कोर तक पहुंचते-पहुंचते ऑस्ट्रेलिया के चार बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे।
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