होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (HBCH & MPMMCC), वाराणसी में कैनकिड्स किड्सकैन तथा एक्सिस बैंक के सहयोग से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी नर्सेज़ वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बाल कैंसर रोगियों की देखभाल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावहारिक दक्षता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अमिता महेश्वरी, निदेशक, HBCH एवं MPMMCC के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. बी.के. मिश्रा, उप निदेशक, डॉ. शशिकांत पाटने, डीन अकादमिक्स, डॉ. राघवेश रंजन, प्रभारी, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग, तथा डॉ. सौमित्र साहा, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। कार्यशाला का शुभारम्भ पंजीकरण एवं प्री-टेस्ट के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. योगिता भाटिया ने कैनकिड्स किड्सकैन की गतिविधियों एवं बाल कैंसर देखभाल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बाल कैंसर की पहचान एवं उपचार, न्यूट्रोपेनिक फीवर का प्रबंधन, पोषण संबंधी देखभाल, रक्त एवं...
निर्भया के दोषियों की फांसी में देरी हो सकती है। दरअसल दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने पटियाला हाउस अदालत से जारी डेथ वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अदालत में सुनवाई जारी है।
- मुकेश के वकील जॉन ने कहा कि दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसे 14 दिन का समय दीजिए।
- जॉन ने कहा कि दोषी ने दया याचिका डाली है उस पर निर्णय होने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के हिसाब से इसे 14 दिन मिलने चाहिए। सिर्फ यही नहीं दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसे अपने कानूनी अधिकार को इस्तेमाल करने के लिए समय मिलना चाहिए।
- एडवोकेट जॉन की दलीलों के बाद जस्टिस मनमोहन ने कहा आपकी आपराधिक याचिका 2017 में खारिज कर दी गई थी। तब आपने क्यों नहीं क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका डाली? आप ढाई साल से क्या कर रहे थे? कानून आपको सिर्फ एक उचित समय दे सकता है याचिकाएं डालने के लिए।
- राष्ट्रपति से दया की याचिका करना आर्टिकल 72 के अनुसार हर मौत की सजा पाए दोषी का संवैधानिक अधिकार है। यह कोई प्रिविलेज की बात नहीं है बल्कि अधिकार का सवाल है।
- जॉन ने ये भी बताया कि क्यों क्यूरेटिव पिटीशन 6 जनवरी को फाइल नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि दो डॉक्यूमेंट जो मांगे गए थे वो उपलब्ध न हो सकने के कारण ऐसा हुआ।
- जॉन ने कहा कि दोषी की आखिरी सांस तक भी उसे अपने कानूनी अधिकार इस्तेमाल करने का हक है।
- जॉन ने अपनी दलील रखते हुए शत्रुघ्न चौहान बनाम यूओआई केस का उदाहरण भी रखा कि मौत की सजा पा चुके दोषी भी आर्टिकल 21 के हिसाब से सुरक्षा पाने के अधिकारी हैं।
- जॉन ने बताया कि दोषी मुकेश और विनय ने अपनी क्यूरेटिव पिटिशन नौ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में डाली थी।
- वकील जॉन ने कहा कि तिहाड़ प्रशासन ने 18 जनवरी को चारों दोषियों को नोटिस दिया था, जिसमें बताया था कि उनके पास सिर्फ दया याचिका का रास्ता है। उन्हें क्यूरेटिव पिटीशन के बारे में नहीं बताया गया था।
- वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने मुकेश की तरफ से बोलते हुए कहा कि फांसी को फिल्हाल के लिए रोक दिया जाए।
- जस्टिस मनमोहन और जस्टिस ढींगरा की बेंच के सामने शुरू हुई सुनवाई।
निर्भया के दोषियों की फांसी के लिए अदालत ने सात जनवरी को डेथ वारंट जारी किया था। इन दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जानी है। मुकेश ने राष्ट्रपति को दया याचिका भी भेजी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुकेश व विनय की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी।
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